साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों (Ahmedabad Serial Blasts) के मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के फैसले पर देश में एक नया सियासी और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने इस फैसले पर गहरी निराशा जताते हुए इसे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चुनौती देने का ऐलान किया है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा एतराज जताया है।