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This Article is From Nov 10, 2025

AI को कैसे मिल रही पूरी दुनिया की सूचना? कैसे इंसानों जैसा बन रहा AI? 72 मिनट में इस OTT पर मिलेंगे सारे जवाब

‘ह्यूमन इन द लूप’ सिर्फ AI की कहानी नहीं है, बल्कि उन अनदेखे चेहरों की दास्तान है जो मशीनों को 'इंसान' बनाते हैं. जानें कहा देख सकते हैं ये शानदार फिल्म.

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नई दिल्ली:

क्या आपने कभी सोचा है कि जिन मशीनों से हम बात करते हैं, वो इंसान जैसा सोचती क्यों हैं? नेटफ्लिक्स की नई फिल्म ‘ह्यूमन इन द लूप' इसी सवाल का जवाब बड़े ही खूबसूरत और सोचने पर मजबूर कर देने वाले अंदाज़ में देती है. झारखंड के छोटे से गांव से निकली एक आदिवासी लड़की जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रखती है. तो उसे वहां सिर्फ कंप्यूटर नहीं, बल्कि समाज की असमानताएं और सच्चाइयां भी नजर आती हैं. ये फिल्म बताती है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ मशीनों की नहीं, बल्कि उन हाथों की भी कहानी है जो उसे इंसान बनाती हैं.

डेटा लेबलिंग की दुनिया से सामाजिक सच्चाई तक

कहानी की नायिका नेहमा उरांव जनजाति से है. नेहमा को नौकरी मिलती है एक AI डेटा सेंटर में, जहां उसका काम है मशीन लर्निंग के लिए इमेज और वीडियो को टैग करना. शुरू में उसे ये बस एक आसान नौकरी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि मशीनें वही सीखती हैं जो इंसान सिखाते हैं. और, इंसान खुद कितने पूर्वाग्रहों में जीते हैं.

फिल्म बड़ी खूबसूरती से दिखाती है कि कैसे डिजिटल दुनिया में भी जाति, वर्ग और जेंडर जैसी परतें छिपी होती हैं. नेहमा की नजर से हम देखते हैं कि इंसान और मशीन के बीच की दूरी उतनी नहीं है जितनी हम सोचते हैं. इसे आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.

ये फिल्म 5 सितंबर 2025 को भारत में रिलीज हुई थी. इसका प्रीमियर 2024 में मामी फिल्म फेस्टिवल में हुआ था जबकि नेटफ्लिक्स पर इसे 31 अक्तूबर 2025 को रिलीज किया गया है.

सादगी में असरदार संदेश

फिल्म को डायरेक्ट किया है अरन्या सहाय ने. उन्होंने कहानी को बेहद सादगी से बुनते हुए उसे एक अलग अलग परतों में जमाया है. फिल्म में गांव की मिट्टी, लैब की स्क्रीनें और नेहमा की आंखों का संघर्ष, सब एक साथ दर्शकों को अपनी ओर खींच लेते हैं. 72 मिनट की ये फिल्म न किसी भारी डायलॉग से भरी है, न किसी चमक धमक से फिर भी अंत तक आप इसे छोड़ नहीं पाते. ‘ह्यूमन इन द लूप' आपको ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि अगर मशीनें इंसानों से सीखती हैं. तो हमें पहले खुद बेहतर इंसान बनना होगा.

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