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कबूतरों को रोकने के लिए बालकनी में लगाई जाली, दूसरे दिन उसी में फंस गया... ऐसे बचाई जिंदगी - 30 मिनट के रेस्क्यू की कहानी

बालकनी में कबूतरों को रोकने के लिए नेट लगाया, लेकिन कबूतर उसी जाली में फंस गया. बड़ी मशक्कत से बचाई गई उसकी जान. पूरी रेस्क्यू स्टोरी जानने के लिए पढ़ें.

कबूतरों को रोकने के लिए बालकनी में लगाई जाली, दूसरे दिन उसी में फंस गया... ऐसे बचाई जिंदगी - 30 मिनट के रेस्क्यू की कहानी
Pigeon Stuck in Balcony Net: बालकनी नेट में कबूतर फंसने और रेस्क्यू की कहानी. (AI Image)

Pigeon Stuck in Net: शहरों में फ्लैट्स में रहने वाले लोगों की एक बड़ी परेशानी बालकनी में आने वाले कबूतरों की भी है. आपकी साफ बालकनी को कबूतर एक ही दिन में इतना गंदगी कर देते हैं, कि वहां जाने का मन नहीं करता. मैं नोएडा में पिछले कुछ सालों से फ्लैट में रह रहा हूं और मेरी सबसे बड़ी परेशानी थी बालकनी में आने वाले कबूतर. रोज सुबह बालकनी गंदी मिलती, कपड़े सुखाने डालो तो कबूतर सब खराब कर देते. कई बार तो धुले कपड़े दोबारा धोने पड़ते थे. आखिरकार तंग आकर मैंने बालकनी में जाली लगवाने का फैसला किया, ताकि कबूतर अंदर न आ सकें. शुरुआत में लगा कि समस्या खत्म हो गई है, लेकिन अगले ही दिन जो हुआ, उसने मुझे एक बड़ी सीख दे दी. एक कबूतर उसी जाली में बुरी तरह फंस गया था, और फिर शुरू हुआ उसे बचाने का 30 मिनट का मुश्किल रेस्क्यू.

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कैसे हुई ये घटना?

एक दिन ऑफिस से लौटते वक्त शाम हो चुकी थी. जैसे ही मैं घर पहुंचा, मेरी नजर बालकनी पर गई. वहां एक कबूतर जाली में बुरी तरह फंसा हुआ था. वह खुद को छुड़ाने की कोशिश में और ज्यादा उलझ चुका था. मुझे अंदाजा हुआ कि वह करीब 15-20 मिनट से ऐसे ही फंसा हुआ था.

पहली कोशिश और घबराहट

उस वक्त मेरी हालत थोड़ी घबराई हुई थी. समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. मैंने धीरे-धीरे उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन वह इतना उलझ चुका था कि उसके पंखों में जाली फंस गई थी और हल्का कट भी लग चुका था. कबूतर दर्द में था और बार-बार फड़फड़ा रहा था. मैंने जैसे तैसे 10 मिनट तक उसे जाली से निकालने की कोशिश की लेकिन, वह कामयाब नहीं हो पाया.

जाली काटने का फैसला

साम-दाम, दंड-भेद करने के बाद मुझे समझ आ गया कि बिना जाली काटे उसे निकालना मुश्किल है. लेकिन अकेले ये करना आसान नहीं था, क्योंकि जाली उसके पंखों में बहुत कसकर फंसी हुई थी. मैंने तुरंत पास में ही रहने वाले अपने एक दोस्त को फोन किया और उसे मदद के लिए बुलाया.

30 मिनट की मेहनत और आखिरकार सफलता

दोस्त के आने के बाद हमने मिलकर धीरे-धीरे जाली को काटना शुरू किया. हम दोनों बहुत सावधानी से काम कर रहे थे, ताकि कबूतर को और चोट न लगे. लगभग 30 मिनट की मेहनत के बाद आखिरकार हम उसे बाहर निकालने में सफल हो गए. हालांकि उसके पंख थोड़े डैमेज हो चुके थे.

कबूतर की देखभाल और राहत

हमने उसे कुछ देर बालकनी में ही रखा ताकि वह थोड़ा शांत हो सके. फिर उसे छत पर ले गए, वहां दाना और पानी दिया. कुछ देर बाद जब वह थोड़ा ठीक लगा, तो हमने उसे खुले आसमान में उड़ा दिया. उस पल जो सुकून मिला, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है.

इस घटना से मिली बड़ी सीख

इस पूरी घटना ने मुझे एक बहुत जरूरी बात सिखाई. अगर आप भी बालकनी में जाली लगवा रहे हैं, तो ध्यान रखें जाली कहीं से भी ढीली न हो, कोई गैप या खुला हिस्सा न छोड़ा जाए, जाली को सही तरीके से टाइट फिट करवाएं, समय-समय चेक करते रहें.

कबूतरों से बचने के लिए जाली लगवाना सही उपाय है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही किसी जानवर के लिए खतरा बन सकती है. मेरी इस छोटी सी गलती ने एक कबूतर की जान जोखिम में डाल दी थी. लेकिन सही समय पर किए गए प्रयास से उसकी जान बच पाई.

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