13 साल पुराने हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट नाराज़, नोएडा के कमिश्नर को किया तलब

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है क्योंकि गैर जमानती वारंट पहले ही सीजीएम को वापस भेज दिया गया है. इसलिए फिलहाल पुलिस के पास अपीलकर्ता को गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है.

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प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2013 से जुड़े नोएडा के एक हत्या के मामले में क्रिमिनल अपील पर सुनवाई करते हुए पुलिस की लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है. कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने अपीलकर्ता को गैर जमानती वारंट तमिल कराने में घोर लापरवाही बरती है जिससे अपराधी को राहत मिली और न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई है. कोर्ट ने कहा की इस घटना से यह  दिखता है कि अपीलकर्ता हापुड़ और गौतमबुद्ध नगर(नोएडा) जिले की पुलिस को मैनेज कर रहा था और संबंधित पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी अपीलकर्ता के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को नाकाम करने में अपीलकर्ता के साथ मिले हुए थे जिससे कोर्ट द्वारा अपील पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करने की कोशिश भी नाकाम हो रही थी.

नोएडा जिले और हापुड़ जिले के पुलिस अधिकारियों को ये पता होना चाहिए था की अपील पर सुनवाई को आसान बनाने के लिए अपीलकर्ता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था. कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि संबंधित पुलिसकर्मियों की कार्रवाई न केवल सेवा में अयोग्यता और दुर्व्यवहार को दर्शाती है बल्कि उन्हें अब अवमानना के लिए मुकदमे का भी सामना करना पड़ सकता है. कोर्ट ने इस मामले में सख्त होते हुए नोएडा के पुलिस कमिश्नर और हापुड़ के एसएसपी को 12 फरवरी को दोपहर दो बजे उन संबंधित अधिकारियों के साथ कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है जो गैर जमानती वारंट को लागू करने के लिए जिम्मेदार थे. वो अपने व्यक्तिगत हलफनामों के माध्यम से अपनी सफलता का कारण कोर्ट को बताएंगे क्योंकि यह गैर जमानती वारंट हाईकोर्ट के निर्देश पर जारी किया गया था.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है क्योंकि गैर जमानती वारंट पहले ही सीजीएम को वापस भेज दिया गया है. इसलिए फिलहाल पुलिस के पास अपीलकर्ता को गिरफ्तार करने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी हापुड़ के सीजीएम, नोएडा के  सीजीएम, नोएडा के पुलिस कमिश्नर और हापुड़ के एसएसपी को रजिस्ट्रार कंप्लायंस द्वारा 24 घंटे के अंदर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सामान्य माध्यम दोनों से आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का भी आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की डिवीजन बेंच ने अपीलकर्ता कौशल किशोर उर्फ बाबा  की क्रिमिनल अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है. 

मामले के अनुसार इस क्रिमिनल अपील में एक रिकॉल एप्लीकेशन 10 अक्टूबर 2025 के आदेश को वापस लेने के लिए दायर की गई थी जिसके तहत हाईकोर्ट ने नोएडा के सीजेएम के जरिए  अपीलकर्ता कौशल किशोर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया था. अपीलकर्ता कौशल किशोर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नोएडा के एडिशनल सेशन जज द्वारा 30 सितंबर 2019 को 2013 में आईपीसी की धारा 302 और 452 के तहत दर्ज मामले में दोषी ठहराने वाले फैसले को चुनौती दी थी जिसमें अपीलकर्ता को उम्रकैद और 50000 जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. अपीलकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को इस आधार पर जमानत दी थी कि वह पहले ही 10 साल और 4 महीने की सजा काट चुका था और उसके द्वारा अर्जित छूट को मिलाकर कुल 11 साल और 3 महीने की सजा पूरी हो चुकी थी.

कई बार मामले को रिकॉल अर्जी पर सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया लेकिन अपीलकर्ता की तरफ से कोई भी वकील कोर्ट में पेश नहीं हुआ. इसके बाद हाईकोर्ट ने एक आदेश पारित किया जिसमें निर्देश दिया गया कि नोएडा के सीजेएम अपीलकर्ता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करेंगे. कोर्ट ने पाया कि सीजेएम नोएडा द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को अपीलकर्ता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था. रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि नोएडा के सूरजपुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर इंचार्ज ने 11 नवंबर 2025 को सीजेएम को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें कहा गया कि आ गया कि गैर जमानती वारंट में दिया गया अपीलकर्ता का पता सत्यापित नहीं किया जा सका इसलिए वारंट वापस लौटाया जा रहा है. गैर जमानती वारंट पर अपीलकर्ता का पता वही है जो उसके द्वारा दायर अपील में दर्ज था.

पता न मिलने की वजह से अपीलकर्ता को गैर जमानती वारंट तामील नहीं कराया जा सका. नोएडा सीजेएम ने पुलिस द्वारा दी गई रिपोर्ट को हाईकोर्ट को भेजा जिसमें कहा गया की अपीलकर्ता अज्ञात है और उसका पता सत्यापित नहीं किया जा सका है जिससे या स्पष्ट होता है कि गैर जमानती वारंट तामील नहीं किया जा सका. कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि 10 अक्टूबर 2025 के आदेश को वापस लेने की अर्जी के समर्थन में दायर हलफनामे के पैराग्राफ 8 में हलफनामा देने वाले ने कहा कि पुलिस 10 जनवरी 2026 को उसके घर आई और अपीलकर्ता को उसके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के बारे में बताया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इससे ये पता चलता है कि अपीलकर्ता ने हापुड़ और नोएडा जिले की पुलिस को मैनेज किया हुआ था और संबंधित पुलिसकर्मियों नेअपीलकर्ता के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को नाकाम करने में अपीलकर्ता के साथ सांठगांठ कर रखी थी. 

कोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि संबंधित पुलिसकर्मियों की कार्रवाई उनकी अयोग्यता और दुर्व्यवहार को दर्शाती है और ऐसे में उनको कोर्ट की अवमानना का सामना भी करना पड़ सकता है. कोर्ट ने नोएडा के पुलिस कमिश्नर और हापुड़ के एसएसपी को 12 फरवरी को कोर्ट में संबंधित अधिकारियों के साथ पेश होने को कहा है. कोर्ट से सरकारी वकील ने पुलिस द्वारा गैर जमानती वारंट को तामील करने में विफलता के बारे में बताने के लिए एक हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा लेकिन कोर्ट ने समय नहीं दिया. कोर्ट ने कहा कि संबंधित पुलिस स्टेशन के द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट से पुलिस तंत्र की विफलता स्पष्ट है.

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कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिसकर्मी अगली तारीख पर अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करेंगे और सरकारी वकील को जवाब दाखिल करने का कोई अवसर तभी दिया जाएगा जब अदालत पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी को असंतोषजनक पाएगी. इस स्तर पर सरकारी वकील को जवाब दाखिल करने का कोई भी अवसर मामले की कार्रवाई में केवल देरी करेगा.कोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल वारंट वापस होने के कारण पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती. अब इस मामले में 12 फरवरी की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी है जहां अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है.

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