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AI से डरते थे अंकित... फिर वही कैसे बन गया उनका सबसे बड़ा मददगार? एक फ्रीलांसर ने साझा किया अपना अनुभव

AI से डरते थे अंकित, फिर उसी ने उनका काम आसान कर दिया। जानिए कैसे AI बना उनका सबसे बड़ा मददगार और क्या हैं इसके फायदे-नुकसान.

AI से डरते थे अंकित... फिर वही कैसे बन गया उनका सबसे बड़ा मददगार? एक फ्रीलांसर ने साझा किया अपना अनुभव
AI ने कैसे बदला काम और कमाई का तरीका!
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'AI आपकी नौकरी छीन लेगा' अगर आपने भी यह बात सुनी है, तो आप अकेले नहीं हैं. आज लाखों लोग इसी डर से जूझ रहे हैं, लेकिन क्या सच में AI दुश्मन है? या सही इस्तेमाल करने पर यह आपकी कमाई और काम दोनों आसान बना सकता है? इसी सवाल का जवाब देती है अंकित की कहानी, जिसने डर से दोस्ती तक का सफर तय किया.

वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो AI को अपने काम का दुश्मन नहीं बल्कि मददगार मानने लगे हैं. कंटेंट लिखने से लेकर डेटा जुटाने, ईमेल तैयार करने, रिसर्च करने और नए आइडिया खोजने तक, AI अब रोजमर्रा के कामों का हिस्सा बनता जा रहा है.

ऐसे में ये सवाल बेहद अहम है कि क्या सचमुच AI नौकरी छीनने आया है, या फिर यह ऐसा टूल है जो सही इस्तेमाल करने पर काम को आसान बना सकता है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए मिलिए अंकित से.

कुछ समय पहले तक वह भी AI का नाम सुनते ही परेशान हो जाता था. उसे लगता था कि AI उसकी नौकरी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा. लेकिन वक्त के साथ उसकी सोच बदलती गई और आज उसकी कहानी कुछ और ही कहती है. आइए जानते हैं अंकित की कहानी…

AI से नौकरी जाएगी या बनेगी आसान? पढ़ें अंकित की कहानी

अंकित एक फ्रीलांसर हैं. अंकित ने एनडीटीवी को बताया कि कुुछ साल-दो साल पहले की ही बात है. सोशल मीडिया और न्यूज रिपोर्ट्स में AI को लेकर खूब चर्चा हो रही थी. कहीं कहा जा रहा था कि लाखों नौकरियां प्रभावित होंगी, तो कहीं दावा किया जा रहा था कि कई काम पूरी तरह मशीनों के भरोसे हो जाएंगे.

AI से डर से शुरुआत कैसे हुई?

अंकित ने एनडीटीवी को बताया कि मैं भी उन लोगों में था जो इस बदलाव को लेकर उत्साहित कम और चिंतित ज्यादा थे. AI के बारे में पढ़ते-पढ़ते एक दिन अंकित ने खुद इसे इस्तेमाल करना शुरू किया.

शुरुआत सिर्फ यह समझने के लिए की थी कि आखिर यह कर क्या सकता है. पहले कुछ सामान्य सवाल पूछे, फिर अपने काम से जुड़े छोटे-छोटे प्रयोग करने लगा.

लेकिन असल बदलाव तब आया जब अंकित ने इसे अपने काम में इस्तेमाल करना शुरू किया.

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डर से दोस्ती तक: AI ने कैसे बदल दी इस फ्रीलांसर की जिंदगी.

जब पहली बार AI इस्तेमाल किया

अंकित ने एनडीटीवी को बताया कि किसी सब्जेक्ट पर शुरुआती जानकारी जुटानी हो, लंबा ईमेल लिखना हो या किसी आइडिया पर काम करना हो, AI कई काम मिनटों में कर देता था. पहले जिस काम में एक-दो घंटे लग जाते थे, उसका शुरुआती ड्राफ्ट कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता था.

क्या AI ने कमाई रातोंरात दोगुनी कर दी?

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. लेकिन इसने मेरा समय जरूर बचाया. फ्रीलांस काम में समय सबसे कीमती चीज होता है. जब रोज के कुछ घंटे बचने लगे, तो अंकित ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देने लगा.

नए क्लाइंट्स से बात करने का समय मिला और पहले की तुलना में ज्यादा काम संभालने लगा. इससे कमाई बढ़ाने के मौके भी अपने आप बढ़ गए.

AI की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?

ऐसा नहीं है कि AI हर बार सही जवाब देता है. कई बार गलतियां भी होती हैं और जानकारी को दोबारा जांचना पड़ता है. इसलिए अंकित इस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करता.

AI दोस्त है या दुश्मन?

लेकिन इतना जरूर है कि जिस टेक्नोलॉजी को कभी अंकित अपनी नौकरी के लिए खतरा समझता था, वही आज मेरे रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन चुकी है. अंकित का कहना है कि -

आज अगर कोई मुझसे पूछे कि AI दोस्त है या दुश्मन, तो मेरा जवाब होगा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं.मेरे लिए यह नौकरी छीनने वाला टूल नहीं, बल्कि काम को तेज और आसान बनाने वाला साथी बन गया है.

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