Republic Day 2026: जब हम 'संविधान' शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में स्कूल की किताबों के नीरस पाठ याद आने लगते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि जिस किताब पर हमारा पूरा देश टिका है, वह असली किताब दिखती कैसी है? वह कहां रखी है? और क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के दिल में एक ऐसी जगह है जहां आप न केवल इस संविधान की असली कॉपी देख सकते हैं, बल्कि उसे बनते हुए भी 'महसूस' कर सकते हैं?
अगर आप इस गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) या किसी भी वीकेंड पर कुछ अलग और यादगार करना चाहते हैं, तो अपनी जेब से मात्र 70 रुपये निकालिए और निकल पड़िए दिल्ली की उस यात्रा पर, जो आपको भारत की जड़ों से जोड़ देगी.
कहां रखी है असली संविधान की किताब? (The Home of India's Constitution)
भारत का असली और मूल संविधान नई दिल्ली स्थित असली संविधान संसद भवन की लाइब्रेरी (Parliament House Library) में सुरक्षित रखा गया है. यह सच है कि मूल प्रति वहां सुरक्षित है, लेकिन आम जनता के लिए इसका पूरा इतिहास और इसकी खूबसूरती 'पार्लियामेंट म्यूजियम' (Parliament Museum) और 'प्रधानमंत्री संग्रहालय' (Pradhanmantri Sangrahalaya) के परिसर में बहुत ही शानदार तरीके से संजोई गई है.
दिल्ली के तीन मूर्ति मार्ग पर स्थित यह संग्रहालय सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक टाइम मशीन है. यहां एक विशेष 'संविधान कक्ष' बनाया गया है, जहां आप संविधान बनने की पूरी कहानी को आधुनिक तकनीक के जरिए देख सकते हैं.

महज 70 रुपये में क्या-क्या मिलेगा? (Experience in Just ₹70)
आजकल दिल्ली में एक कप अच्छी कॉफी भी 200-300 रुपये से कम में नहीं मिलती, लेकिन यहां 70 रुपये की एंट्री टिकट (ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्ध) आपको जो अनुभव देगी, वह अनमोल है.
1. संविधान की मूल प्रति का डिजिटल दीदार: आप देख पाएंगे कि कैसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से सुंदर कैलीग्राफी में संविधान को लिखा था. इसकी हर बारीकी, पन्नों पर बनी चित्रकारी (जो नंदलाल बोस ने की थी) को करीब से समझने का मौका मिलेगा.
2. वर्चुअल रियलिटी (VR) का जादू: यहां आप वीआर चश्मा लगाकर खुद को 1940 के दशक में महसूस कर सकते हैं. आप देखेंगे कि कैसे बाबा साहेब अंबेडकर और अन्य महापुरुष बैठकर बहस कर रहे थे.
3. ऑडियो-विजुअल शो: संग्रहालय के अंदर लाइट और साउंड का ऐसा तालमेल है कि इतिहास की बोरियत खत्म हो जाती है और रोमांच शुरू होता है.
संविधान बनने का पूरा सफर: 2 साल, 11 महीने और 18 दिन
जब आप संग्रहालय के अंदर जाएंगे, तो आपको पता चलेगा कि हमारा संविधान रातों-रात नहीं बना.
- बहस और चर्चा: संविधान सभा के सदस्यों के बीच हुई तीखी बहसों को यहां ग्राफिक्स के जरिए समझाया गया है.
- हस्ताक्षर का क्षण: वह पल जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और नेहरू जी ने इस पर हस्ताक्षर किए थे, उसे तस्वीरों और वीडियो में देखना रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव होता है.
- गैस चेंबर की कहानी: आपको यहां यह भी पता चलेगा कि असली संविधान को खराब होने से बचाने के लिए उसे 'हीलियम गैस' से भरे एक विशेष चेंबर में रखा जाता है.

बच्चों और युवाओं के लिए क्यों है यह 'मजेदार'?
अक्सर बच्चे म्यूजियम के नाम से भागते हैं, लेकिन यह जगह अलग है. यहां कई Interactive Displays लगे हैं:
- संविधान की प्रस्तावना (Preamble) के साथ आप अपनी फोटो खिंचवाकर उसे यादगार बना सकते हैं.
- संविधान से जुड़े छोटे-छोटे खेल खेलकर आप अपनी जानकारी चेक कर सकते हैं.
- संग्रहालय का एक हिस्सा हमें भविष्य के भारत की झलक भी दिखाता है.
दिल्ली में घूमने के लिए लाल किला, इंडिया गेट और कुतुब मीनार तो सब जाते हैं, लेकिन अगर आप एक जागरूक नागरिक के तौर पर अपने देश को समझना चाहते हैं, तो इस संग्रहालय से बेहतर कोई जगह नहीं है. यह 70 रुपये का निवेश आपकी सोच बदल देगा.
संविधान के साथ अंतरिक्ष की सैर: नेहरू तारामंडल में लें ब्रह्मांड का नजारा
नेहरू तारामंडल (Nehru Planetarium) इस यात्रा का सबसे रोमांचक हिस्सा है क्योंकि यह इसी परिसर (तीन मूर्ति भवन) का हिस्सा है. संविधान के इतिहास को देखने के बाद जब आप अंतरिक्ष की सैर पर निकलते हैं, तो यह ट्रिप पूरी तरह पैसा वसूल हो जाती है. यहां के 'स्काई थिएटर' में जब लाइट बंद होती है, तो आप खुद को तारों और ग्रहों के बीच महसूस करते हैं. 3D शो के जरिए आपको सौर मंडल और अंतरिक्ष की बारीकियां समझाई जाती हैं.
राकेश शर्मा का स्पेस सूट:
यहां आप भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा का वह असली स्पेस सूट और वह कैप्सूल (Soyuz T-11) भी देख सकते हैं, जिसमें बैठकर वे अंतरिक्ष से लौटे थे.
एक ही टिकट में दो फायदे (Combo Experience)
आजकल नेहरू तारामंडल और प्रधानमंत्री संग्रहालय (जहां संविधान रखा है) दोनों एक ही परिसर का हिस्सा हैं. आप चाहें तो इनके कॉम्बो टिकट भी ले सकते हैं. शो के हिसाब से इसकी टिकट 50 रुपये से 100 रुपये के बीच होती है.
अनुभव से : तारामंडल के शो हाउसफुल रहते हैं, इसलिए सलाह दी जाती है कि इसकी टिकट ऑनलाइन एडवांस में बुक कर लें ताकि वहां जाकर निराश न होना पड़े.
क्यों खास है यह पूरी ट्रिप?
एक तरफ आप 'धरती' पर भारत के कानून और लोकतंत्र का इतिहास (संविधान) देखते हैं, और दूसरी तरफ 'आसमान' की गहराइयों और विज्ञान की तरक्की (तारामंडल) को समझते हैं. इतिहास और विज्ञान का ऐसा अनोखा मेल दिल्ली में और कहीं नहीं मिलता.
अपने पूरे दिन का प्लान ऐसे बनाएं (Full Day Itinerary):
सुबह 11 बजे: तीन मूर्ति भवन पहुंचें और प्रधानमंत्री संग्रहालय देखें. यहां संविधान की बारीकियां समझें.
दोपहर 1 बजे: संग्रहालय के खूबसूरत कैफे में लंच करें.
दोपहर 2:30 बजे: नेहरू तारामंडल का शो देखें (समय पहले से चेक कर लें).
शाम 4 बजे: परिसर के खुले बगीचों में टहलें और फोटो खिंचवाएं. यह जगह बेहद शांत और हरियाली से भरी है.
जाने से पहले कुछ जरूरी बातें (Quick Tips for Visitors)
अगर आप जाने का मन बना चुके हैं, तो इन बातों को नोट कर लें:
लोकेशन: तीन मूर्ति मार्ग, नई दिल्ली (नजदीकी मेट्रो स्टेशन: लोक कल्याण मार्ग).
समय: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (सोमवार को बंद रहता है).
टिकट: आप उनकी आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन बुक कर सकते हैं या वहां जाकर काउंटर से भी ले सकते हैं. वयस्कों के लिए टिकट लगभग 70-100 रुपये के बीच है (अलग-अलग पैकेज के अनुसार).
आईडी प्रूफ: अपना एक ओरिजिनल आईडी कार्ड साथ जरूर रखें.
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