महिला आरक्षण बिल को संविधान में संशोधन की आवश्यकता थी, जिसके लिए संसद में दो तिहाई बहुमत चाहिए था बिल में अगली जनगणना और सीटों के परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू करने की शर्त रखी गई थी विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया और तुरंत लागू करने की मांग की थी