मनरेगा घोटाले में आरोपी भिखारी सिंह और विनोद सिंह की जमानत याचिका HC ने की खारिज

कोर्ट ने कहा, “अग्रिम में प्राप्त पैसे की बंदरबांट के लिए सोसाइटी के भीतर षड्यंत्र किया गया जिसमें आरोपी व्यक्ति सफल रहे. सरकारी खजाने को जितना नुकसान हुआ और उतना ही फायदा आरोपी व्यक्तियों को हुआ क्योंकि पैसे का अग्रिम भुगतान किए जाने के बावजूद काम नहीं किया गया.”

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प्रतीकात्‍मक फोटो
प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने उत्तर प्रदेश सहकारी निर्माण एवं विकास लिमिटेड (यूपीसीसीडीएल) के तत्कालीन अध्यक्ष भिखारी सिंह और इसके तत्कालीन प्रबंध निदेशक विनोद सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है. ये दोनों मनरेगा के तहत धन के दुरुपयोग के आरोपी हैं. भिखारी सिंह और विनोद सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने कहा, “मौजूदा मामला सरकारी पैसे के दुरुपयोग का है और यह पैसा विभिन्न जिलों के प्रखंडों के विकास और बेहतरी के लिए आवंटित किया गया था. यह पैसा अग्रिम में आवंटित कर दिया गया, लेकिन काम नहीं किया गया या पूरा नहीं किया गया.”

अदालत ने कहा, “अग्रिम में प्राप्त पैसे की बंदरबांट के लिए सोसाइटी के भीतर षड़यंत्र किया गया जिसमें आरोपी व्यक्ति सफल रहे. सरकारी खजाने को जितना नुकसान हुआ और उतना ही फायदा आरोपी व्यक्तियों को हुआ क्योंकि पैसे का अग्रिम भुगतान किए जाने के बावजूद काम नहीं किया गया.” अदालत ने अपने 18 अगस्त के आदेश में कहा, “साक्ष्यों और आवेदकों के खिलाफ दायर आरोप पत्रों पर गौर करने पर मुझे जमानत के लिए यह मामला उपयुक्त नहीं लगता.” इससे पूर्व, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 31 जनवरी, 2014 को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को मनरेगा के पैसे के दुरुपयोग के मामले की जांच करने का निर्देश दिया था.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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