अबू मूसा, ग्रेटर तुनब और लेसर तुनब... ईरान से होर्मुज खुलवाने के लिए अंग्रेजों वाला नुस्खा आजमाएगा अमेरिका

28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन को पहले ही बाधित कर दिया है. ईरान ने जहाजों को चेतावनी दी है और घुसपैठ करने वाले जहाजों पर हमला किया है. इसके परिणामस्वरूप, जहाजों का आवागमन तेजी से कम हो गया है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
अमेरिका की नजर इन तीन द्वीपों पर पड़ चुकी है.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के नियंत्रण वाले तीन द्वीपों पर कब्जा करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है
  • अबू मूसा, ग्रेटर तुनब और लेसर तुनब पर संयुक्त अरब अमीरात का दावा है जबकि ईरान का नियंत्रण है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति के संभावित आदेश के तहत द्वीपों पर कार्रवाई के लिए मरीन, जहाज और विमान तैनात किए गए हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए अमेरिका अब अंग्रेजों वाला पुराना नुस्खा इस्तेमाल करने वाला है. ईरान ने होर्मुज को घेर रखा है. ऐसे में उसके पास मौजूद तीन द्वीपों पर अमेरिका की नजर गड़ गई है. अबू मूसा, ग्रेटर तुनब और लेसर तुनब जलडमरूमध्य के संकरे प्रवेश द्वार के पास स्थित हैं. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना इन द्वीपों पर नियंत्रण करने सहित कई विकल्पों पर विचार कर रही है. इसका उद्देश्य संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रोकने या धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना है.

संयुक्त अरब अमीरात से है विवाद

एक्सियोस की 26 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ईरान के खिलाफ संभावित "अंतिम प्रहार" के लिए कई सैन्य विकल्पों की तैयारी कर रहा है, जिसमें अबू मूसा, ग्रेटर तुनब और लेसर तुनब पर कब्जा करने की योजना भी शामिल है. ये तीनों द्वीप ईरान के नियंत्रण में हैं, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात इन पर अपना दावा करता है. ईरान ने 1971 में, संयुक्त अरब अमीरात के गठन से ठीक पहले, इन द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया था. दशकों से यह विवाद अनसुलझा है, लेकिन काफी हद तक नियंत्रण में है. मोहम्मद फ़ारसी ने 1979 से पहले खारग द्वीप पर सेवा की थी. उन्होंने आरएफई/आरएल को बताया, “इन द्वीपों पर कब्जा करने की उनकी मंशा बहुत अधिक है.” मरीन, जहाजों और विमानों सहित अमेरिकी अभियान बलों की तैनाती ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा द्वीपों पर कार्रवाई करने के संभावित आदेश की अटकलों को और तेज कर दिया है.

ईरान के स्पीकर जता चुके हैं अंदेशा

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कुलीबाफ ने इससे पहले X पर कहा था कि खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय देश द्वारा समर्थित ईरान के "दुश्मन" उसके एक द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी कर रहे हैं. वॉशिंगटन न्यूज जर्नल के अनुसार, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि द्वीपों पर नियंत्रण से अमेरिका को जलडमरूमध्य की निगरानी करने और नौसैनिक अभियानों में सहायता करने में मदद मिल सकती है. इससे युद्ध समाप्त करने के लिए किसी भी वार्ता में वाशिंगटन को भी लाभ मिल सकता है. हालांकि, ईरान केवल इन द्वीपों पर ही निर्भर नहीं है. वह मुख्य भूमि से मिसाइलों, ड्रोन और नौसैनिक इकाइयों का उपयोग करके जहाजों को निशाना बना सकता है. इसका मतलब यह है कि भले ही द्वीपों पर कब्जा कर लिया जाए, जहाजों के आवागमन को खतरा बना रह सकता है.

28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन को पहले ही बाधित कर दिया है. ईरान ने जहाजों को चेतावनी दी है और घुसपैठ करने वाले जहाजों पर हमला किया है. इसके परिणामस्वरूप, जहाजों का आवागमन तेजी से कम हो गया है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं. अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिसमें ईरान के मुख्य तेल टर्मिनलों में से एक खारग द्वीप भी शामिल है. अब ध्यान जमीनी लक्ष्यों से हटकर समुद्री मार्गों पर नियंत्रण पर केंद्रित हो रहा है.

Advertisement

ये भी पढ़ें-

मरकावा नरसंहार 2006 के बाद 2026, 100 इजरायली टैंक मारने का हिज्बुल्लाह ने किया दावा

ईरान युद्ध में ट्रंप को शनिवार क्यों पसंद, पेंटागन की पिज्जा मीटर रिपोर्ट से क्यों दहशत में रक्षा विशेषज्ञ?

इजरायल की 'किल लिस्ट' से ईरान के विदेश मंत्री और संसद के स्पीकर को अचानक क्यों हटाया गया?

चीन ने खड़ी कर दी अपनी भेड़िया रोबोट आर्मी, मिसाइल-रॉकेट लॉन्चर से लैस होकर जानिए कैसे लड़ेंगे युद्ध

कुत्तों और इंसानों का 15,000 साल से भी अधिक पुराना है नाता, नई रिसर्च में कई बातें चौंकाने वाली

Featured Video Of The Day
Iran का Saudi Arab पर हमला, प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल दागी, 10 अमेरिकी सैनिक घायल | BREAKING