- अमेरिका के कई बड़े शहरों में नो किंग्स प्रोटेस्ट के तहत ट्रंप के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप की नीतियां तानाशाही और युद्ध को बढ़ावा देने वाली हैं
- प्रदर्शनों में लाखों लोग शामिल हुए हैं और प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप समेत अन्य नेताओं को पद से हटाने की मांग की
ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. कई अमेरिकी शहरों में ट्रंप के खिलाफ ये प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों को 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' नाम दिया गया है. ट्रंप के खिलाफ 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' का ये तीसरा दौर है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ट्रंप की नीतियों का विरोध कर रहे हैं. इन नीतियों में ईरान के साथ युद्ध, अप्रवासियों के खिलाफ कानून और बढ़ती महंगाई शामिल हैं.
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'ट्रंप हम पर एक तानाशाह की तरह राज करना चाहते हैं लेकिन यह अमेरिका और यहां असली ताकत लोगों के हाथ में होती है, न कि उन लोगों के हाथों में जो खुद को राजा समझना चाहते हैं.'
वहीं, व्हाइट हाउस ने इन प्रोटेस्ट को ट्रंप विरोधी पागलपन करार दिया है. व्हाइट हाउस एक प्रवक्ता ने कहा कि इन प्रदर्शनों की परवाह सिर्फ वे रिपोर्टर करते हैं, जिन्हें इन्हें कवर के लिए पैसे मिलते हैं.
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अमेरिका में क्या हो रहा है?
पूरे देश में 'No Kings Protest' हो रहे हैं. इनमें शामिल प्रदर्शनकारी ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध का विरोध कर रहे हैं. पिछले साल भी दो बार अमेरिका भर में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' हुए थे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को पूरे दिन न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस समेत अमेरिका के लगभग हर बड़े शहर में प्रदर्शन हुए. वॉशिंगटन डीसी के डाउनटाउन की सड़कों पर रैलियां होती रहीं. प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर कतारें लगा लीं और नेशनल मॉल खचाखच भरा रहा.
पिछले दो प्रदर्शनों की तरह ही इस बार भी 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनके सरकार में शामिल अधिकारियों के पुतले लहराए और उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की. हजारों लोग हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों को डेमोक्रेट्स का समर्थन भी मिल रहा है.
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कितने बड़े पैमाने पर हो रहे हैं प्रदर्शन?
पिछले साल जून और फिर अक्टूबर में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' हुए थे. आयोजकों का दावा है कि जून के प्रदर्शनों में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी शामिल हुए थे.
आयोजकों का दावा है कि इस बार के प्रदर्शनों में 90 लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. आयोजकों का दावा है कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,100 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं.
पुलिस ने X पर बताया कि विरोध प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे लेकिन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में प्रदर्शनकारियों ने कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े, बोतलें और पत्थरबाजी की, जिस कारण पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. लॉस एंजेलिस पुलिस ने बताया कि कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया.
वॉशिंगटन में सैकड़ों लोगों ने लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च निकाला. उनके हाथों में 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत घर से होती है' जैसे नारे लिखे पोस्टर थे. प्रदर्शनकारियों ने घंटियां बजाईं, ढोल पीटे और जोर-जोर से 'कोई राजा नहीं' जैसे नारे लगाए. कुछ लोग कीड़ों जैसे कपड़े पहनकर आए और उस पर 'LICE' यानी जूं लिखा था. यह ICE यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम एन्फोर्समेंट का मजा उड़ाने का एक तरीका था.
न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डोना लिबरमैन ने कहा कि ट्रंप और उनके लोग चाहते हैं कि लोग विरोध प्रदर्शन करने से डरें. उन्होंने कहा, 'वे चाहते हैं कि हम इस बात से डरें कि उन्हें रोकने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते लेकिन वे गलत हैं.'
अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स की अध्यक्ष रैंडी वेनगार्टन ने कहा, 'ट्रंप भले ही यह दिखावा करें कि उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता लेकिन आज सड़कों पर उतरे लाखों लोगों को वह नजरअंदाज नहीं कर सकते.'
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व्हाइट हाउस का क्या है कहना?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबीगैल जैक्स ने इन्हें 'वामपंथी फंडिंग नेटवर्क' का नतीजा बताया. उन्होंने दावा किया कि जनता का असल में बहुत कम समर्थन हासिल है. उन्होंने इन प्रदर्शनों को ट्रंप के विरोध में 'पागलपन' करार दिया.
नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी ने भी इन प्रदर्शनों की कड़ी आलोचना की. NRCC की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने कहा, 'ये अमेरिका विरोधी रैलियां ही वह जगह हैं जहां कट्टर वामपंथियों की सबसे हिंसक और पागलपन भरी कल्पनाओं को आवाज मिलती है.'
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