- महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS के BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ आया है
- गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने पूरे मामले को साजिश करार देते हुए हिंदू संगठन की भूमिका बताई है
- पुलिस ने 9 शिकायतें दर्ज की हैं, जिनमें आठ महिलाओं ने मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं
TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ आ गया है. गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने पूरे मामले को “साजिश” करार दिया है. आरोपी रजा रफीक मेमन के चाचा रजाक काजी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी परिवार परेशान हैं और यह मामला सुनियोजित तरीके से खड़ा किया गया है.
उनका आरोप है कि इसमें एक हिंदू संगठन की भी भूमिका है और पीड़िता के परिवार ने ही उन्हें बुलाया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि एक आरोपी को पहले छोड़ा गया और बाद में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े होते हैं.
'हम शिक्षित परिवार से हैं, आरोप झूठे'-आरोपी के पिता
दूसरे आरोपी तौसीफ अटार के पिता बिलाल फकीर मोहम्मद अटार ने भी बेटे पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है. न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका परिवार पढ़ा-लिखा है और उनका बेटा BCA ग्रेजुएट है. उनके मुताबिक, यह मामला पूरी तरह झूठा है और उनके बेटे समेत अन्य युवकों को एक सोची-समझी योजना के तहत फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है, वह गलत है और उनके बेटे की इसमें कोई गलती नहीं है.
8 महिलाओं समेत 9 शिकायतों की जांच
पुलिस के अनुसार, इस मामले में कुल 9 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें 8 महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ साथियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. महिलाओं का यह भी कहना है कि HR विभाग ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया. इसके अलावा एक पुरुष कर्मचारी ने कार्यस्थल पर जबरन धर्मांतरण की कोशिश का आरोप लगाया है.
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7 आरोपी गिरफ्तार, एक महिला फरार
इस मामले में अब तक 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दानिश शेख, तौसीफ अटार, रजा रफीक मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और HR हेड अश्विनी चेनानी शामिल हैं. वहीं, निदा खान नाम की एक महिला कर्मचारी फिलहाल फरार बताई जा रही है. पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में ये सभी आरोपी एक समूह के रूप में काम कर रहे थे, जिससे संगठित तरीके से घटनाएं होने की आशंका जताई जा रही है.
TCS का सख्त रुख, जांच जारी
TCS ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि कंपनी लंबे समय से किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाती रही है. आरोप सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी इस पूरे मामले को गंभीर और चिंताजनक बताया है. उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए कंपनी स्तर पर विस्तृत जांच चल रही है, जिसकी निगरानी COO अराठी सुब्रमणियन कर रही हैं. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी.
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