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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : काम वालों को काम चाहिए, नाम वालों को चाहिए है नाम

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जब हॉकी को प्रायोजक की ज़रूरत थी, पैसे की ज़रूरत थी तब कोई आगे नहीं आया लेकिन हॉकी के खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ तो सब खिलाड़ियों की मेहनत में अपना हिस्सा जोड़ने पहुंच गए हैं. भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी पदक नहीं जीत सकी लेकिन हारकर भी देश का दिल जीत लिया. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया कि “देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए. लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है.  जय हिंद!” इस बात की तारीफ होने लगी और हॉकी को लेकर नवीन पटनायक की तारीफ से सुस्त पड़ा मीडिया ऊर्जावान हो गया. तभी याद दिलाया गया कि मेजर ध्यानचंद के नाम पर तो पहले से पुरस्कार है जिसे 2002 में शुरू किया गया था और 10 लाख रुपया दिया जाता है. ध्यानचंद लाइफ टाइम अचीवमेंट इन स्पोर्टस एंड गेम्स. उसका क्या होगा. कहीं उसका नाम किसी नेता के नाम पर तो नहीं रख दिया जाएगा?



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