MP के इस गांव में मुर्दों के नाम आ रहा बिजली बिल; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कनेक्शन काटने का आरोप

MP News: ग्रामीणों का कहना था कि बिजली विभाग की मनमानी से उनका जीवन अस्त‑व्यस्त हो गया है. बिना सूचना लाईन काटना, मृत लोगों के नाम पर बिल भेजना और बार‑बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न करना विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.

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MP के इस गांव में मुर्दों के नाम आ रहा बिजली बिल; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कनेक्शन काटने का आरोप

MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले (Raisen) में सिलवानी विकासखंड के ग्राम पठा‑पौड़ी में बिजली विभाग (Electricity Department) की लापरवाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. गांव के कई परिवारों ने आरोप लगाया है कि जिन ग्रामीणों की मृत्यु को लगभग दस वर्ष बीत चुके हैं, उनके नाम पर भी विभाग हर महीने बिजली के बिल (Electricity Bills) भेज रहा है. ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या वर्षों से जारी है, बावजूद इसके न तो विभाग ने कोई जांच की और न ही गलत बिलों को रोका गया.

15 दिनों से गांव में बिजली ठप, पानी और पढ़ाई पर संकट

इस गंभीर अनियमितता के बीच गांव पिछले 15 दिनों से पूरी तरह अंधेरे में डूबा हुआ है. बिजली आपूर्ति बंद होने से गांव की रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई है. नल‑जल योजना के तहत पानी की टंकी तो तैयार है, लेकिन बिजली न होने के कारण पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पा रही है. ग्रामीणों ने बताया कि वे पीने का पानी लाने के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर हैं. पानी की किल्लत के साथ‑साथ बच्चों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है, क्योंकि रात में रोशनी न होने से वे पढ़ नहीं पा रहे.

ग्रामीणों का तहसील में विरोध

इन समस्याओं से परेशान होकर शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान सिलवानी तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए. धरने का नेतृत्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अजय पटेल ने किया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (एमपीवीवी) के अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के गांव की बिजली लाइन काट दी. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे गांव की स्थिति लगातार खराब होती चली गई.

तहसीलदार पर आरोप

धरने के दौरान ग्रामीणों की प्रमुख मांग थी कि विभाग के सुपरवाइजर को मौके पर बुलाया जाए ताकि सीधी बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके. लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक तहसीलदार सुधीर शुक्ला ने उनकी इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया. ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार ने मौके पर ही यह कह दिया कि “धरना देने से आपकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, चाहे आप आंदोलन करें या धरना दें.” इस कथित बयान के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने “प्रशासन तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” के नारे लगाकर विरोध तेज कर दिया.

धरने की सूचना मिलते ही पहुंचे विधायक

स्थिति की जानकारी मिलते ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष व सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल तहसील कार्यालय पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएँ सुनीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों से तत्काल चर्चा की. विधायक ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से दूरभाष पर बात कर बिजली आपूर्ति बहाल करने तथा जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द कराया जाएगा.

बिजली बहाल करने की मांग पर अड़े ग्रामीण

धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना था कि बिजली विभाग की मनमानी से उनका जीवन अस्त‑व्यस्त हो गया है. बिना सूचना लाईन काटना, मृत लोगों के नाम पर बिल भेजना और बार‑बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न करना विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि कुछ ही दिनों में बिजली बहाल नहीं की गई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.

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