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UPSC के बाद LBSNAA में क्या-क्या होता है? फाउंडेशन कोर्स, ट्रेनिंग प्रोसेस और स्टाइपेंड की हर जानकारी

UPSC में चयन के बाद उम्मीदवार मसूरी की LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स से ट्रेनिंग शुरू करते हैं. यहीं से बड़े सरकारी अफसर बनने की असली शुरुआत होती है.

UPSC के बाद LBSNAA में क्या-क्या होता है? फाउंडेशन कोर्स, ट्रेनिंग प्रोसेस और स्टाइपेंड की हर जानकारी
UPSC Result 2025: रिजल्ट के बाद कैसे होती है ट्रेनिंग

UPSC क्लियर करना बड़ी जीत जरूर है, मगर असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है. सालों की मेहनत और तैयारी के बाद जब सिलेक्शन होता है, तभी जिंदगी एक नए और जिम्मेदार मोड़ पर पहुंचती है. किताबों और एग्जाम हॉल से बाहर निकलकर अब सिस्टम को समझने और जमीन पर काम सीखने की बारी आती है. सभी चुने गए उम्मीदवारों को उत्तराखंड के मसूरी में स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन भेजा जाता है. यहीं देश के बड़े सरकारी अफसर तैयार किए जाते हैं. पहाड़ों की खूबसूरती के बीच शुरू होने वाली ये ट्रेनिंग जितनी शानदार दिखती है, उतनी ही अनुशासन और मेहनत से भरी होती है.

क्या होता है फाउंडेशन कोर्स

UPSC यानी देश की सबसे बड़ी सरकारी भर्ती परीक्षा पास करने के बाद ट्रेनिंग का पहला चरण फाउंडेशन कोर्स होता है. ये एक कॉमन ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसमें अलग अलग सरकारी सेवाओं में चुने गए अधिकारी साथ ट्रेनिंग लेते हैं. जैसे इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस, इंडियन पुलिस सर्विस और इंडियन फॉरेन सर्विस. इस कोर्स का मकसद नए अधिकारियों को सरकारी कामकाज की बेसिक समझ देना होता है. साथ ही अलग अलग विभागों के बीच तालमेल भी सिखाया जाता है. क्लास में संविधान, प्रशासन, गवर्नेंस, पॉलिसी और देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे के बारे में पढ़ाया जाता है. यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं होती, फिजिकल ट्रेनिंग, खेलकूद, ट्रेकिंग, कल्चरल प्रोग्राम और गांवों के दौरे भी कराए जाते हैं, ताकि अफसर जमीन की सच्चाई को करीब से समझ सकें.

कितने दिन चलता है फाउंडेशन कोर्स

फाउंडेशन कोर्स करीब 15 हफ्ते चलता है, यानी लगभग 3 से 4 महीने की ट्रेनिंग. इसके बाद सभी अधिकारी अपनी अपनी सेवा के हिसाब से अलग ट्रेनिंग के लिए चले जाते हैं. एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस के अधिकारी आगे की ट्रेनिंग के लिए LBSNAA में ही रहते हैं. पुलिस सर्विस के अधिकारियों को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी भेजा जाता है. फॉरेन सर्विसेस के अधिकारियों की ट्रेनिंग विदेश सेवा संस्थान में होती है.

ट्रेनिंग कौन देता है

ट्रेनिंग LBSNAA के एक्सपीरियंस्ड टीचर्स और सीनियर अफसर देते हैं. अलग अलग फील्ड के एक्सपर्ट भी पढ़ाने आते हैं. ट्रेनिंग सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहती. फील्ड विजिट, ग्रुप प्रोजेक्ट और आउटडोर एक्टिविटीज भी होती हैं.

ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड कितना मिलता है

ट्रेनिंग के दौरान ट्रेनी अधिकारियों को सरकार की तरफ से स्टाइपेंड भी मिलता है. ये सैलरी 7वें वेतन आयोग के हिसाब से दी जाती है. 7वें वेतन आयोग के हिसाब से शुरुआती रकम करीब 56 हजार रुपए के आसपास होती है. इसमें से हॉस्टल, खाने और दूसरी सुविधाओं का खर्च कट जाता है. सारी कटौतियों के बाद हाथ में लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक मिलते हैं. यानी ट्रेनिंग के समय भी अफसरों को अच्छी खासी रकम मिलती रहती है.

पूरी ट्रेनिंग कितने समय की होती है

फाउंडेशन कोर्स सिर्फ शुरुआत है. खासकर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस के अधिकारियों की पूरी ट्रेनिंग करीब दो साल चलती है. इसमें फाउंडेशन कोर्स, प्रोफेशनल ट्रेनिंग, भारत दर्शन, जिला प्रशिक्षण और आखिरी फेज शामिल होते हैं. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अधिकारी अपने राज्य कैडर में जाते हैं. फिर ये वो अफसर बनते हैं जो प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारियां संभालते हैं.

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