IAS अपूर्वा पाण्‍डे उत्तराखंड की सबसे युवा कलेक्टर, जान‍िए 'मन्नू' से यंगेस्‍ट DM बनने तक की पूरी कहानी

उत्तराखंड के बागेश्वर डीएम IAS अपूर्वा पांडेय (मन्नू) उत्‍तराखंड की सबसे युवा जिला कलेक्टर हैं. पंतनगर से बीटेक के बाद 2017 की UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया 39वीं रैंक हासिल करने वाली अपूर्वा की यह सफलता और प्रशासनिक कार्यशैली प्रदेश भर के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.

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  • आईएएस अपूर्वा पाण्डे उत्तराखंड की सबसे युवा जिला कलेक्टर हैं, जिन्होंने ३० वर्ष की उम्र में बागेश्वर पद संभाला
  • उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा २०१७ में ऑल इंडिया ३९वीं रैंक हासिल की थी और दो प्रयासों में सफलता पाई
  • अपूर्वा पाण्डे अल्मोड़ा की निवासी हैं, जिनका शैक्षिक मार्ग मैकेनिकल इंजीनियरिंग बीटेक से होकर गुजरा है

IAS Apurva Pandey Youngest Collector Bageshwar Uttarakhand: देवभूमि की वादियों में पली-बढ़ी 'मन्नू' ने जब पहली बार आईएएस बनने का सपना देखा था, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि वही लड़की एक दिन अपने ही राज्य उत्‍तराखंड की सबसे युवा डीएम बनकर इतिहास रचेगी! हम बात कर रहे हैं आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे की, जो वर्तमान में उत्तराखंड के जनपद बागेश्वर की ज‍िला कलेक्‍टर के पद पर सेवाएं दे रही हैं. उत्‍तराखंड की यंगेस्‍ट डीएम हैं. पिछले द‍िनों ऐसी ही कहानी गुजरात कैडर के आईएएस गंगास‍िंह राजपुरोह‍ित की सामने आई. वे गुजरात में सबसे कम उम्र के ज‍िला कलेक्‍टर हैं. वर्तमान में नर्मदा ज‍िले में सेवाएं दे रहे हैं.  

आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे की यूपीएससी रैंक 39 

बात उत्‍तराखंड में सबसे कम उम्र की ज‍िला कलेक्‍टर आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे की करें तो इन्‍होंने यूपीएससी की स‍िव‍िल सेवा परीक्षा 2017 में ऑल इंडिया 39वीं रैंक हासिल की. महज 23 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षा निकालने से लेकर 30 साल की उम्र में प्रदेश की सबसे युवा कलेक्टर बनने तक का उनका यह सफर जितना प्रेरणादायक है, उतना ही शानदार भी.   

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पहले गुजरात में राजस्थान के 23 वर्षीय गंगासिंह राजपुरोहित सबसे युवा डीएम बनकर सुर्खियों में आए, और अब पड़ोस में देवभूमि की बेटी आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे ने उत्तराखंड की सबसे कम उम्र की कलेक्टर बनकर इतिहास रच दिया है! दोनों की कहानियां लगभग एक जैसी हैं

 अल्मोड़ा की रहने वाली हैं आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे 

आईएएस अपूर्वा पाण्‍डे मूल रूप से अल्मोड़ा शहर की रहने वाली हैं. उनका जन्म 29 अप्रैल 1994 को हुआ. उनकी माता मीना पांडेय जीजीआईसी नैनीताल में रसायन विज्ञान की शिक्षिका हैं, जबकि पिता किशन चंद्र पांडेय कोटाबाग पॉलिटेक्निक में अध्यापक रहे हैं. घर में सभी प्यार से उन्हें "मन्नू" कहकर पुकारते हैं. इनको यूपीएससी के दूसरे प्रयास में सफलता हास‍िल हुई.

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अपूर्वा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट मैरीज़ स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद बीरशिबा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक  की डिग्री हासिल की.  

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बागेश्वर से पहले कई प्रशासनिक पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में कुल 13 कलेक्टर हैं. उनमें सबसे कम उम्र 33 वर्षीय अपूर्वा पाण्‍डे की है.  बागेश्वर से पहले अपूर्वा पाण्‍डे अपर सचिव (पेयजल एवं गृह विभाग), निदेशक (स्वजल) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) पौड़ी गढ़वाल के पदों पर तैनात रह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने रानीखेत, रुड़की और देहरादून में भी विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं.  

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बागेश्वर में प्राथमिकताएं: आपदा प्रबंधन और जनसुनवाई पर विशेष जोर

जनपद बागेश्वर में कलेक्टर का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने आपदा प्रबंधन की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए. मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा जा सके.

इसके अतिरिक्त, उन्होंने अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई की है. उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नदी के किनारों और संवेदनशील क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने तथा विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है. साथ ही, जनसुनवाई और शिकायत निवारण को प्राथमिकता देते हुए तहसील दिवस और 'जनता दरबार' के माध्यम से आम जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया है.  

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किताबों और वाद-विवाद का रहा है विशेष शौक

अपूर्वा पाण्‍डे को बचपन से ही किताबें पढ़ने और वाद-विवाद  प्रतियोगिताओं में भाग लेने का शौक रहा है. उन्होंने कई वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी जीते हैं. उनका मानना है कि नियमित पढ़ने की आदत और प्रभावी अभिव्यक्ति की क्षमता ने यूपीएससी की तैयारी में उनकी काफी मदद की.  
-मुनेश चौहान की र‍िपोर्ट 

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