जब भी सर्दी या जुकाम होता है तो हम खूब छींकने लगते हैं. अक्सर लोग इससे परेशान हो जाते हैं और सोचते हैं कि किसी तरह ये बंद हो जाए. इसके अलावा कई बार हमें बिना जुकाम के ही छींक आती है, लेकिन कुछ लोग इसे रोकने की कोशिश करते हैं. वैसे तो ये एक आम चीज है, जो हर इंसान को कभी न कभी होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही छींक आपके लिए खतरनाक भी हो सकती है? आज हम आपको यही बताएंगे कि छींक क्यों आती है और जब ये आए तो कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए.
हमें छींक क्यों आती है?
नाक का काम हवा को हमारे लंग्स तक पहुंचाना होता है. नाक हवा में मौजूद जहरीले और धूल के कणों को लंग्स तक पहुंचने से रोकती है. जब कोई ऐसा कण नाक में आता है तो शरीर जोर से उसे छींक के तौर पर बाहर फेंकने की कोशिश करता है. यही वजह है कि हमें छींक आने लगती है. इसे स्नीजिंग या स्टरन्यूटेशन भी कहा जाता है.
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छींकते हुए रुक जाती है धड़कन?
आपने कई बार ऐसा पढ़ा या सुना होगा कि छींकते हुए कुछ देर के लिए हार्ट काम करना बंद कर देता है, इसीलिए ये काफी खतरनाक हो सकता है. हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट में बताया गया है कि छींकते हुए आपकी दिल की धड़कन नहीं रुकती है, ये थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन इससे उतना खतरा नहीं होता है. छींकने के एक या दो सेकेंड बाद हार्ट फिर से उसी रफ्तार से काम करने लगता है.
छींकने से पहले लोग गहरी सांस लेते हैं और इससे चेस्ट में काफी दबाव बनता है, ऐसा होने से दिल की तरफ फ्लो होने वाला ब्लड थोड़ा धीमा हो जाता है और ब्लड प्रेशर भी कुछ देर के लिए गिरता है. साथ ही दिल के धड़कने की रफ्तार भी बढ़ जाती है. वहीं जब छींक पूरी हो जाती है तो इसका ठीक उल्टा होता है. यानी बीपी बढ़ जाता है और ब्लड फ्लो भी तेज हो जाता है.
छींक रोकना हो सकता है खतरनाक
जब भी छींक आती है तो इसे रोकना नहीं चाहिए, छींक रोकना या इस दौरान नाक बंद कर देना खतरनाक हो सकता है. कुछ मामलों में ये बेहोशी या फिर लंग डैमेज का कारण बन सकता है. छींकते हुए जो हवा बाहर निकलती है उसकी स्पीड 150 किमी प्रति घंटा से ज्यादा होती है. ऐसे में इसे बाहर निकलने से रोकना आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है. कई बार ये ब्रेन हैमरेज, सांस की नली फटने और साइनस की वजह भी बन सकता है.
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