Ghar Ko Thanda Rakhne Ka Tarika: तपती गर्मी में घर को गर्म रखना बेहद मुश्किल बनता जा रहा है, बढ़ता तापमान अब तो AC और कूलर की कूलिंग भी फेल कर रहा है. ऐसे में कई बार हम यही सोचते रह जाते हैं, कि ऐसा क्या करें कि घर ठंडा भी रहे और ज्यादा बिजली का बिल भी न आए. इसलिए आज हम आपके साथ एक ऐसा हजारों साल पुराना फॉर्मूला शेयर करने वाले हैं, जिसकी मदद से आप लंबे समय तक बिना ज्यादा पैसे खर्च किए घर को ठंडा रख सकते हैं. चलिए जानते हैं क्या है वो प्राचीन जुगाड़!

टेराकोटा कूलिंग क्या है?
टेराकोटा एक प्राकृतिक मिट्टी से बनाया गया कठोर पदार्थ है, जिसे आकार देकर कम तापमान पर पकाया जाता है और पकने के बाद इसकी सतह पर बहुत ही महीन छिद्र बन जाते हैं, इसका रंग लाल, जंग जैसा भूरा या मिट्टी के शेड में होता है. इसकी खस बात यह है कि नमी को आसानी से सोखने में मदद करता है और धीरे-धीरे बाहर छोड़ने में मदद करता है.
टेराकोटा की कूलिंग कैसे काम करती है?
तपती गर्मी में घर की छत और दीवारें का तापमान सबसे ज्यादा होता है, ऐसे में टेराकोटा कूलिंग इसे कम करने में बेहद मददगार साबित हो सकती है.
घर की छत बनाते समय कंक्रीट के बीच खाली टेराकोटा घड़े उल्टा करके रखे जाते हैं, जो स्लैब के अंदर एक तरह की खाली परत बना देते हैं और ये परत गर्मी को नीचे आने से रोकने में मदद करती और तापमान को काफी हद तक कम कर देती है, जिसके कारण नेचुरल कूलिंग कमरे तक पहुंचती है और घर में ठंडक बनी रहती है.
टेराकोटा को सस्ता और टिकाऊ क्यों माना जाता है?
इस तरीके से कूलिंग करने में किसी भी तरह की मशीन, गैस या बिजली का उपयोग नहीं किया जाता है, जिसके कारण बिजली का बिल कम आता है. कम खर्च के साथ ही साथ यह सालों तक टिकाऊ रहता है. AC या कूलर बाहरी वातावरण में गर्म हवा छोड़ते हैं जिससे तापमान और बढ़ता है. वहीं, टेराकोटा इसके उलट प्राकृतिक ठंडक पैदा करता है और प्रदूषण नहीं बढ़ाता.
टेराकोटा के फायदे
- छत का तापमान कम करता है
- गर्मी को 40–50% तक कम करने की क्षमता
- उमस में राहत दिलाता है
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