निषाद समाज के आरक्षण को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच एनडीए के सहयोगी और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने एक बेहद बेबाक इंटरव्यू दिया है. अपने बयानों में उन्होंने विपक्ष (सपा, बसपा, कांग्रेस) को आरक्षण का असली विरोधी और धोखेबाज बताया, तो वहीं अपनी ही सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को भी नसीहत और चेतावनी दे डाली.
संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में निषाद समाज के हितैषी हैं, तो सड़क पर आकर सार्वजनिक ऐलान करें कि उनकी सरकार बनने पर निषादों को ओबीसी से निकालकर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा-बसपा की सरकारों ने केवल मलाई खाई है और नौकरियों पर कब्जा किया है, जबकि निषाद समाज को हमेशा लाठियां और धोखा मिला है.
इसके साथ ही, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा (और नितिन नवीन) की अगुवाई में घोषित हुई बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम पर भी संजय निषाद का दर्द छलक उठा. उन्होंने साफ तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में निषाद समाज की आबादी 18% है. उनके एनडीए में आने के बाद बीजेपी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और अन्य राज्यों में जीत दर्ज की है. इसके बावजूद कोर कमेटी और नई राष्ट्रीय टीम में एक भी निषाद नेता को जगह न मिलना निराशाजनक है. उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व ही असली आरक्षण है. संजय निषाद का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले वे आरक्षण और सत्ता में भागीदारी को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं.