अब सीतामढ़ी से आया एक वीडियो दिखाना चाहता हूं. ताकि आप समझ सकें हिंसक नारे अगर आप सरकार की तरफ से निकलने वाली रैली में लगाएं तो उसे कविता समझा जाता है. प्रदर्शनकारियों पर पत्थर मारने वालों को या गोली मारने के नारे लगाने वालों को दंगाई नहीं बल्कि कवि या राष्ट्रभक्त समझा जाता है. मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बिहार के तमाम मंत्री ऐसे वीडियो ज़रूर देखें. दरभंगा की रैली में तलवार लेकर निकले तो कोई बात नहीं. कटिहार में भी ऐसी रैली में गोली मारने के नारे लगे. कोई सवाल नहीं. 26 दिसंबर यानि आज सीतामढ़ी के परिहार प्रखंड से एक वीडियो आया है. सरकार के कानून के समर्थन में रैली हो रही है. गालियां दी जा रही हैं. गोली मारने के नारे लग रहे हैं. ठोक देने की बात हो रही है. क्या ये उकसाना नहीं है? क्यों नहीं इन लोगों को गिरफ्तार किया गया या पुलिस आक्रामक हुई? ऐसी रैलियों के वक्त पुलिस सहायक क्यों दिखती है? इस वीडियो को आप देखिए, गालियों को बीप कर दिया गया है. यकीनन ऐसे नारों के बीच तिरंगे को देखना अच्छा नहीं लगेगा.