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UPSC में पास, लेकिन LBSNAA में फेल...ऐसे IAS-IPS अफसरों का क्या होता है?

LBSNAA Training: UPSC पास करना ही IAS बनने की आखिरी मंजिल नहीं है. LBSNAA की ट्रेनिंग में भी कई ट्रेनी फेल हो जाते हैं, लेकिन क्या इससे नौकरी चली जाती है. इसके बाद उनका क्या होता है.

UPSC में पास, लेकिन LBSNAA में फेल...ऐसे IAS-IPS अफसरों का क्या होता है?
ट्रेनिंग में फेल होने वाले IAS-IPS अधिकारियों का क्या होता है?

LBSNAA Training: देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) को टॉप रैंक के साथ पास करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अफसर बन ही गए. रिजल्ट लिस्ट में नाम आने के बाद असली परीक्षा मसूरी में बने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में शुरू होती है. यहां की ट्रेनिंग इतनी सख्त और चैलेंजिंग होती है कि देश के सबसे तेज दिमाग वाले कई ट्रेनी IAS अफसर (प्रोबेशनर्स) भी यहां होने वाले एग्जाम में फेल हो जाते हैं और उनकी बैक लग जाती है.

एक RTI रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले 5 सालों में 24 IAS प्रोबेशनर्स LBSNAA में एक या उससे ज्यादा परीक्षाओं में फेल हुए. हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 14 मामले तो सिर्फ दो सालों 2025 और 2026 में ही सामने आए हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर LBSNAA में ऐसा क्या होता है, इन अफसरों की बैक किस विषय में लगती है और फेल होने पर इन अफसरों का क्या होता है. आइए जानते हैं हर सवाल का जवाब.

सबसे ज्यादा बैक किस पेपर में लगती है?

हर साल करीब 5 से 6 लाख लोग यूपीएससी का फॉर्म भरते हैं, जिनमें से सिर्फ 182 से 184 कैंडिडेट्स ही IAS के लिए चुने जाते हैं. जब ये टॉपर LBSNAA पहुंचते हैं, तो इन्हें कानून, भारतीय अर्थव्यवस्था, संविधान, लोक प्रशासन (Public Administration) और मैनेजमेंट जैसे विषयों की परीक्षा देनी होती है, जहां पास होने के लिए कम से कम 50% नंबर लाना जरूरी है. लेकिन हाल ही में पास आउट हुए अफसरों के मुताबिक, सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें 'लोकल लैंग्वेज टेस्ट' में आते हैं.

लोकल लैंग्वेज का चक्कर क्या है?

जब किसी कैंडिडेट को उसका कैडर अलॉट होता है, तो उसे उस राज्य की लोकल लैंग्वेज यानी स्थानीय भाषा सीखनी और उसकी परीक्षा पास करनी अनिवार्य होती है. जैसे, उत्तर भारत के किसी अफसर को अगर तेलंगाना कैडर मिला, तो उसे तेलुगू सीखनी होगी. 2023 बैच के एक IAS अफसर अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए बताते हैं कि 'चूंकि मुझे तेलंगाना कैडर मिला था, इसलिए मुझे तेलुगू की परीक्षा देनी पड़ी. पहले अटेम्प्ट में मुझे 20 में से सिर्फ 3 नंबर मिले थे. हालांकि, बाद में मैंने री-टेस्ट देकर इसे पास कर लिया.' ज्यादातर प्रोबेशनर्स इसी भाषा के पेपर में अटकते हैं.

फेल होने वाले अफसरों का क्या होता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि, जो अफसर यहां फेल हो जाते हैं, क्या उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है. इस एग्जाम में फेल होने वाले किसी भी ट्रेनी को नौकरी से नहीं निकाला जाता है. अकादमी के नियमों के मुताबिक, इन परीक्षाओं को पास करने के लिए प्रयासों (Attempts) की कोई तय लिमिट नहीं है. बस शर्त इतनी है कि सर्विस जॉइन करने के 4 साल के अंदर अफसर को अपने सारे बैकलॉग और पेपर क्लियर करने होते हैं. जो लोग फेल होते हैं, उनके लिए एक हफ्ते के अंदर ही री-एग्जाम कराया जाता है, जिसे वे आसानी से पास कर लेते हैं.

क्या इन नंबरों का कोई फायदा नहीं होता?

इससे बहुत बड़ा फायदा होता है. LBSNAA के डिप्टी डायरेक्टर गौतम थपलियाल के मुताबिक, भले ही फेल होने पर किसी को नौकरी से न निकाला जाए, लेकिन अकादमी की परीक्षाओं में मिलने वाले मार्क्स ही आपकी सीनियरिटी (Seniority) तय करते हैं. बैच में कौन सीनियर रहेगा और किसका प्रमोशन पहले होगा, यह इन नंबरों से तय होता है. राहत की बात यह है कि 2018 से 2026 के बीच LBSNAA में आईएएस प्रोबेशनर्स का कुल पास प्रतिशत 100% रहा है.

पिछले 2 सालों में 14 अफसरों पर क्यों गिरी गाज?

आरटीआई से यह भी पता चला कि परीक्षाओं में फेल होने के अलावा, पिछले कुछ समय में 14 IAS प्रोबेशनर्स के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की गई है. इनमें से 6 मामले 2022 बैच के थे, जबकि 2025 बैच में यह संख्या बढ़कर 8 हो गई. अकादमी अब अनुशासन को लेकर पहले से कहीं ज्यादा कड़क हो गई है.

इन अफसरों पर कार्रवाई के मुख्य कारण क्लास या ट्रेनिंग में कम अटेंडेंस होना, सुबह के फिजिकल ट्रेनिंग (PT) सेशन में शामिल न होना या देरी से आना, क्लासरूम के अंदर मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल करना और ड्रेस कोड का पालन न करना है. अकादमी का साफ मानना है कि देश का नेतृत्व करने वाले इन भावी सिविल सेवकों में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना कूट-कूट कर भरी होनी चाहिए, इसलिए छोटी सी गलती पर भी नंबर काट लिए जाते हैं या मेमो थमा दिया जाता है.

LBSNAA में कैसी होती है एक IAS की जिंदगी

LBSNAA में दो साल की अनिवार्य ट्रेनिंग बेहद रोमांचक और थका देने वाली होती है. यहां IAS, IPS, IFS और IRS सभी सर्विसेज के अफसर एक साथ एडमिनिस्ट्रेशन की बेसिक पढ़ाई करते हैं. इसके बाद बाकी सर्विसेज के अफसर अपनी-अपनी अकादमियों जैसे IPS हैदराबाद चले जाते हैं और सिर्फ IAS यहां रुकते हैं. अफसरों को देश की विविधता और जमीनी हकीकत समझाने के लिए 'भारत दर्शन' पर भेजा जाता है, साथ ही मानसिक मजबूती के लिए कठिन हिमालयन ट्रेकिंग कराई जाती है.

इन्हें फील्ड में SDM के तौर पर काम सीखने के लिए 1 साल के लिए जिलों में तैनात किया जाता है, जहां ये फाइलों को निपटाना और जनता की समस्याएं सुलझाना सीखते हैं. सुबह 6 बजे पीटी, योगा या घुड़सवारी से दिन शुरू होता है. फिर शाम तक क्लासेस और रात में फॉर्मल डिनर होता है, जहां डाइनिंग एटिकेट्स सिखाए जाते हैं.

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