लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी के साथ-साथ विपक्षी खेमे में भी समीकरणों को साधने की कोशिशें तेज हो रही हैं.
राजधानी लखनऊ में बीजेपी मुख्यालय पर लगातार मंथन जारी है, जहां नई संगठनात्मक टीम को अंतिम रूप देने पर चर्चा हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को लेकर केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर भी गहन विचार-विमर्श चल रहा है. माना जा रहा है कि चुनावी साल से ठीक पहले संगठन को मजबूत करने पर बीजेपी खास जोर दे रही है.
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी के लिए संगठन उसकी सबसे बड़ी ताकत है. पार्टी पहले भी “पन्ना प्रमुख” मॉडल के जरिए बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बना चुकी है. ऐसे में नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ मेहनती कार्यकर्ताओं को जगह देना प्राथमिकता होगी.
बीजेपी नेतृत्व को यह भी ध्यान रखना है कि योगी आदित्यनाथ सरकार अपने कार्यकाल के लगभग 10 साल पूरे करने जा रही है, ऐसे में एंटी-इंकंबेंसी का खतरा भी बना रहता है. इसे काउंटर करने की जिम्मेदारी संगठन के माथे पर होगी. माना जा रहा है कि अगले 8 महीनों में संगठन को जमीन पर सक्रियता बढ़ानी होगी.
इसी बीच, विपक्षी खेमे में भी हलचल देखने को मिली है. कांग्रेस नेताओं ने बीएसपी प्रमुख मायावती से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं मिला. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम और सांसद तनुज पुनिया मायावती के आवास पहुंचे थे, लेकिन उनको बिना मुलाकात लौटना पड़ा.
कांग्रेस की ओर से इसे “सौजन्य मुलाकात” बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि राहुल गांधी के संभावित दौरे से पहले कांग्रेस, बीएसपी के साथ किसी तरह की बातचीत का रास्ता तलाशना चाहती थी.
हालांकि मायावती का इस मुलाकात से इनकार करना यह संकेत देता है कि फिलहाल बीएसपी अपने अलग राजनीतिक रुख पर कायम है. यह भी माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन के भीतर भी अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.
राजनीति के जानकारों का कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह की कोशिशें अक्सर बड़े संकेत देती हैं. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पहले से गठबंधन में हैं, लेकिन बीएसपी का रुख अब भी अलग नजर आ रहा है. कुल मिलाकर, यूपी में चुनावी मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है. एक तरफ बीजेपी संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष अपने समीकरण साधने की कोशिश में लगा है. आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है.