उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरक्षण सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन अब लखनऊ तक पहुंच गया है. 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के बैनर तले सवर्ण छात्रों ने 21 अगस्त को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया, जो अगले ही दिन लखनऊ की सड़कों पर भी दिखाई दिया. इस घटनाक्रम के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक ही पोस्ट में 9 बार 'आरक्षण' शब्द का इस्तेमाल करते हुए इसे आरक्षण खत्म करने की भाजपा की साजिश करार दिया. बसपा सुप्रीमो मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को गलत बताते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा कि वे बगल में चल रहे प्रदर्शन को समझाने नहीं गए. कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि भाजपा आरक्षण विरोधियों के साथ खड़ी होकर एससी/एसटी/ओबीसी के हक छीन रही है.