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This Article is From Dec 16, 2020

लेह में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने नए साल के जश्न में मनाया 'लोसर' उत्सव

लोसर त्योहार द्वारा बौद्ध एक तरह से नए साल का जश्न मनाते हैं. जिसमें स्थानीय लोगों के अलावा देश-विदेश से टूरिस्ट्स हिस्सा लेने आते हैं.

लेह में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने नए साल के जश्न में मनाया 'लोसर' उत्सव
लेह में लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने नए साल के जश्न में मनाया 'लोसर' उत्सव
लद्दाख:

लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के युवा विंग ने मंगलवार को 'लोसर' उत्सव मनाया. 'लोसर' को बौद्ध समुदाय के नए साल की शुरुआत के लिए मनाया जाता है. इस उत्सव की शुरुआत 17वीं शताब्दी में तिब्बत के नौवें राजा के वर्चस्व के दौरान एक परंपरा के रूप में हुई थी, जब राजा जमैयांग नामग्याल ने सर्दियों में बाल्टिस्तान की सेना के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व करने का फैसला किया था और उत्सव को पहले ही मना लिया था. तब से लोसर उत्सव तिब्बती कैलेंडर के 11वें महीने में मनाया जाता है.

तिब्बती नए साल को लोसर कहते हैं.  लोसर के मौके पर घर में लोग साफ सफाई करते हैं. नए सामान खरीद कर लाते हैं. बुद्ध की पूजा होती है. नाच-गाने का सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. लोग विशेष चिलमची के पानी में विकसित जौ के पौधे को बौद्ध आले पर रखते हैं और नए साल में अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं.

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