5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाए आज 7 साल पूरे हो गए. इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की तस्वीर बदलती दिख रही है, जबकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में हालात लगातार खराब हो रहे हैं. इसे 'एक नाम, दो कश्मीर, दो तस्वीरें' कहा जा रहा है. जम्मू-कश्मीर में 370 को विकास की सबसे बड़ी बाधा बताया गया. हटने के बाद यहां बंद-हड़ताल की जगह अब चहल-पहल है. चिनाब पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च, पहाड़ों को चीरती रेल लाइन, दर्जनों हाईवे, सुरंगें, पुल और नए निवेश के प्रोजेक्ट जमीन पर दिख रहे हैं. डोमिसाइल प्रमाण पत्र मिलने से दशकों से दिल्ली-मुंबई में फंसे विस्थापितों को पहचान मिली. अब वे कानूनी तौर पर जम्मू-कश्मीर के निवासी माने जा रहे हैं. स्थानीय युवाओं का कहना है कि 370 हटने के बाद ही उन्हें जम्मू यूनिवर्सिटी में लॉ में एडमिशन लेकर अपना सपना पूरा करने का मौका मिला. दूसरी तरफ PoK में 'आजादी' के नाम पर सिर्फ महंगाई, दमन और आंदोलन है. आटे-बिजली की कीमतें आसमान पर हैं. लोग 'जीने का अधिकार' मांग रहे हैं, तो जवाब में आंसू गैस, गिरफ्तारियां, इंटरनेट बंदी और गोलियां मिल रही हैं. मुनीर की फौज पर बर्बरता के आरोप हैं. जून से अब तक हुए जनप्रदर्शनों में करीब 90 लोग मारे जाने की खबर है. PoK में होने वाले चुनाव को 'दिखावा' बताया जा रहा है.'