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पब्लिक टॉयलेट्स की सीट में आगे की तरफ गैप क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

पब्लिक टॉयलेट में दिखने वाला U-शेप सीट का आगे का गैप सिर्फ डिजाइन नहीं, आपकी सुविधा और सेहत से जुड़ा है. जानें कैसे यह 1955 से लागू नियम महिलाओं की सहूलियत, बेहतर सफाई और जर्म्स के खतरे को कम करने में मदद करता है.

पब्लिक टॉयलेट्स की सीट में आगे की तरफ गैप क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह
टॉयलेट सीट में गैप किस लिए होता है? ( Image NDTV)
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पब्लिक टॉयलेट्स में आपने एक बात नोटिस की होगी? वहां लगी टॉयलेट सीट आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाली सीट से अलग होती है. इसकी आगे की तरफ एक खुला हिस्सा या गैप होता है, जो इंग्लिश अल्फाबेट “U” जैसा दिखाई देता है. कई लोग इसे टूटी हुई सीट या कम लागत वाला डिजाइन समझ लेते हैं, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. दरअसल, यह गैप जानबूझकर बनाया जाता है और इसके पीछे कई कारण हैं. 

1955 से लागू है यह स्टैंडर्ड 

अमेरिका में पब्लिक टॉयलेट्स के लिए U-आकार की सीट का नियम पहली बार अमेरिकन स्टैंडर्ड नेशनल प्लंबिंग कोड के तहत 1955 में लागू किया गया था. इसके बाद 1973 में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ प्लंबिंग एंड मैकेनिकल ऑफिशियल्स (IAPMO) ने भी इसे यूनिफॉर्म प्लंबिंग कोड का हिस्सा बनाया. इसके चलते कई देशों ने अपने यहां यह नियम लागू किया. इससे साफ है कि यह डिजाइन किसी लागत में कटौती का परिणाम नहीं, बल्कि ऑफिशियल नियमों का हिस्सा है.

क्यों बनाया गया यह डिजाइन

सीट के आगे बने इस खुले हिस्से का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए बेहतर स्वच्छता (हाइजीन) सुनिश्चित करना है. यह डिजाइन इस्तेमाल के बाद सफाई करते समय सीट के सामने वाले हिस्से के सीधे संपर्क में आने से बचाता है. दरअसल, पब्लिक टॉयलेट्स का रोजाना सैकड़ों लोग उपयोग करते हैं, जिससे संक्रमण और कीटाणुओं के फैलने का खतरा बढ़ जाता है. U-आकार की यह डिजाइन इसी जोखिम को कम करने में मदद करती है.

इस बारे में “हाउ स्टफ वर्क्स” में छपे एक आर्टिकल में भी बताया गया है कि पब्लिक टॉयलेट की सीट आगे से खुली, यानी U-शेप में क्यों बनाई जाती है.

सफाई कर्मचारियों के लिए भी है फायदेमंद

U-आकार की सीट सिर्फ यूजर्स ही नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों के लिए भी काफी सुविधाजनक होती है. इसके खुले हिस्से की वजह से सीट के नीचे और टॉयलेट बाउल के आगे वाले हिस्से तक आसानी से पहुंचा जा सकता है, इससे कम समय में ज्यादा प्रभावी तरीके से सफाई और सैनिटाइजेशन करना संभव हो जाता है.

इसके अलावा, यह डिजाइन बेहतर वेंटिलेशन भी देता है, जिससे बदबू को कम करने में मदद मिलती है. 

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च में भी बताया गया है कि टॉयलेट से जर्म कैसे फैलते हैं, मौजूदा डिजाइन में क्या कमियां हैं और पब्लिक टॉयलेट्स को किस तरह डिजाइन किया जाए ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके.

छोटा बदलाव, बड़ा मकसद

पहली नजर में साधारण दिखने वाला यह गैप असल में सार्वजनिक स्वच्छता और रखरखाव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण डिजाइन है. यह साबित करता है कि रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाली कई चीजों के पीछे गहरा वैज्ञानिक और प्रैक्टिकल तर्क छिपा होता है. अगली बार जब आप किसी पब्लिक टॉयलेट में जाएं, तो इस छोटे से डिजाइन की बड़ी यूटिलिटी को जरूर याद करें.

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