बंदूक छूटी, नैरेटिव शुरू... जमीन की लड़ाई से शहरों तक कैसे पहुंचा नक्सलवाद? जानिए इनसाइड स्टोरी

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  • प्रकाशित: अगस्त 17, 2026

यह रिपोर्ट 1967 से लेकर वर्तमान तक नक्सलवाद के वैचारिक और व्यावहारिक सफर को दर्शाती है, जो जमीन की लड़ाई से शुरू होकर आज 'दिमागी नक्सल' के नए राजनीतिक नैरेटिव पर आकर टिक गया है. नक्सलवाद शब्द की उत्पत्ति 25 मई 1967 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के एक छोटे से गांव नक्सलबाड़ी से हुई थी. यह आंदोलन मूल रूप से किसानों के अधिकार, भूमि असमानता और जमींदारी शोषण के खिलाफ एक स्थानीय विद्रोह के रूप में शुरू हुआ था, जिसके प्रमुख चेहरे चारू मजूमदार, कानू सान्याल और जंगल संथान थे. समय के साथ इस आंदोलन में चीनी माओवाद का विलय हुआ और इसने हिंसक रूप ले लिया. साल 1969 में CPI (ML) का गठन हुआ और नक्सलवाद पश्चिम बंगाल से निकलकर बिहार, आंध्र प्रदेश और बस्तर (छत्तीसगढ़) तक फैल गया. 2013 तक देश के 126 जिले (लगभग 17% भूभाग) इसके प्रभाव में थे, जिसे 'रेड कॉरिडोर' कहा गया. 2010 का दंतेवाड़ा हमला (76 जवान शहीद) और 2013 का जीरम घाटी हमला जैसी हिंसक घटनाओं ने देश को दहला दिया.