संभल हिंसा के एक केस में तत्कालीन ASP अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों पर होगी FIR, कोर्ट का सख्त आदेश

संभल हिंसा मामले में संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. आलम नाम के व्यक्ति के पिता ने संभल कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.

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  • संभल की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तत्कालीन ASP अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया है.
  • याचिकाकर्ता ने बताया कि उसके बेटे आलम को पुलिस की मौजूदगी में हुई फायरिंग में गोली लगी थी.
  • पीड़ित के पिता ने जिले के कप्तान और उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट का रुख किया.
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संभल हिंसा मामले में बड़ा मोड़ आया है. संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश उस याचिका पर दिया गया है जिसमें एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसके बेटे को पुलिस की मौजूदगी में गोली लगी थी.

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को ठेले पर बिस्किट बेचने निकला था. इसी दौरान इलाके में हिंसा भड़क गई और पुलिस की मौजूदगी में फायरिंग हुई. इस फायरिंग में आलम को गोली लग गई. कई अस्पतालों में भटकने के बाद उसकी जान बचाई जा सकी.

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क्यों पहुंचा मामला कोर्ट तक?

पीड़ित के पिता का आरोप है कि उसने जिले के कप्तान से लेकर उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उसने संभल कोर्ट में याचिका दायर की और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

कोर्ट का आदेश

संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. एफआईआर में तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मी शामिल होंगे.

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कैसे भड़की थी संभल में हिंसा?

बता दें कि 24 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के एक अदालती आदेश के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी. सर्वेक्षण इस दावे के बाद शुरू किया गया था कि मस्जिद का निर्माण मुगल काल के दौरान कथित रूप से ध्वस्त किए गए एक हिंदू मंदिर के खंडहर पर किया गया था. अदालत द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों में बदल गया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और अन्य भीड़-नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया.

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इस घटना में पांच व्यक्तियों की मौत हो गई, लगभग 20 सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य घायल हो गए.

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