- पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत के लिए US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रवाना हो गए हैं.
- पाकिस्तान रवाना होते समय जेडी वेंस ने ईरान को चेतावनी देते हुए बातचीत में नरम रवैया न अपनाने की बात कही है.
- इस वार्ता की सफलता या विफलता पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है.
Iran US Talk in Islamabad: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच करीब 40 दिन तक चली जंग दो हफ्तों के सीजफायर समझौते पर थम गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद यह अमेरिका और ईरान बातचीत के टेबल पर आने को तैयार हुए है. शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के फाइव स्टार होटल सेरेना में दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत होनी है. इस बातचीत में शामिल होने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रवाना हो चुके हैं. शुक्रवार को पाकिस्तान के लिए रवाना होते समय जेडी वेंस ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए फिर से ईरान को कड़ी चेतावनी दी है.
चाल चलने की कोशिश की तो हमारी टीम भी इतनी नरम नहींः वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अमेरिका के साथ "खेल" न करे. इस्लामाबाद रवाना होते समय जेडी वेंस ने कहा, "जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम भी निश्चित रूप से दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं. लेकिन अगर वह हमारे साथ ‘खेल' करने की कोशिश करेगा, तो हमारी टीम बिल्कुल भी नरम रवैया नहीं अपनाएगी."
प्रतिबंधों पर राहत, ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों पर होगी बातचीत
रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत वाले अमेरिकी डेलिगेशन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और सीनियर एडवाइजर जेरेड कुशनर भी होंगे. बातचीत का मुख्य एजेंडा एक दीर्घकालिक शांति व्यवस्था के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार करने पर रहने की उम्मीद है, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रम के भविष्य जैसे मुद्दे शामिल होंगे. इस बातचीत के लिए इस्लामाबाद में विशेष तैयारियां की गई है.
अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली इस बातचीत पर पूरी दुनिया की निगाह
तेहरान ने संकेत दिया है कि यह बातचीत प्रस्तावित 10 सूत्री योजना पर आधारित होगी, जिसमें प्रतिबंधों को हटाने, भविष्य के हमलों के खिलाफ गारंटी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की व्यवस्था शामिल है. शनिवार को होने वाली इस वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसकी सफलता या विफलता का पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दूरगामी असर पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें - इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारियां जोरों पर, दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलेंगे या नहीं?
यह भी पढ़ें - बातचीत की तैयारी के बीच पाकिस्तान के नूर खान बेस क्यों पहुंचा अमेरिका वायु सेना का विमान?













