स्मार्टफोन आज के समय में हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक, फोन हमारे हाथ में ही रहता है. इसके बिना एक पल भी गुजारना मुश्किल लगता है. लेकिन क्या कभी आपने गौर किया है कि जब आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हों, और वो लगातार अपना फोन चेक कर रहे हों? क्या यह आम बात है. क्योंकि अक्सर लोग इसे यह कहकर टाल देते हैं कि अरे, वो मुझसे बहुत प्यार करता है, शायद मेरा ही कोई पुराना मैसेज देख रहा होगा या ऑफिस का कोई जरूरी काम होगा.
अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो रुकिए! साइकोलॉजी और हालिया रिसर्च कुछ और ही कहानी बयां करती हैं. हर वक्त फोन से चिपके रहने की यह आदत हमेशा प्यार या काम नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई गंभीर वजहें हो सकती हैं जिन्हें आपको वक्त रहते समझना बेहद जरूरी है.
क्या है फबिंग- (What Is Phubbing)
जब कोई इंसान बातचीत के दौरान सामने वाले को इग्नोर करके अपने फोन में लगा रहता है, तो साइकोलॉजी की भाषा में इसे फबिंग (Phubbing) कहा जाता है. यह शब्द Phone और Snubbing को मिलाकर बना है. अगर आपका पार्टनर आपके साथ होते हुए भी बार-बार स्क्रीन स्क्रॉल कर रहा है, तो समझ लीजिए कि आपका रिश्ता फबिंग का शिकार हो चुका है.

हर समय मोबाइल से चिपके रहने के पीछे ये है असली वजह. Photo Credit: iStock
1. नोमोफोबिया-
नोमोफोबिया का पूरा नाम है नो मोबाइल फोन फोबिया. इसमें इंसान को हर वक्त यह डर सताता रहता है कि कहीं उसका फोन उससे दूर न हो जाए या उसका नेटवर्क न चला जाए. यह एक तरह की घबराहट (Anxiety) है, जिसकी वजह से पार्टनर न चाहते हुए भी बार-बार फोन की स्क्रीन लाइट ऑन करके देखता रहता है.
2. फोमो-
क्या सोशल मीडिया पर किसी ने नई फोटो डाली? क्या किसी ग्रुप में कोई गॉसिप चल रही है? दुनिया में क्या नया हो गया? इसी डर को FOMO कहते हैं. इस चक्कर में पार्टनर आपके सामने बैठकर भी वर्चुअल दुनिया में खोया रहता है.
3. रिश्ते से ऊब जाना-
साइकोलॉजिस्ट मानते हैं कि जब कोई इंसान अपने मौजूदा रिश्ते में बोरियत महसूस करने लगता है या उसे अपने पार्टनर से वो अटेंशन नहीं मिलती जो वो चाहता है, तो वो फोन का सहारा लेता है. फोन उसके लिए एक एस्केप रूट बन जाता है, जहां वो अपनी मर्जी की दुनिया में खो जाता है.
4. डोपामाइन-
जब भी फोन पर कोई नोटिफिकेशन आता है, लाइक मिलता है या कोई रील सामने आती है, तो हमारे दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज होता है. यह हमें खुशी का अहसास कराता है. धीरे-धीरे इंसान को इस डिजिटल खुशी की लत लग जाती है. आपका पार्टनर आपसे बात करने से ज्यादा उस डोपामाइन हिट को मिस करता है, इसलिए उसका हाथ बार-बार फोन पर जाता है.
इस विषय से जुड़ी 2 महत्वपूर्ण रिसर्च-

केंट यूनिवर्सिटी (University of Kent) की रिसर्च के मुताबिक, जो लोग सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के बहुत ज्यादा आदी होते हैं, वे अपने पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत नहीं कर पाते. यह आदत सीधे तौर पर रिलेशनशिप क्रेडिबिलिटी को कमजोर करती है.
रिश्ते को बचाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स-
- नो फोन जोन- घर में एक नियम बनाएं कि खाना खाते समय या बेड पर जाने के बाद कोई भी फोन का इस्तेमाल नहीं करेगा.
- खुलकर बात करें- पार्टनर को गुस्से में टोंट मारने के बजाय प्यार से समझाएं कि जब वो आपके सामने फोन चलाते हैं, तो आपको कैसा महसूस होता है.
- क्वालिटी टाइम- हफ्ते में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स रखें, जहां आप दोनों फोन बंद करके बाहर घूमने जाएं या एक दूसरे के साथ बातें करें.
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