ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले से उसके पड़ोसी देश क्यों चिंतित हैं?

अप्रैल 1986 में, यूक्रेन में चेर्नोबिल परमाणु रिएक्टर परीक्षण के दौरान फट गया. एक भीषण विस्फोट से संयंत्र की छत उड़ गई और कई दिनों तक आग जलती रही. 30 लोगों की तुरंत मौत हो गई, जबकि हजारों लोग थायरॉइड कैंसर से पीड़ित हो गए. अगर ईरान में ऐसा हुआ तो कई देशों पर असर पड़ेगा.

विज्ञापन
Read Time: 6 mins
ईरान का बुशहर परमाणु संयंत्र.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के करीब मिसाइल गिरने से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता है
  • बुशहर संयंत्र ईरान की एकमात्र नागरिक परमाणु सुविधा है, जिसका निर्माण रूस ने पूरा कर 2013 में सौंपा था
  • संयंत्र में लगभग 282 टन परमाणु सामग्री है, जिसमें सीज़ियम-137 की मात्रा चेर्नोबिल आपदा से दस गुना अधिक है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

शनिवार को ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र से महज 350 मीटर की दूरी पर एक मिसाइल गिरी. ये 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से इस तरह का चौथा हमला था. इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है. आज भी इजरायली वायु सेना के हमलों ने बुशहर में ईरान के सबसे बड़े नौसैनिक अड्डे को नष्ट कर दिया. ये हमले आज सुबह किए गए. बुशहर में एक बड़ा नौसैनिक अड्डा, एक वायु सेना अड्डा, एयर डिफेंस सिस्टम, साथ ही मिसाइलों और हमलावर ड्रोनों के लिए भूमिगत भंडारण सुविधाएं स्थित हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित इस संयंत्र पर लगातार हमले अंततः रेडियोधर्मी विकिरण का कारण बन सकते हैं, जिससे "तेहरान नहीं, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की राजधानियों में जीवन समाप्त हो सकता है."

बुशहर परमाणु संयंत्र के बारे में

ईरान की एकमात्र कार्यरत नागरिक परमाणु सुविधा, बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण की परियोजना शाह के शासनकाल के दौरान 1975 में शुरू हुई थी और शुरू में इसे जर्मनी की सीमेंस को सौंपा गया था, लेकिन 1979 की इस्लामी क्रांति और ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) के कारण इस पर काम बाधित हो गया था.

ईरान ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध में इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन जर्मनी की सरकार ने परमाणु प्रसार संबंधी चिंताओं के कारण सीमेंस को पीछे हटने के लिए मना लिया. अंततः इस संयंत्र का निर्माण रूस द्वारा किया गया, जिसने 1996 में अनुबंध अपने हाथ में लिया और सितंबर 2013 में आधिकारिक तौर पर इसे सौंप दिया. वित्तीय विवादों, भू-राजनीतिक दबाव और अन्य कारकों के कारण 1999 में रिएक्टर को चालू करने की समय सीमा में 11 वर्षों की देरी हुई.

यह संयंत्र देश के दक्षिण में स्थित है और इसमें 1,000 मेगावाट का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर लगा है. सीएनएन के अनुसार, यह ईरान की कुल बिजली का लगभग 1-2 प्रतिशत प्रदान करता है.

Advertisement

ईरान बुशहर संयंत्र को कई रिएक्टरों तक विस्तारित करने का प्रयास कर रहा है. 2019 में, इसने एक परियोजना शुरू की, जिसके तहत अंततः इस संयंत्र में दो अतिरिक्त रिएक्टर जोड़ने की योजना है, जिनमें से प्रत्येक 1,000 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता प्रदान करेगा. प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा दिसंबर में ली गई एक सैटेलाइट इमेज में दिखाया गया है कि संयंत्र में निर्माण कार्य अभी भी जारी है और दोनों स्थलों पर क्रेनें लगी हुई हैं.

बुशहर में वर्तमान में चल रहा रिएक्टर रूस से प्राप्त 4.5 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का उपयोग करता है, जो ऐसे संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक निम्न स्तर है. हाऊस ऑफ सऊद के अनुसार, बुशहर संयंत्र में लगभग 282 टन परमाणु सामग्री है. इसमें रिएक्टर कोर में 72 टन सक्रिय ईंधन और संयंत्र के ऊंचे भंडारण पूल में लगभग 210 टन प्रयुक्त ईंधन शामिल है. प्रयुक्त ईंधन में सीज़ियम-137 की मात्रा लगभग 2,600 पेटाबेकरेल है, जो चेर्नोबिल आपदा के दौरान जारी की गई मात्रा से दस गुना अधिक है.

Advertisement

ये हमले अन्य देशों को चिंतित क्यों करती हैं?

बुशहर लगभग 2,50,000 लोगों का शहर है. ये ईरान की राजधानी की तुलना में कुवैत, बहरीन और कतर के कहीं अधिक निकट है. बुशहर से कुवैत नगरी लगभग 270 किलोमीटर दूर है, बहरीन की राजधानी मनामा लगभग 350 किलोमीटर दूर है, सऊदी अरब के दम्माम, धहरान और अल खोबार 400 किलोमीटर दूर हैं, दोहा लगभग 450 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, जबकि रियाद 750 किलोमीटर दूर है.

फारस की खाड़ी के दूसरी ओर ईरान के सामने स्थित इन तीन रेगिस्तानी राज्यों में प्राकृतिक जल भंडार बहुत कम हैं और यहां 1.8 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनके पीने के पानी का एकमात्र स्रोत खाड़ी से निकाला गया खारा पानी है.

इसके अलावा, आईएईए और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई हमला रिएक्टर या ईंधन भंडारण पूल को प्रभावित करता है, तो रेडियोधर्मी कण, विशेष रूप से खतरनाक आइसोटोप सीज़ियम-137, वायुमंडल में फैल जाएंगे. जाग्रोस पर्वतमाला द्वारा बुशहर के उत्तर में निर्मित ढाल और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण रेडियोधर्मी कण कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की ओर बह जाएंगे. इससे प्रभावित क्षेत्र में भोजन, मिट्टी और पानी दशकों तक दूषित रहेंगे. अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, तत्काल प्रभाव से जलने और मौत हो सकती है, जबकि दीर्घकालिक रूप से कैंसर का खतरा बढ़ जाएगा. यह कहना गलत नहीं होगा कि रास्ते में पड़ने वाले विलवणीकरण संयंत्र भी प्रभावित होंगे.

पड़ोसी अरब खाड़ी देशों ने संयंत्र की विश्वसनीयता को लेकर अक्सर चिंता व्यक्त की है और एक बड़े भूकंप की स्थिति में रेडियोधर्मी रिसाव के जोखिम को लेकर भी चिंता जताई है. पिछले साल कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने चेतावनी दी थी कि ईरान के परमाणु स्थलों पर हमले से खाड़ी में "पानी नहीं बचेगा, मछली नहीं बचेगी, कुछ भी नहीं बचेगा... जीवन नहीं बचेगा."

Advertisement

ईरान में अन्य परमाणु स्थल

  • नतान्ज ईंधन संवर्धन संयंत्र: यूरेनियम संवर्धन के लिए सबसे बड़ा, अधिकतर भूमिगत संयंत्र. इस पर कई बार हमले हो चुके हैं.
  • फोर्डो ईंधन संवर्धन संयंत्र: एक पहाड़ में निर्मित, अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत संवर्धन स्थल.
  • इस्फहान रूपांतरण केंद्र: इसमें यूरेनियम रूपांतरण सुविधाएं और एक ईंधन निर्माण संयंत्र शामिल हैं.
  • अराक भारी जल परमाणु ऊर्जा संयंत्र: एक भारी जल उत्पादन संयंत्र और एक 40 मेगावाट का भारी जल रिएक्टर.

पिछली परमाणु आपदाएं

अप्रैल 1986 में, यूक्रेन में चेर्नोबिल परमाणु रिएक्टर परीक्षण के दौरान फट गया. एक भीषण विस्फोट से संयंत्र की छत उड़ गई और कई दिनों तक आग जलती रही. 30 लोगों की तुरंत मौत हो गई, जबकि हजारों लोग थायरॉइड कैंसर से पीड़ित हो गए. 3,00,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. 2011 में, एक भूकंप के कारण जापान के फुकुशिमा परमाणु रिएक्टर पिघल गए. लगभग 1,60,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.

ये भी पढ़ें-

ईरान-सऊदी को युद्ध ने किया मालामाल, जानिए क्यों कुछ देशों का तेल का धंधा हुआ मंदा?

ईरान युद्ध के बाद क्या इजरायल का अगला टारगेट तुर्की? जानिए कैसे बन रहे समीकरण

अमेरिका संग युद्धविराम पर ईरान का आया जवाब, 15 सूत्री प्रस्ताव को लेकर भी की बात

फ्रांस के नागरिक को चीन ने दे दी फांसी, 16 साल पुराने केस की सजा टाइमिंग में है बड़ा मैसेज

Advertisement

युद्ध की तैयारी? जर्मनी में अब पुरुषों को लंबी विदेश यात्राओं की सूचना सेना को देनी होगी

भारत ने सात साल में पहली बार ईरान से तेल खरीदा, अब पेमेंट में भी नहीं है प्रॉब्लम

ईरान-अमेरिका की दुश्मनी: कितनी गहरी, कितनी पुरानी, महज एक फैसले ने बनाया जानी दुश्मन

F-15E फाइटर जेट में सवार अमेरिकी ईरान में पकड़ा गया तो 1979 वाला हाल होगा या 2016 वाला

Featured Video Of The Day
"West Bengal SIR Case: सुप्रीम कोर्ट की ममता सरकार को कड़ी फटकार, जानिए क्या कहा | Ashish Bhargava