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Sibling Rivalry: बात-बात पर झगड़ा करते हैं बच्चे? चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट ने बताया पैरेंट्स के क्या करने से खत्म हो जाएगी लड़ाई

अगर आपके बच्चे भी बात-बात पर झगड़ा करने लगते हैं और आप इसका कोई हल निकालना चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. आइए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से जानते हैं इस बारे में-

Sibling Rivalry: बात-बात पर झगड़ा करते हैं बच्चे? चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट ने बताया पैरेंट्स के क्या करने से खत्म हो जाएगी लड़ाई
बच्चों को झगड़ा करने से कैसे रोकें?
(P.C- Freepik)

घर में दो बच्चों का होना जितनी खुशी की बात है, उतना ही आम है उनके बीच छोटी-छोटी बातों पर नोकझोंक होना. कभी खिलौने को लेकर झगड़ा होता है तो कभी मम्मी-पापा का ध्यान पाने के लिए. ऐसे में ज्यादातर पैरेंट्स के मन में ये सवाल होता है कि वे ऐसा क्या करें कि उनके बच्चे आपस में झगड़ना बंद कर दें? अगर आप भी अपने बच्चों की लड़ाई से परेशान हैं और इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. इसे लेकर मशहूर चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो में वे बताती हैं, अगर माता-पिता कुछ आसान बातों का ध्यान रखें तो बच्चों के बीच प्यार और समझ दोनों बढ़ सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे- 

क्या करें पैरेंट्स?

श्वेता गांधी का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के बीच एक तरह का 'Sibling Bubble' बनाना चाहिए. यानी दोनों बच्चों को साथ में समय बिताने का मौका दें. इस समय कोई बड़ा उन्हें कंट्रोल न करे. ज्यादातर मामलों में बच्चों की लड़ाई होने पर माता-पिता रेफरी बन जाते हैं. इस कंडीशन में बच्चे खुद समस्या सुलझाना नहीं सीखते. जब माता-पिता झगड़े के बीच में उतर आते हैं, तो बच्चों का ध्यान एक-दूसरे से ज्यादा माता-पिता पर चला जाता है. हर बच्चा यही सोचता है कि मम्मी या पापा बस उसकी साइड लें. 

वहीं, जब बच्चों को एक-दूसरे के साथ टाइम दिया जाता है, पैरेंट्स उनके बीच नहीं आते हैं, तब वे आपस में बात करके अपने झगड़े भी खुद सुलझाना सीखते हैं.

रिसर्च भी बताती है यही बात

श्वेता गांधी बताती हैं, Child Development में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के एक शोध के अनुसार, भाई-बहनों के बीच होने वाली बातचीत बच्चों के लिए सीखने का बड़ा मौका होती है. इसी दौरान वे झगड़े सुलझाना, अपनी भावनाओं को समझना और दूसरों की बात सुनना सीखते हैं. यही स्किल्स आगे चलकर उनके रिश्तों और एक-दूसरे को लेकर उनके व्यवहार को बेहतर बनाती हैं. ऐसे में हर बार खुद झगड़े के बीच में न आएं. बच्चों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने दें और उनके झगड़े खुद उन्हें सुलझाने का मौका दें. 

इन बातों का भी रखें ध्यान 

हर दिन साथ बिताएं कुछ अच्छे पल

साइकोलॉजिस्ट आगे कहती हैं, 'Sibling Bubble' से अलग रोज कुछ मिनट बच्चों के साथ ऐसा समय बनाएं, जब वे मिलकर कोई गेम खेलें, ड्रॉइंग करें या हंसी-मजाक करें. इससे उनका रिश्ता सिर्फ झगड़ों तक सीमित नहीं रहेगा.

बच्चों की तुलना न करें

हर बच्चे की अपनी अलग खूबी होती है. इसलिए एक बच्चे की तुलना दूसरे से करने के बजाय उसकी अपनी अच्छाइयों की तारीफ करें. इससे बच्चों में जलन की भावना नहीं आती है. 

सिर्फ डांटें नहीं, सही तरीका भी सिखाएं

बच्चों से केवल 'झगड़ा मत करो' कहने के बजाय उन्हें बारी-बारी से खेलना, अपनी बात शांत तरीके से कहना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना सिखाएं.

मिल-जुलकर किए गए काम की तारीफ करें

जब भी दोनों बच्चे साथ खेलें, एक-दूसरे की मदद करें या बिना झगड़े कोई काम पूरा करें, तो उनकी तारीफ जरूर करें. इससे वे ऐसे व्यवहार को दोहराने की कोशिश करेंगे.

हर बच्चे के साथ अलग समय बिताएं

इन सब से अलग हर दिन कुछ समय केवल एक बच्चे के साथ बिताएं. इससे दोनों को यह महसूस होगा कि वे माता-पिता के लिए बराबर खास हैं और उन्हें ध्यान पाने के लिए लड़ने की जरूरत नहीं है.

साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, बच्चों के बीच छोटी-मोटी नोकझोंक होना एकदम नॉर्मल बात है, लेकिन सही पैरेंटिंग से इसे हेल्दी रिश्ते में बदला जा सकता है. 

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
 

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