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अलर्ट! आंखों की रोशनी कम कर सकता है सड़क किनारे मिलने वाला चश्मा!

Cheap Sunglasses Side Effects: सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते और बिना UV प्रोटेक्शन वाले काले चश्मे आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. ऐसे चश्मे कई बार नंगी आंखों से धूप में निकलने से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

अलर्ट! आंखों की रोशनी कम कर सकता है सड़क किनारे मिलने वाला चश्मा!
सस्ते सनग्लासेस आंखों को पहुंचा सकते हैं बड़ा नुकसान, डॉक्टर भी देते हैं इससे बचने की सलाह

Cheap Sunglasses Side Effects: गर्मी शुरू होते ही बाजार में 100-200 रुपये वाले काले चश्मों की भरमार दिखने लगती है. लोग इन्हें फैशन, स्टाइल और धूप से बचने के लिए खरीद लेते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हर डार्क रंग का चश्मा आंखों को सुरक्षित नहीं बनाता. कई सस्ते और सबस्टैंडर्ड सनग्लासेस सिर्फ रोशनी कम करते हैं, लेकिन खतरनाक UV किरणों को नहीं रोक पाते. यही वजह है कि आंखों के डॉक्टर हमेशा UV400 प्रोटेक्शन वाले चश्मे इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत चश्मा कई बार आंखों को नंगी आंखों से धूप में रहने से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.

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सस्ते गॉगल्स खतरनाक क्यों हो सकते हैं? | Why Can Cheap Sunglasses Be Dangerous?

जब कोई व्यक्ति डार्क रंग का चश्मा पहनता है, तो आंखों को लगता है कि आसपास रोशनी कम हो गई है. ऐसे में आंखों की पुतलियां ज्यादा खुल जाती हैं. इस प्रोसेस को साइंस की भाषा में “माइड्रिएसिस” कहा जाता है. समस्या तब होती है जब चश्मे में सही UV फिल्टर मौजूद नहीं होता. ऐसे में हानिकारक UV-A और UV-B किरणें आंखों के अंदर ज्यादा गहराई तक पहुंच सकती हैं. लंबे समय तक ऐसा होने पर आंखों के लेंस और रेटिना पर बुरा असर पड़ सकता है.

आंखों को कैसे नुकसान पहुंचा सकती हैं UV किरणें? (How Can UV Rays Damage Your Eyes?)

लगातार ज्यादा UV एक्सपोजर आंखों में कई तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है. इनमें मोतियाबिंद, रेटिना डैमेज और मैक्युलर डिजनरेशन जैसी दिक्कतें शामिल हैं. कुछ मामलों में रेटिना को हुआ नुकसान स्थायी भी हो सकता है. यही वजह है कि सिर्फ डार्क ग्लास पहन लेना सुरक्षित नहीं माना जाता. असली सुरक्षा तभी मिलती है जब चश्मा UV400 प्रोटेक्शन देता हो.

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क्या है UV400 प्रोटेक्शन? (Why is UV400 Protection Important?)

UV400 प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस UVA और UVB दोनों तरह की किरणों को ब्लॉक करने के लिए बनाए जाते हैं. ये ग्लासेस हानिकारक UV किरणों को रोकते हैं, जिससे ये किरणें रेटिना और आंखों के लेंस को नुकसान नहीं पहुंचा पातीं. यही कारण है कि धूप में बाहर निकलते समय ऐसा चश्मा आंखों को बेहतर सुरक्षा दे सकता है. अगर किसी चश्मे पर सिर्फ “फैशन ग्लास” लिखा हो और उसमें UV प्रोटेक्शन की जानकारी न दी गई हो, तो उसे सिर्फ स्टाइल के लिए माना जाता है, सुरक्षा के लिए नहीं. इसलिए सनग्लास खरीदते वक्त सिर्फ डिजाइन या ब्रांड नहीं, बल्कि UV400 लेबल जरूर चेक करना चाहिए. बहुत सस्ते और बिना सर्टिफिकेशन वाले चश्मों से बचना ही बेहतर है.

धूप से आंखों को बचाना जरूरी है, लेकिन गलत चश्मा पहनकर सुरक्षा का भ्रम पालना और भी खतरनाक हो सकता है. इसलिए अगली बार काला चश्मा खरीदते वक्त सिर्फ उसका लुक नहीं, बल्कि उसकी असली प्रोटेक्शन भी जरूर जांच लें.

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