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द‍िल्‍ली की लड़की ने खुद पर ही क‍िया 30 दिन का एक्‍सपेर‍िमेंट, बदली खाने की एक आदत, सुधर गई सेहत

अगर आप भी काम करते हुए या जल्दबाजी में खाना खाते हैं तो अब आपको जरूरत है माइंडफुल ईटिंग की तरफ स्विच करने की. आपकी ये आदत आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेगी और जो बदलाव आपको देखने को मिलेंगे वो हैरान कर देंगे.

द‍िल्‍ली की लड़की ने खुद पर ही क‍िया 30 दिन का एक्‍सपेर‍िमेंट, बदली खाने की एक आदत, सुधर गई सेहत
जल्दबाजी में खाना आपकी सेहत को पहुंचा रहा है खतरा. ( Image Unsplash)

बढ़ता हुआ वजन न सिर्फ आपके लुक को खराब कर देता है बल्कि मोटापा आपको कई बीमारियों की चपेट में भी ला सकता है. यही वजह है कि लोग खुद को फिट रखने और वेट लॉस के लिए अलग-अलग तरह के तरीके अपनाते हैं. ऐसा ही कुछ किया दिल्ली में रहने वाली हर्षिता ने, उनका वजन ज्यादा था. जिस पर उन्होंने काम करना शुरू किया और वेट लॉस के लिए जिम जाना और डाइट लेनी स्टार्ट की. 

लेकिन इसके बावजूद भी उनका वेट लॉस उस तरीके से नहीं हो रहा था जितना वो मेहनत कर रही थीं. जिसकी वजह जानने के लिए हर्षिता ने कई तरह की रिसर्च तलाशी जिसमें वजन ना घटने के कारण बताए गए. इसी बीच उनकी नजर पड़ी माइंडफुल ईटिंग पर. मतलब खाना खाने की आदत पर. तब उनको ये समझ आया कि वजन कम ना होने की वजह असल में उनका खाना खाने का तरीका था.

दरअसल वो खाना बहुत ही जल्दी-जल्दी खाती थीं. उनका फोकस खाने को जल्दी से खत्म कर के अपने दूसरे कामों को निपटाने पर ज्यादा होता था. 

क्या है माइंडफुल ईटिंग

आप क्या खा रहे हैं, कब खा रहे हैं और कैसे खा रहे हैं ये सभी चीजें आपकी सेहत के लिए बेहद जरूरी होती है. माइंडफुल इटिंग को लेकर भी कई रिसर्च में बताया गया है कि हम क्या खा रहे हैं, उससे जितना फर्क पड़ता है, उतना ही फर्क इस बात से भी पड़ता है कि हम कैसे खा रहे हैं.

माइंडफुल ईटिंग का मुख्य फोकस वेट लॉस नहीं होता है, बल्कि इसके साथ ही इसमें भूख के संकेतों को समझने, पेट भरने का एहसास होने और बिना भूख और जरूरत के खाने की आदत को कम करने पर होता है. 

माइंडफुल ईटिंग को लेकर नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में भी एक रिसर्च पब्लिश की गई है. 

माइंडफुलनेस एक ऐसा शब्द है जो हमारी रोजमर्रा की भाषा में रच-बस गया है, लेकिन इसका अर्थ हमारे व्यस्त, बहु-कार्यकारी और सामाजिक परिवेश में इसके उपयोग से कहीं ज्यादा गहरा है. ये शब्द इसलिए लोकप्रिय हुआ है क्योंकि यह किसी भी विषय पर सचेत रूप से ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है. यह किसी व्यक्ति को अपना ख्याल रखने के लिए प्रोत्साहित करने का एक तरीका बन गया है. इसी प्रकार, "माइंडफुल ईटिंग" हमें अपने खाने के अनुभवों के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित करता है.

pmc.ncbi.nlm.nih.gov

ये सब जानने के बाद हर्षिता ने बताया 30 दिनों तक सिर्फ माइंडफुल ईटिंग पर ही ध्यान दिया. हर्षिता ने बताया कि. 

यही वजह थी कि मैंने 30 दिनों तक सिर्फ एक ही रूल फॉलो किया. मैनें हर खाने की बाइट को धीरे-धीरे खाना शुरू किया. मुझे लगा था कि शायद वजन कम होगा, लेकिन इसके अलावा जो चेंज उनको दिखा वो वेट लॉस से कहीं ज्यादा जरूरी था.

जल्दी खाने की आदत 

हर्षिता ने बताया कि पहले उनकी आदत थी कि वो 10 मिनट से भी कम समय में खाना खत्म कर देती थीं. वो मोबाइल देखते हुए या फिर किसी काम के बीच में जल्दबाजी में खाने को खत्म कर देती थी. खाना उनके लिए एक काम होता था जिसको जल्दी से खत्म करना था. 

कई बार ऐसा भी हुआ कि खाना खाने के बाद भी उनका मन कुछ स्नैक्स खाने का करता था. इसकी वजह थी जल्दबाजी में खाया गया खाना. क्योंकि उनके दिमाग को यह फील ही नहीं हो पाता था कि पेट भर चुका है.

जल्दी खाने की आदत, ईटिंग फ्रिक्वेंसी और खाने का क्वालिटी आपके मोटापे, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और इसके बीच के रिलेशन को लेकर के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में ही पब्लिश एक और रिसर्च पब्लिश की गई थी. जिसमें बताया गया कि कैसे जल्दी खाना आपको बीमारियों की चपेट में ला सकता है.

जल्दी-जल्दी खाना खाने के नुकसान

1. दिमाग और पेट के बीच बैलेंस बिगड़ना

जब हम तेजी से खाना खाते हैं तो हमारा दिमाग और पेट तुरंत एक-दूसरे को मैसेज नहीं भेज पाते हैं. पेट भर गया है इसका संकेत दिमाग तक पहुंचने में आमतौर पर लगभग 20 मिनट का समय लगता है. वहीं इस दौरान कुछ हार्मोन शरीर को संकेत देते हैं कि अब पेट भर चुका है. वहीं जब आप बहुत तेजी से खाना खाते हैं तो ये संकेत मिलने से पहले ही जरूरत से ज्यादा खा सकते हैं.

2. डाइजेशन से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं

जब आप जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो अक्सर खाने के साथ ज्यादा हवा भी निगल लेते हैं. इससे पेट फूलना, गैस बनना और पेट में डिसकंफर्ट फील हो सकता है. वहीं जब आप खाने को अच्छी तरह से चबाकर खाते हैं तो उनको पचाने में पेट को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है. 

3. वेट गेन का खतरा

जल्दी खाना खाने की वजह से अक्सर लोग ज्यादा खाना खा लेते हैं और ज्यादा कैलोरी का सेवन करते हैं. इसकी वदह है पेट भरने का एहसास ना हो पाना. जिस वजह से वजन बढ़ सकता है. कई स्टडीज में पाया गया है कि जल्दी-जल्दी खाने की वजह से मोटापे की समस्या बढ़ जाती है. इसके साथ ही हाई बीपी, पेट के पास चर्बी बढ़ना, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर का बढ़ना और टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्या भी हो सकती है. 

4. पोषक तत्व नहीं मिलते

जब जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो उसके पोषण भी हमको सही से नहीं मिल पाते हैं. वहीं जब हम खाने को अच्छी तरह से चबाकर खाते हैं तो ये लार के साथ मिलकर पाचन एंजाइम्स की मदद से टूटते हैं और शरीर को पोषण मिलता है.

5. खाना फंसने का खतरा

वहीं जल्दी खाना खाने में आपकी बाइट भी बड़ी होती हैं. ऐसे में खाना गले में फंसने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बच्चे और बड़ों के साथ ये समस्या ज्यादा हो सकती है.

खाना जल्दी खाने की वजह से होने वाले नुकसान के बारे में कई रिसर्च भी की गई हैं. जिसमें जल्दी खाना खाना आपकी सेहत पर किस तरह से असर डालता है इस पर विस्तार से चर्चा की गई है. 

30 दिनों तक किया प्रयास 

इसके बाद हर्षिता ने 30 दिनों तक अपने खाने की आदत पर ध्यान दिया. उन्होंने हर एक बाइट को अच्छी तरह से चबा-चबा कर खाया. इसके साथ ही उन्होंने खाने के स्वाद पर भी ध्यान दिया और बीच-बीच में रूक कर इस बात पर ध्यान दिया कि भूख कितनी बची है.

हालांकि शुरुआत में उन्हें ये बात काफी अजीब लगी. हर बार वो घड़ी देखती थीं और इतना ज्यादा टाइम लगना उनको काफी भारी और बोरिंग लगता था. लेकिन इस आदत को अपनाने के बाद ही 1 हफ्ते में उनको अपनी बॉडी में बदलाव महसूस होने लगे.

माइंडफुल ईटिंग करने के बाद दिखे ये बदलाव

  1. सबसे पहले हर्षिता ने पाया कि उनके खाने की क्वांटिटी कम हो रही थी. बस उनको समझ आ जाता था कि उनका पेट भर गया है. दरअसल, जब हम तेजी से खाना खाते हैं तो शरीर को पेट भरने का संकेत मिलने का समय नहीं मिल पाता है.
  2. इसके बाद दूसरा चेंज जो उनको देखने को मिला था वो था खाने के बाद पेट का भारी होना कम होने लगा. हर्षिता को दोपहर का खाना खाने के बाद आलस और सुस्ती फील होती थी, लेकिन जब से उन्होंने धीरे-धीरे खाना स्टार्ट किया तो शरीर हल्का फील होने लगा था. 
  3. इसके बाद था तीसरा बदलाव जो कि मानसिक था. हर्षिता ने बताया कि कई बार मैं भूख ना लगे होने के बाद ही स्ट्रेस होने, बोरियत होने पर भी खाना खाती थी. लेकिन जब से खाने की आदत बदली है तो इस तरह की फूड क्रेविंग्स कम होने लगीं. 

30 दिनों बाद हर्षिता को एहसास हुआ कि अब ना सिर्फ उनका वजन कम हुआ था, बल्कि वो पहले से फिट भी फील कर रही थीं. हर्षिता ने बताया कि...

अब मैं अपनी बॉडी के दिए गए सिग्नल्स को बेहतर तरीके से समझने लगी थी. बिना किसी डाइटिंग के वेट लॉस और ओवरईटिंग कम हो गई थी.

संदर्भ 

pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5556586/#B2

pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8156274/

www.nm.org/healthbeat/healthy-tips/nutrition/quick-dose-is-eating-too-fast-unhealthy

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