दुनिया तेजी से बदल रही है। क्लाइमेट चेंज का असर हर ओर दिख रहा है। मौसम के बदलने से दुनिया की कई जगहों पर बहुत बड़े बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में कई चीजें ऐसी हैं जो शायद कुछ सालों में गायब हो जाएंगीं। आइए ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में बताते हैं जो शायद कुछ वर्षों के बाद हमारी दुनिया का हिस्सा न हों...
आल्प्स: यूरोप की यह खूबसूरत पर्वत श्रृंखला 90 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों के गानों की पसंदीदा लोकेशन थी। दुनिया के ज्यादातर लोगों को फेवरिट स्की डेस्टिनेशनल कम ऊंचाई पर स्थित है। इसका मतलब है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण यहां की बर्फ दूसरे पहाड़ों से पहले पिघल जाएगी। आल्प्स के हिमनदों के 2050 तक गायब हो जाने की आशंका है।
मृत सागर: वैसे तो इसका नाम ही मृत सागर है लेकिन इस नमक से परिपूर्ण सागर के संसाधनों का इतनी तेजी से दोहन हो रहा है कि यह कुछ दिनों में सच में ही मर जाएगा। यह दुनिया की सबसे निचली जगहों में से एक है और इसके पानी में समुद्र से 10 गुना ज्यादा नमक है। यह कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स में इस्तेमाल किए जाने वाले कई खनिजों का स्रोत है। यह सागर अपनी आकार का एक तिहाई ही रह गया है और जल्द ही गायब हो जाएगा।
ग्लेशियर नेशनल पार्क: अमेरिका के इस नेशनल पार्क में कभी वहां के मूल निवासी रहा करते थे। इसमें 130 से अधिक झील, 1000 से अधिक पौधों की प्रजातियां और सैंकड़ों जानवरों की प्रजातियां हैं। कभी इस पार्क में 150 हिमनद थे जो 2005 में घटकर 27 रह गए थे। इनके भी 2030 तक गायब हो जाने की आशंका है। ग्लेशियरों के पिघलने के साथ ही कभी "महाद्वीपीय इकोसिस्टम का मुकुट" कहलाने वाले पार्क गुम न हो जाए।
ग्रेट बैरियर रीफ: अंतरिक्ष से दिखने वाले दुनिया के कुछ ही चीजों में शामिल ग्रेट बैरियर रीफ इतनी सिकुड़ गई है कि शायद यह धरती पर ही दिखाई दे। यह दुनिया का सबसे बड़ा कोरल रीफ सिस्टम है और जीवित चीजों से बनी विश्व की सबसे बड़ी आकृति है। क्लाइमेट चेंज, जल प्रदूषण और शिपिंग दुर्घटनाएं इसे समाप्त कर सकती हैं।
मेडागास्कर: हम सभी को 2005 में आई मेडागास्कर फिल्म के लेमूर याद हैं। इस द्वीप पर लेमूर की 20 से अधिक प्रजातियां हैं, लेकिन ये लुप्त होने के खतरे में हैं। दुनिया के चौथे सबसे बड़े द्वीप के जंगल के अगले 35 सालों में गायब हो जाने की आशंका है। फिर यहां लेमूर भी नहीं मिलेंगे।
मालदीव: 2004 की सुनामी में मालदीव बुरी से प्रभावित हुआ था। इसके 1000 में से 9 छोड़कर सभी पानी में डूब गए थे। यह दुनिया के सबसे नीचे स्थित देशों में से है और समुद्र का स्तर बढ़ा तो डूबने वालों में सबसे पहला होगा।
ओलंपिया: रियो में ओलिंपिक की तैयारियां चल रही हैं लेकिन यूनान का ओलंपिया शहर जहां 776 ईसा पूर्व में पहला ओलंपिक हुआ था दुनिया पर पहचान बचाए रखने की जद्दोजदह में लगा है। गर्मियों में बढ़ते तापमान के कारण यहां जंगलों में आग लग रही है जिससे इसकी प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर खत्म होती जा रही है।
पैटागोनिया: दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर पर बसा पैटागोनिया अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। अनछुई खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध इस जगह पर भी क्लाइमेट चेंज का असर दिख रहा है। इसके ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। यहां के पौधे और पशु इस बदलते परिवेश में बचे रहने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
(फोटो: टॉम ब्रेकफील्ड)
सुंदरबन: यूनेस्को की धरोहरों में से एक सुंदरबन अपने मैनग्रोन जंगलों और रॉयल बंगाल बाघों के लिए जाना जाते हैं, जो लुप्त होने की स्थिति में है। इसके अलावा खारे पानी के घड़ियाल, ओलिव रिडली कछुए, गंगा डॉल्फिन और मैनग्रोव हॉर्शशू क्रैब जैसे पशु भी गायब हो रहे हैं। समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण इसके कई हिस्से डूब चुके हैं। इस क्षेत्र के 10000 लोग अब पर्यावरण शरणार्थी हैं। जल्द ही यह पूरा इलाका पानी के नीचे चला जाएगा।
वेनिस: गोंडोला में सवारी करते हनीमूनर्स का छवि वाला यह शहर गायब हो रहा है। नहरों का यह शहर हाल में ही कई बाढ़ देख चुका है और यहां पानी का स्तर 131 सीएम बढ़ चुका है।









सुंदरबन: यूनेस्को की धरोहरों में से एक सुंदरबन अपने मैनग्रोन जंगलों और रॉयल बंगाल बाघों के लिए जाना जाते हैं, जो लुप्त होने की स्थिति में है। इसके अलावा खारे पानी के घड़ियाल, ओलिव रिडली कछुए, गंगा डॉल्फिन और मैनग्रोव हॉर्शशू क्रैब जैसे पशु भी गायब हो रहे हैं। समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण इसके कई हिस्से डूब चुके हैं। इस क्षेत्र के 10000 लोग अब पर्यावरण शरणार्थी हैं। जल्द ही यह पूरा इलाका पानी के नीचे चला जाएगा।

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