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राजस्थान की सबसे बड़ी चपरासी भर्ती में क्यों फंसा पेंच? अभ्यर्थियों ने बताया वेटिंग रूल क्यों जरूरी

Rajasthan One Year Waiting Rule: राजस्थान में सरकार की तरफ से ऐलान किया गया था कि वो भर्तियों में वेटिंग रूल लेकर आएगी, लेकिन चपरासी भर्ती में इसे लागू नहीं किया गया है. ऐसे में अभ्यर्थी इस बड़ी भर्ती में एक साल का वेटिंग नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं.

राजस्थान की सबसे बड़ी चपरासी भर्ती में क्यों फंसा पेंच? अभ्यर्थियों ने बताया वेटिंग रूल क्यों जरूरी
राजस्थान में वन ईयर वेटिंग रूल लागू करने की मांग

राजस्थान की सबसे बड़ी चतुर्थ श्रेणी भर्ती अब वेटिंग लिस्ट को लेकर विवादों में है. अंतिम चयन सूची से एक-दो नंबर या आधे अंक से बाहर रह गए अभ्यर्थी सरकार से एक साल का वेटिंग नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार ने बजट 2026 में वादा किया था कि सरकारी नौकरियों में एक साल तक वेटिंग लिस्ट लागू रहेगी, लेकिन सबसे बड़ी भर्ती में ही यह नियम लागू नहीं किया जा रहा. अभ्यर्थियों का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी भर्ती में बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार चयनित हुए हैं जो पहले से शिक्षक, एलडीसी, प्राध्यापक, वाहन चालक और दूसरी भर्तियों की तैयारी कर रहे हैं या उनमें चयनित हो चुके हैं. ऐसे में उनके चपरासी की नौकरी छोड़ने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो हजारों पद खाली रह जाएंगे लेकिन सरकार वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति देने के बजाय नई भर्ती निकालेगी.

सीएम ने किया था ऐलान 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि राज्य सरकार ने सरकारी भर्तियों में एक साल की वेटिंग व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. हालांकि इन अभ्यर्थियों का कहना है कि चपरासी भर्ती में यह कहकर वेटिंग लिस्ट लागू नहीं की जा रही कि भर्ती प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी इसलिए नया नियम इस पर लागू नहीं होगा. 

जबकि इन युवाओं की मांग है कि अगर चयनित उम्मीदवार नौकरी नहीं करते या बीच में नौकरी छोड़ देते हैं तो खाली पदों पर वेटिंग लिस्ट से ही नियुक्ति दी जाए. उनका कहना है कि इससे सरकार को नई भर्ती निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रहे हजारों युवाओं को राहत मिलेगी.

अभ्यर्थियों ने क्या कहा?

धौलपुर के रामपाल प्रजापति की उम्र 40 साल ने बताया कि वे अंतिम चयन सूची से सिर्फ आधे नंबर से बाहर रह गए. उनका कहना है कि सितंबर में वे ओवरएज हो जाएंगे. उनकी बेटी बीएसटीसी कर रही है और बेटा 12वीं में पढ़ता है. रामपाल का कहना है कि सरकार ने जब वेटिंग लिस्ट लागू करने का फैसला किया है तो इस भर्ती में भी इसे लागू करना चाहिए ताकि उनके जैसे अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सके. 

भरतपुर के गौरव सिंह ने 2015 में पॉलिटेक्निक की पढ़ाई पूरी की थी. उनकी हार्ट सर्जरी भी हो चुकी है. इसके बावजूद उन्होंने लगातार सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखी. लेकिन अंतिम मेरिट में जगह नहीं बना सके. उनका कहना है कि अगर वेटिंग लिस्ट लागू हो जाए तो उनके जैसे हजारों युवाओं को नौकरी मिल सकती है. इसी तरह शिवप्रकाश शर्मा भी अंतिम चयन सूची से सिर्फ एक नंबर से बाहर रह गए. उनका कहना है कि थोड़े से अंतर की वजह से उनका सपना अधूरा रह गया है.

अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती में चयनित कई उम्मीदवार दूसरी नौकरियों में चले जाएंगे. उनका कहना है कि इससे 25 से 30 हजार पद तक खाली रह सकते हैं. उनका आरोप है कि सरकार बाद में इन्हीं पदों के लिए नई भर्ती निकालकर उसे रोजगार देने की उपलब्धि बताएगी, जबकि पहले से इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को मौका नहीं मिलेगा. 

बेरोजगारों में बढ़ रही नाराजगी

अभ्यर्थियों ने सचिवालय का उदाहरण भी दिया. उनका कहना है कि वहां करीब 550 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को जॉइन करना था, लेकिन केवल करीब 150 ने ही जॉइन किया, जबकि बाकी चयनित अभ्यर्थी लंबी छुट्टी पर चले गए या दूसरी नौकरियों की ओर बढ़ गए. राजस्थान में लगातार सरकारी भर्तियों की घोषणाएं हो रही हैं, लेकिन नियुक्तियों में देरी और नियमों को लेकर विवाद के कारण बेरोजगारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अब चपरासी भर्ती में वेटिंग लिस्ट का मुद्दा भी सरकार के सामने नई चुनौती बन गया है.

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