Summer Snow Destinations: देश के ज्यादातर हिस्सों में इस समय तापमान 40°C के पार पहुंच चुका है. लोग गर्मी से बेहाल हैं और ठंडक की तलाश में पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां मई-जून में भी बर्फ देखने को मिल जाती है?
जी हां, ये वही वक्त है जब मैदानी इलाकों में लू चल रही होती है, लेकिन ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अभी भी बर्फ की सफेद चादर बिछी रहती है. अगर आप भी इस तपती गर्मी से राहत चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें।
ई-जून में भी यहां हो रही बर्फबारी, गर्मी से राहत के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन
1. द्रास, कारगिल (लद्दाख) - मई की बर्फबारी का सबसे ठंडा रास्ता
बर्फ वाली जगह: द्रास घाटी और जोजिला पास के पास की पहाड़ियां
ऊंचाई: 3,200 मीटर (10,760 फीट)
द्रास को दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी और इंसानों के रहने लायक जगह माना जाता है. अक्टूबर से अप्रैल तक होने वाली भारी बर्फबारी का असर मई के मध्य तक साफ दिखता है. द्रास वॉर मेमोरियल, नेशनल हाईवे 1 के किनारे बर्फ से ढकी पहाड़ियां और जोजिला पास का रास्ता मई में बर्फ देखने का सबसे बेहतरीन अनुभव देते है.
मई की शुरुआत में यहा का तापमान 7 डिग्री से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. यह घूमने और फोटो खींचने के लिए बहुत अच्छा है और बर्फ को थामे रखने के लिए भी काफी है.
प्रवेश शुल्क: बिल्कुल मुफ्त. कोई टिकट नहीं लगता.
समय: 24 घंटे खुला है. वॉर मेमोरियल सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है.
कितना समय चाहिए: द्रास और आसपास की जगहें घूमने के लिए 1 से 2 दिन काफी है.
किनके लिए अच्छा है: रोमांच पसंद करने वाले लोग, फोटोग्राफर और भीड़भाड़ से दूर जाने वाले जोड़े.

द्रास कैसे पहुंचे
दिल्ली से: श्रीनगर के लिए डेढ़ घंटे की फ्लाइट लें जिसका किराया 6,000 से 8,000 रुपये होता है. फिर श्रीनगर से नेशनल हाईवे 1 और जोजिला पास होते हुए द्रास के लिए टैक्सी करें. यह 150 किलोमीटर का रास्ता 4 से 5 घंटे में तय होता है और किराया 4,000 से 5,000 रुपये आता है.
मुंबई से: श्रीनगर के लिए 3 घंटे की फ्लाइट लें जिसका किराया 8,000 से 12,000 रुपये है, फिर आगे का रास्ता टैक्सी से तय करें.
नजदीकी एयरपोर्ट: शेख उल-आलम इंटरनेशनल एयरपोर्ट, श्रीनगर (150 किलोमीटर).
नजदीकी रेलवे स्टेशन: जम्मू तवी (400 किलोमीटर, सड़क मार्ग से 10 से 12 घंटे).
सावधानियां
बीआरओ द्वारा सफाई के बाद जोजिला पास आमतौर पर मई की शुरुआत में खुल जाता है. पहले हफ्ते में सड़कों पर बर्फ की परतें और हिमस्खलन का मलबा मिल सकता है. बीआरओ के नियमों के मुताबिक गाड़ियों को एक-एक तरफ से ही जाने दिया जाता है. श्रीनगर से सोनमर्ग की सड़क अच्छी है पर सोनमर्ग से द्रास का रास्ता थोड़ा खराब है. अगर खुद गाड़ी चला रहे है तो टायरों के लिए एंटी-स्किड चेन साथ रखें.
परमिट: भारतीय नागरिकों के लिए कोई खास परमिट नहीं चाहिए. चौकियों पर दिखाने के लिए सरकारी फोटो पहचान पत्र साथ रखें. विदेशी नागरिकों को द्रास से आगे लद्दाख के इलाकों में जाने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होगी, जो रजिस्टर्ड एजेंट के जरिए 400 से 600 रुपये में बनता है.
खास सलाह: जोजिला पास को दिन के उजाले में पार करने के लिए सुबह 6 बजे से पहले श्रीनगर से निकल जाएं. दोपहर बाद यहा बहुत धुंध हो जाती है और बीआरओ दोपहर 2 बजे के बाद गाड़ियों को रोक देता है. अपने साथ खाने-पीने का सामान रखें क्योंकि सोनमर्ग और द्रास के बीच अच्छे ढाबे नहीं है.
2. गुलमर्ग (जम्मू और कश्मीर) - गोंडोला राइड से पहुंचे 14,000 फीट की बर्फ पर
बर्फ वाली जगह: अफरवत चोटी (गोंडोला के दूसरे फेज से)
ऊंचाई: बेस पर 2,650 मीटर और अफरवत चोटी पर 4,200 मीटर
गुलमर्ग का फेज 2 गोंडोला आपको हरी-भरी वादियों से सीधे 12 मिनट में गहरी बर्फ के बीच पहुंचा देता है. अफरवत चोटी स्टेशन पर मई में भी 6 फीट से ज्यादा बर्फ रहती है. महीने के बीच तक फेज 1 यानी कोंगदूरी में भी कुछ बर्फ मिल जाती है. नीचे के मैदान मई तक हरे हो जाते है, इसलिए पक्की बर्फ देखने के लिए गोंडोला की सवारी जरूरी है.
ध्यान देने वाली बात: बदलते मौसम के कारण गुलमर्ग में स्कीइंग का सीजन अब सिमट गया है, लेकिन अफरवत चोटी पर बहुत ऊंचाई होने की वजह से मई में भी बर्फ आसानी से मिल जाती है.
प्रवेश शुल्क: गोंडोला टिकट - फेज 1 के लिए 800 रुपये, फेज 2 के लिए 1,000 रुपये और तत्काल के लिए 1,110 से 1,310 रुपये लगते है. 3 साल से कम उम्र के बच्चों का कोई टिकट नहीं है.
समय: गोंडोला अलग-अलग स्लॉट में चलता है. फेज 1 सुबह 9 से 11, 11:15 से 1:15 और दोपहर 1:30 से 3:30 बजे तक चलता है. फेज 2 सुबह 9 से दोपहर 1 और दोपहर 1 से 3:30 बजे तक चलता है. टिकट काउंटर सुबह 8:30 बजे खुलता है और गर्मियों में समय शाम 6 बजे तक बढ़ाया जा सकता है.
जाने का सही समय: 1 से 20 मई तक. महीने के आखिर में फेज 2 की बर्फ कम होने लगती है.
कितना समय चाहिए: गोंडोला और बर्फ में खेलने के लिए आधा दिन, और घास के मैदानों में घूमने के लिए पूरा दिन चाहिए.
किनके लिए अच्छा है: बच्चों वाले परिवार, शादीशुदा जोड़े और पहली बार बर्फ देखने वाले लोग.

गुलमर्ग कैसे पहुंचे
दिल्ली से: श्रीनगर के लिए डेढ़ घंटे की फ्लाइट लें, फिर टंगमर्ग होते हुए गुलमर्ग के लिए टैक्सी करें. यह 50 किलोमीटर की दूरी डेढ़ से दो घंटे में पूरी होती है और टैक्सी का किराया 2,000 से 2,500 रुपये है.
मुंबई से: श्रीनगर के लिए 3 घंटे की फ्लाइट लें और फिर वहा से टैक्सी करें.
नजदीकी एयरपोर्ट: श्रीनगर (50 किलोमीटर).
सावधानियां
टंगमर्ग के रास्ते श्रीनगर-गुलमर्ग सड़क सालभर बहुत अच्छी हालत में रहती है. रास्ते में कोई ऊंचे पास नहीं पड़ते, इसलिए सामान्य गाड़ियां भी आसानी से चली जाती है. वीकेंड पर यहा भीड़ हो सकती है, इसलिए श्रीनगर से सुबह 8 बजे तक निकलना बेहतर रहेगा.
परमिट: कोई परमिट नहीं चाहिए. बस काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से गोंडोला टिकट बुक करें.
खास सलाह: सुबह 10 बजे सबसे पहले फेज 2 का टिकट लें. सुबह 11 बजे के बाद भीड़ बहुत बढ़ जाती है और वीकेंड पर तत्काल टिकट जल्दी खत्म हो जाते है. धूप के चश्मे साथ रखना न भूलें क्योंकि बर्फ से टकराकर आने वाली तेज धूप आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है.
3. युमथांग वैली और जीरो पॉइंट (उत्तरी सिक्किम) - ऊंचाइयों पर बर्फ और फूलों का नजारा
बर्फ वाली जगह: जीरो पॉइंट (युमेसामदोंग) 4,572 मीटर पर और युमथांग वैली 3,564 मीटर पर जहां बर्फ और जंगली फूल एक साथ दिखते है
ऊंचाई: 3,564 मीटर से 4,572 मीटर
मई की शुरुआत में युमथांग में आपको एक अनोखा नजारा मिलता है, जहा बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच रोडोडेंड्रोन के फूल खिले होते है. बर्फ पर चलने का असली मजा लेने के लिए आपको 23 किलोमीटर आगे जीरो पॉइंट जाना होगा, जहा तापमान माइनस 5 डिग्री तक गिर जाता है और चारों तरफ मोटी बर्फ होती है. यह मई में भारत की सबसे ठंडी जगहों में से एक है.
एक जरूरी बात यह है कि आप यहा अकेले या खुद की गाड़ी से नहीं जा सकते. उत्तरी सिक्किम में घूमने के लिए सरकार से मान्यता प्राप्त टूर ऑपरेटर की मदद लेना अनिवार्य है.
प्रवेश शुल्क: प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) वैसे मुफ्त है, पर टूर ऑपरेटर इसके काम के लिए 100 से 200 रुपये प्रति व्यक्ति लेते है. गंगटोक से युमथांग और जीरो पॉइंट की एक दिन की यात्रा के लिए गाड़ी और परमिट मिलाकर टूर ऑपरेटर का पैकेज 5,000 से 6,000 रुपये का होता है.
समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच जाना सबसे अच्छा है. अंधेरा होने से पहले लौट आएं क्योंकि सड़कों पर सुरक्षा रेलिंग नहीं लगी है.
कितना समय चाहिए: गंगटोक से पूरे एक दिन का सफर (सुबह 5 बजे निकलकर शाम 7 बजे वापसी).
किनके लिए अच्छा है: प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर और शादीशुदा जोड़े.

युमथांग वैली कैसे पहुंचे
दिल्ली से: बागडोगरा के लिए 2 घंटे की फ्लाइट लें जिसका किराया 5,000 से 7,000 रुपये है. वहा से 4 घंटे की टैक्सी करके 2,000 रुपये में गंगटोक पहुंचे. फिर टूर ऑपरेटर की गाड़ी से युमथांग या जीरो पॉइंट जाएं. यह 135 किलोमीटर का रास्ता है जिसमें आने-जाने का किराया और परमिट मिलाकर 5,000 से 6,000 रुपये लगते है.
मुंबई से: बागडोगरा के लिए 3 घंटे की फ्लाइट लें और फिर इसी रास्ते से आगे बढ़ें.
कोलकाता से: बागडोगरा के लिए 1 घंटे की फ्लाइट लें और फिर गंगटोक के लिए टैक्सी करें.
नजदीकी एयरपोर्ट: बागडोगरा (गंगटोक से 185 किलोमीटर).
सावधानियां
साल 2023 में आई बाढ़ के बाद अब गंगटोक से युमथांग के रास्ते दोबारा खोल दिए गए है. लाचुंग और युमथांग के रास्ते सख्त समय सीमा के साथ चालू है. ऊपर जाते समय दोपहर 1 बजे तक संकलंग पुल पार करना होता है और लौटते समय दोपहर 2 बजे तक तुंग चेक पोस्ट पार करना जरूरी है. बारिश होने पर छोटे-मोटे लैंडस्लाइड हो सकते है. युमथांग से जीरो पॉइंट का रास्ता थोड़ा कच्चा है, इसलिए वहा केवल एसयूवी गाड़ियां ही जाती है. जीरो पॉइंट पर रात में रुकने की इजाजत नहीं है, आपको लाचुंग में ही ठहरना होगा.
परमिट: सभी पर्यटकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) जरूरी है. आपको सिक्किम टूरिज्म के रजिस्टर्ड ऑपरेटर के साथ ही सफर करना होगा. साल 2026 से ये परमिट पूरी तरह ऑनलाइन कर दिए गए है.
खास सलाह: गंगटोक से जीरो पॉइंट की थकान भरी एक दिन की यात्रा करने के बजाय एक रात लाचुंग में रुकें. इससे आपके शरीर को ऊंचाई वाले माहौल की आदत हो जाएगी, आप बर्फ पर उगता हुआ सूरज देख पाएंगे और आपको तबीयत खराब होने जैसी समस्या नहीं होगी.
4. स्पीति वैली (हिमाचल प्रदेश) - दुनिया की छत पर बर्फ का दीदार
बर्फ वाली जगह: कुंजुम पास (4,590 मीटर), चंद्रताल झील के आसपास और किब्बर व लांगजा जैसे ऊंचे गांव
ऊंचाई: 3,600 मीटर से 4,590 मीटर (12,000 से 15,060 फीट)
स्पीति इस सूची की सबसे मुश्किल और सबसे खूबसूरत जगह है. मई में कुंजुम पास पर भारी बर्फ होती है, चंद्रताल झील आधी जमी होती है और किब्बर व की जैसे बौद्ध मठ सफेद बर्फ की चादर के बीच बहुत सुंदर दिखते है.
शिमला-किन्नौर का रास्ता सालभर खुला रहता है, लेकिन मनाली से रोहतांग और कुंजुम पास का रास्ता मई के मध्य के बाद ही खुलता है. इसी हिसाब से अपनी यात्रा का प्लान बनाएं.
प्रवेश शुल्क: स्पीति वैली में जाने की कोई फीस नहीं है. चंद्रताल में कैंपिंग के लिए 50 से 100 रुपये की मामूली फीस लग सकती है.
समय: सफर केवल दिन के उजाले में ही करें. ज्यादातर मठ सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुलते है.
कितना समय चाहिए: काजा, किब्बर, की मठ और चंद्रताल घूमने के लिए कम से कम 4 से 5 दिन का समय रखें.
सावधानियां रोमांच के शौकीन, बाइकर्स, अकेले घूमने वाले और पहाड़ों में सफर का अनुभव रखने वाले लोग.
स्पीति वैली कैसे पहुंचे
दिल्ली से (शिमला के रास्ते): शिमला के लिए फ्लाइट लें या चंडीगढ़ तक 4-5 घंटे की ड्राइविंग करें. फिर किन्नौर होते हुए हिंदुस्तान-तिब्बत रोड से टैक्सी लें. यह 400 किलोमीटर का सफर 12 से 14 घंटे लेता है और किराया 8,000 से 12,000 रुपये आता है. रात में रेकॉन्ग पियो या कल्पा में रुकें.
दिल्ली से (मनाली के रास्ते): कुल्लू या मनाली के लिए फ्लाइट या गाड़ी से जाएं. फिर मनाली से रोहतांग और कुंजुम पास होते हुए काजा पहुंचे. यह 200 किलोमीटर का रास्ता 8 से 10 घंटे लेता है और रोहतांग पास खुलने (मई के मध्य) के बाद ही चालू होता है. टैक्सी का किराया 6,000 से 8,000 रुपये है.
मुंबई से: दिल्ली या चंडीगढ़ के लिए फ्लाइट लें और फिर आगे का रास्ता सड़क मार्ग से तय करें.
नजदीकी एयरपोर्ट: मनाली वाले रास्ते के लिए भुंतर (कुल्लू) और किन्नौर वाले रास्ते के लिए शिमला एयरपोर्ट.

सावधानियां
शिमला-किन्नौर-स्पीति का रास्ता आमतौर पर खुला रहता है, लेकिन किन्नौर के पास लैंडस्लाइड वाले हिस्से मिलते है. मनाली-रोहतांग-कुंजुम का रास्ता रोहतांग और कुंजुम पास से बर्फ हटने के बाद ही खुलता है. साल 2026 में रोहतांग पास 17 मई को खुल गया था. मढ़ी से रोहतांग के बीच रास्ते में बड़ी-बड़ी बर्फ की दीवारें दिखती है. अटल टनल से लाहौल तो जाया जा सकता है पर कुंजुम पास के लिए पुराना रास्ता ही काम आता है. निकलने से पहले सड़कों की ताजा स्थिति जरूर चेक कर लें.
परमिट: भारतीय नागरिकों के लिए कोई परमिट नहीं चाहिए. विदेशी नागरिकों को इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है जो 250 से 500 रुपये में बनता है और 10 दिन के लिए मान्य होता.
खास सलाह: अगर रास्ते खुले हो तो शिमला के रास्ते से स्पीति जाएं और मनाली के रास्ते से वापस आएं. इससे आपको हिमालय के दो अलग-अलग खूबसूरत रूप देखने को मिलेंगे. रेकॉन्ग पियो में ही अपनी गाड़ी का ईंधन भरवा लें और कैश निकाल लें, क्योंकि आगे एटीएम का भरोसा नहीं रहता.
5. सोनमर्ग (जम्मू और कश्मीर) - थाजीवास ग्लेशियर और बर्फ से ढके मैदान
बर्फ वाली जगह: थाजीवास ग्लेशियर और उसके आसपास के मैदान
ऊंचाई: बेस पर 2,740 मीटर और ग्लेशियर पर 3,100 मीटर से ज्यादा
सोनमर्ग यानी सोने का मैदान, श्रीनगर-लेह हाईवे पर श्रीनगर से 80 किलोमीटर दूर स्थित है. मई में बर्फ देखने के लिए यहा का मुख्य आकर्षण थाजीवास ग्लेशियर है, जहां कस्बे से 3 किलोमीटर का ट्रैक करके या टट्टू (घोड़े) की सवारी से पहुंचा जा सकता है. इस ग्लेशियर और इसके आसपास के हिस्से में सालभर बर्फ रहती है और मई में तो यह पूरी तरह ढका होता है.
मई के महीने में सोनमर्ग कस्बे में बर्फ नहीं होगी, लेकिन ग्लेशियर पर आपको मायूसी नहीं मिलेगी. यह जोजिला पास से ठीक पहले का बड़ा स्टॉप है, इसलिए आप इसे द्रास यात्रा के साथ भी जोड़ सकते है.
प्रवेश शुल्क: सोनमर्ग में एंट्री मुफ्त है. थाजीवास ग्लेशियर तक टट्टू की सवारी का किराया 500 से 800 रुपये तक होता है जिसमें मोलभाव किया जा सकता है.
समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच घूमना अच्छा रहता है. दोपहर 3 बजे के बाद ग्लेशियर वाले इलाके में ठंडी हवाएं चलने लगती है.
कितना समय चाहिए: थाजीवास ग्लेशियर के लिए आधा दिन और घास के मैदानों में टहलने के लिए पूरा दिन चाहिए.
किनके लिए अच्छा है: परिवार, जोड़े और आसानी से बर्फ तक पहुंचने की इच्छा रखने वाले लोग.

सोनमर्ग कैसे पहुंचे
दिल्ली से: श्रीनगर के लिए फ्लाइट लें, फिर श्रीनगर से 80 किलोमीटर दूर सोनमर्ग के लिए टैक्सी करें. इसमें 2 से 3 घंटे लगते है और किराया लगभग 3,000 रुपये आता है.
मुंबई से: श्रीनगर के लिए 3 घंटे की फ्लाइट लें और फिर वहा से टैक्सी करें.
नजदीकी एयरपोर्ट: श्रीनगर (80 किलोमीटर).
सावधानियां
श्रीनगर-सोनमर्ग हाईवे (National Highway 1) मई तक पूरी तरह साफ और अच्छी हालत में रहता है. यहा सामान्य कारें भी आसानी से जा सकती है. अगर आप आगे द्रास जाना चाहते है, तो सोनमर्ग के बाद जोजिला पास पड़ता है जहा से सड़क की हालत खराब होना शुरू होती है.
परमिट: किसी तरह के परमिट की आवश्यकता नहीं है.
खास सलाह: अपनी कश्मीर यात्रा में सोनमर्ग और गुलमर्ग दोनों को शामिल करें. पहले दिन गुलमर्ग के गोंडोला से अफरवत चोटी की बर्फ देखें. दूसरे दिन सोनमर्ग जाकर थाजीवास ग्लेशियर घूमें. अगर आप और रोमांच चाहते है तो तीसरे दिन जोजिला पार करके द्रास जा सकते है. रुकने के लिए श्रीनगर सबसे आरामदायक और सही जगह है.
6. औली (उत्तराखंड) - सर्दियों के बाद भी बर्फ का मजा देने वाला शहर
बर्फ वाली जगह: औली के स्की ढलान और गोरसों बुग्याल के मैदान
ऊंचाई: 2,500 से 3,049 मीटर (8,200 से 10,000 फीट)
औली भारत का सबसे प्रमुख स्कीइंग डेस्टिनेशन है. हालांकि स्कीइंग का सीजन मार्च में खत्म हो जाता है, लेकिन इसके ऊपरी ढलानों और गोरसों बुग्याल में मई की शुरुआत तक बर्फ के पैच मिल जाते है. जोशीमठ-औली रोपवे की मदद से आप सीधे 10,000 फीट की ऊंचाई पर बसे बर्फ के मैदानों में पहुंच सकते है, जहां से नंदा देवी चोटी का शानदार नजारा दिखता है.
मई के मध्य तक औली के निचले हिस्सों में बर्फ कम होने लगती है, इसलिए सबसे अच्छी स्थिति के लिए मई के पहले हफ्ते में ही यहा जाने का प्लान बनाएं.
प्रवेश शुल्क: वयस्कों के लिए रोपवे का आने-जाने का टिकट 1,000 रुपये और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 500 रुपये है. एक तरफ का टिकट 500 से 600 रुपये में मिलता है. इसकी बुकिंग केवल काउंटर पर होती है, ऑनलाइन कोई सुविधा नहीं है.
समय: रोपवे सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलता है. साढ़े चार किलोमीटर का यह सफर पूरा होने में करीब 25 मिनट लगते है. सीजन में यहा लंबी लाइनें लगती है, इसलिए सुबह जल्दी पहुंचे.
कितना समय चाहिए: 1 से 2 दिन (आधा दिन रोपवे और बर्फ के लिए, पूरा दिन गोरसों बुग्याल ट्रेक के लिए).
किनके लिए अच्छा है: जोड़े, ट्रेकर्स और उत्तराखंड में बर्फ का अनुभव चाहने वाले परिवार.

औली कैसे पहुंचे
दिल्ली से: देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए 1 घंटे की फ्लाइट लें जिसका किराया 4,000 से 5,000 रुपये है. वहा से जोशीमठ के लिए टैक्सी करें जो 250 किलोमीटर की दूरी 8 से 9 घंटे में तय करती है और किराया 4,000 से 6,000 रुपये आता है. फिर जोशीमठ से रोपवे लेकर औली पहुंचे.
मुंबई से: दिल्ली आकर देहरादून की कनेक्टिंग फ्लाइट लें और फिर सड़क मार्ग से जाएं.
नजदीकी एयरपोर्ट: जौलीग्रांट, देहरादून (270 किलोमीटर).
नजदीकी रेलवे स्टेशन: हरिद्वार या ऋषिकेश (275 किलोमीटर, सड़क से 9 से 10 घंटे).
ध्यान रखें
ऋषिकेश से जोशीमठ का हाईवे अच्छी स्थिति में है. जोशीमठ के पास कभी-कभी धुंध और हल्का कीचड़ मिल सकता है. रास्ते में कोई बहुत ऊंचा पास पार नहीं करना पड़ता क्योंकि ऊंचाई का सफर रोपवे से तय हो जाता है. सामान्य गाड़ियों से भी यहा आसानी से आया जा सकता है.
परमिट: कोई परमिट नहीं चाहिए, बस काउंटर से रोपवे का टिकट लेना होगा.
खास सलाह: औली के महंगे होटलों के बजाय जोशीमठ में रुकना ज्यादा अच्छा है. जोशीमठ में खाने के अच्छे विकल्प और एटीएम की सुविधा उपलब्ध है. अगर आप सीजन में थोड़े दिन बाद आ रहे है, तो यही रास्ता वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक के लिए भी जाता है.
7. मुनस्यारी (उत्तराखंड) - पंचचूली की चोटियों का अनोखा नजारा
बर्फ वाली जगह: खलिया टॉप ट्रेक जहां से पंचचूली की पांचों चोटियां दिखती है और बिरथी फॉल्स का इलाका
ऊंचाई: कस्बे में 2,200 मीटर और खलिया टॉप पर 3,500 मीटर
मई के महीने में मुनस्यारी कस्बे के अंदर आपको सीधे चलने वाली बर्फ नहीं मिलेगी. लेकिन यहा से हमेशा बर्फ से ढकी रहने वाली पंचचूली की पांचों चोटियां साफ दिखाई देती है. इसके अलावा खलिया टॉप का ट्रेक आपको उस ऊंचाई पर ले जाता है जहां मई की शुरुआत तक बर्फ के टुकड़े जमीन पर मिल जाते है.
यह हमारी सूची की सबसे अलग और शांत जगह है. यहा आपको पर्यटकों की भीड़ नहीं मिलेगी और यही इस जगह की सबसे बड़ी खूबी है. जो लोग कश्मीर और हिमाचल घूम चुके है, उन्हें मुनस्यारी का यह शांत माहौल बहुत पसंद आता है.

प्रवेश शुल्क: बिल्कुल मुफ्त. खलिया टॉप ट्रेक के लिए कोई टिकट नहीं लगता.
समय: ट्रेक केवल दिन के उजाले में ही करें. पंचचूली का साफ नजारा देखने के लिए सुबह 6 बजे ही निकल जाएं, क्योंकि दोपहर बाद बादल घिर आते है.
कितना समय चाहिए: 2 से 3 दिन (1 दिन खलिया टॉप ट्रेक के लिए, 1 दिन बिरथी फॉल्स और आसपास के गांवों को देखने के लिए).
किनके लिए अच्छा है: ट्रेकर्स, अकेले घूमने वाले लोग, फोटोग्राफर और भीड़ से दूर जाने वाले पर्यटक.
मुनस्यारी कैसे पहुंचे
दिल्ली से: पंतनगर के लिए 1 घंटे की फ्लाइट लें जिसका किराया 4,000 से 5,000 रुपये है. वहा से अल्मोड़ा और बिरथी होते हुए मुनस्यारी के लिए टैक्सी लें जो 200 किलोमीटर का रास्ता 7 से 8 घंटे में तय करती है और किराया 7,000 से 10,000 रुपये आता है. आप दिल्ली से खुद गाड़ी चलाकर भी आ सकते है जो 500 किलोमीटर का रास्ता 12 से 14 घंटे में पूरा होता है.
मुंबई से: दिल्ली की फ्लाइट लें, फिर पंतनगर की कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ें और आगे सड़क से जाएं.
नजदीकी एयरपोर्ट: पंतनगर (275 किलोमीटर).
ध्यान रखें
अल्मोड़ा-मुनस्यारी का रास्ता थोड़ा संकरा है लेकिन मई में आमतौर पर साफ रहता है. ऊंचे हिस्सों पर कभी-कभी कोहरा और हल्का कीचड़ मिल सकता है. रास्ते में कोई बड़ा पास नहीं आता, इसलिए पहाड़ों में गाड़ी चलाने का अनुभव रखने वाले लोग खुद ड्राइव करके आ सकते है.
परमिट: किसी तरह के परमिट की जरूरत नहीं है.
खास सलाह: मुनस्यारी में रुकने के बहुत ज्यादा विकल्प नहीं है, इसलिए मई में जाने के लिए कम से कम 2 हफ्ते पहले होमस्टे बुक कर लें. बर्फ पिघलने के बाद खलिया टॉप के रास्ते के निशान थोड़े धुंधले हो जाते है, इसलिए गांव से किसी स्थानीय गाइड को साथ ले लें जिसका चार्ज 800 से 1,000 रुपये रोज होता है.
यात्रा के लिए क्या पैक करें
गलत सामान ले जाने से आपकी यात्रा का मजा खराब हो सकता है. मई का मौसम ऐसा होता है जहां नीचे गर्मी और बर्फ वाली जगह पर कड़ाके की ठंड होती है. इसलिए यह सामान जरूर रखें:
कपड़ों की परतें: अपने साथ एक भारी जैकेट ले जाने के बजाय थर्मल इनर, फ्लीस की मिड-लेयर और वॉटरप्रूफ बाहरी जैकेट रखें ताकि जरूरत के हिसाब से कपड़े पहने जा सकें.
जूते: अच्छी ग्रिप वाले वॉटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज साथ लाएं. अगर आपके पास नहीं है तो रोहतांग या गुलमर्ग में स्थानीय दुकान से किराये पर ले लें.
धूप से बचाव: 10,000 फीट से ऊपर बर्फ की चमक बहुत तेज होती है, इसलिए अच्छे यूवी चश्मे, एसपीएफ 50 वाली सनस्क्रीन और लिप बाम जरूर रखें.
तबीयत के लिए: ऊंचाई पर होने वाली दिक्कत से बचने के लिए ओआरएस के पैकेट, डॉक्टर की सलाह पर जरूरी दवाएं और तुरंत एनर्जी के लिए चॉकलेट या सूखे मेवे रखें.
जरूरी कागजात: सरकारी फोटो आईडी, रोहतांग का गाड़ी परमिट और युमथांग जाने के लिए सिक्किम का पीएपी परमिट प्रिंट करवाकर साथ रखें.
कैश: द्रास, स्पीति और मुनस्यारी जैसी जगहों पर एटीएम अक्सर काम नहीं करते, इसलिए मुख्य शहरों से निकलते समय अपने पास 5,000 से 10,000 रुपये कैश जरूर रखें.
निष्कर्ष (Conclusion)
इस चिलचिलाती गर्मी में अगर आपका मन भी बर्फ देखने का है, तो आपको विदेश जाने की जरूरत नहीं है। भारत में ही ऐसी कई जगहें हैं जहां मई-जून में भी ठंड और बर्फ का मजा लिया जा सकता है। बस सही प्लानिंग के साथ इन डेस्टिनेशन पर जाएं और गर्मी को कहें अलविदा!
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं