Onion Peel Fertilizer : किचन में खाना बनाते समय सबसे पहले क्या कूड़ेदान में जाता है? ज्यादातर घरों में जवाब होगा- प्याज के छिलके. लेकिन अगली बार इन्हें फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचिए. जिन छिलकों को आप बेकार समझते हैं. वही आपके गार्डन के लिए कमाल की नेचुरल खाद बन सकते हैं. अगर आपके गमलों के पौधे बढ़ नहीं रहे, पत्तियां पीली पड़ गई हैं या फूल और सब्जियां कम आ रही हैं, तो महंगी खाद खरीदने से पहले ये आसान घरेलू ट्रिक जरूर आजमाइए. इसे बनाना भी आसान है और जेब पर एक भी रुपए का एक्स्ट्रा खर्च नहीं आएगा.
प्याज के छिलके क्यों हैं इतने खास? (Significance Of Onion Peel)
प्याज के सूखे छिलकों में ऐसे कई न्यूट्रीएंट्स होते हैं जो पौधों की अच्छी ग्रोथ में मदद कर सकते हैं. इनमें पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे तत्व मौजूद होते हैं. ये मिट्टी को बेहतर बनाने के साथ साथ जड़ों को भी मजबूत करते हैं. जब जड़ें मजबूत होती हैं तो पौधे न्यूट्रीशन्स अच्छे से एब्जॉर्ब अच्छी तरह लेते हैं. इसका असर कुछ समय बाद हरी भरी पत्तियों, ज्यादा फूलों और अच्छी ग्रोथ के रूप में दिख सकता है.
2 दिन में तैयार हो जाएगी नेचुरल लिक्विड खाद (How To Make Liquid Fertilizer)
इस घरेलू फर्टिलाइजर को बनाने के लिए बस प्याज के सूखे छिलके और पानी चाहिए. एक बाल्टी या बड़े डिब्बे में छिलके डालें और इतना पानी भर दें कि सभी छिलके डूब जाएं. अब बर्तन को ढककर दो दिन के लिए छांव वाली जगह पर रख दें. दो दिन बाद पानी का रंग लाल, भूरा या गहरा पीला हो जाएगा. इसका मतलब है कि छिलकों के न्यूट्रिएंट्स पानी में मिल चुके हैं. अब इस पानी को छलनी या सूती कपड़े से छान लें. यही आपका नेचुरल लिक्विड फर्टिलाइजर है. बचे हुए छिलकों को भी फेंकने की जरूरत नहीं है. इन्हें कम्पोस्ट में डालकर ऑर्गेनिक खाद बनाई जा सकती है.
ऐसे करें इस्तेमाल (How To Use)
इस खाद को यूज करने में एक गलती कई लोग कर देते हैं. वो इस घोल को बिना मिलाए सीधे पौधों में डाल देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. पहले इसमें नॉर्मल सामान्य पानी मिलाना चाहिए. अगर एक लीटर घोल है तो उसमें कम से कम एक से दो लीटर साफ पानी मिला लें. अब इसे पौधों की जड़ों के आसपास डालें. कोशिश करें कि मिट्टी बहुत ज्यादा गीली न हो. जब मिट्टी हल्की सूखी लगे, तभी इसका इस्तेमाल करें. हर 10 से 15 दिन में एक बार ये घोल देना काफी माना जाता है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, पुदीना और दूसरे सब्जियों वाले पौधों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
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