खाड़ी में चल रहे ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर के पास इस जंग से बाहर निकलने का कोई प्लान ही नहीं बचा है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि ईरान पर प्रस्तावित हमले फिलहाल टाल दिए गए हैं. वजह बताई जा रही है कि सऊदी, यूएई, कतर और ईरान की तरफ से समझौते के संकेत आ रहे हैं. ट्रम्प ने कहा अमेरिका लोगों को मारना नहीं चाहता और हार्मोन स्ट्रेट व न्यूक्लियर पर डील हो सकती है, लेकिन तेहरान ने तुरंत इस दावे को खारिज कर दिया. ईरान का कहना है अमेरिका से कोई सीधी बात नहीं हुई. बातचीत सिर्फ ओमान के जरिए हो रही है और वो भी सिर्फ स्ट्रेट ऑफ हार्मोन में जहाजों की सुरक्षा के लिए. सीएनएन की रिपोर्ट ने अमेरिका की मुश्किल और बढ़ा दी. US सेंट्रल कमांड के सीनियर अधिकारी ने जवानों से ईरान पर दबाव बनाने के लिए 'अपरंपरागत आइडियाज' मांगे हैं. NBC ने भी खुलासा किया कि ट्रम्प को अंदाजा ही नहीं था कि अगर हमला हफ्ते भर से ज्यादा चला तो बाहर निकलने का रास्ता क्या होगा? अमेरिकी जनरल डैन कैन ने संसद में माना कि सिर्फ हवाई बमबारी से मकसद हासिल नहीं होगा. ईरान के पिकक्स माउंटेन जैसे परमाणु ठिकाने जमीन के बहुत नीचे हैं, उन्हें खत्म करने के लिए जमीनी सैनिक चाहिए, जिसका जोखिम ट्रम्प नहीं उठा सकते. अब तक 18 अमेरिकी सैनिक इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं. CSIS की रिपोर्ट कहती है अमेरिका का मिसाइल डिफेंस स्टॉक, खासकर पैटरिओट और थाड़ इंटरसेप्टर खतरनाक लेवल तक कम हो गया है. इसी वजह से अमेरिका अब कतर, सऊदी, यूएई और पाकिस्तान जैसे बिचौलियों के जरिए शांति का रास्ता ढूंढ रहा है. इससे इजराइल सबसे ज्यादा असहज है जो ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई चाहता था.