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दुनिया के किस देश में मिलती है सबसे ज्यादा न्यूनतम मजदूरी? जान लीजिए जवाब

दुनिया के कई देशों ने अपने मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन तय कर रखी है. ताकि उनके देश में मजूदरों का शोषण न हो सके. काम के लिए हर मजदूर को सही राशि मिल सके.

दुनिया के किस देश में मिलती है सबसे ज्यादा न्यूनतम मजदूरी? जान लीजिए जवाब
भारत में न्यूनतम मजदूरी राज्य, स्किल लेवल, इंडस्ट्री और ज्योग्राफ़िक जोन के हिसाब से काफी अलग-अलग हैं.

सबसे कम राशि या वेतन जो मजदूर को उसके काम के बदले देना अनिवार्य होता है, उसे न्यूनतम मजदूरी कहा जाता है. जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं बदल रही हैं और रहने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में काम के लिए सही न्यूनतम मजदूरी मिलना एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. कई देशों ने अपने यहां के मजूदरों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करके रखी है. ताकि उनको शोषण से बचा जाए सके और उनके काम के लिए उन्हें सही राशि मिल सके. ताकि वो अपनी बुनियादी जरूरतें जैसे भोजन, घर और कपड़े  पूरी कर सके. सरल शब्दों में समझा जाए तो मजदूरों के लिए, न्यूनतम वेतन का मतलब आर्थिक सुरक्षा है.

दुनिया के किस देश में मिलती है सबसे ज्यादा न्यूनतम मजदूरी

कई देशों ने अपने मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन तय कर रखी है. ताकि उनके नागरिकों को एक अच्छा जीवन स्तर मिल सके.  World Population Review में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार लक्ज़मबर्ग दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे ज्यादा न्यूनतम वेतन देता है. 18 साल से उससे ज्यादा उम्र के कुशल लोगों को इस देश में हर साल US$3,670 यानी 3,42,172 रूपये की न्यूनतम मजदूरी मिलती है.

सबसे ज्यादा न्यूनतम मजदूरी देने की सूची में दूसरे नंबर पर नीदरलैंड्स है. नीदरलैंड्स में प्रति घंटा न्यूनतम मजदूरी US$16.70 यानी 1,557 रुपये है. नीदरलैंड में  दैनिक, साप्ताहिक या मासिक न्यूनतम वेतन अनिवार्य नहीं है. इसके बजाय, यहां की सरकार ने प्रति सप्ताह काम के निश्चित घंटों के आधार के हिसाब से न्यूनतम मजदूरी रखी है.

न्यूज़ीलैंड में  कामगारों के लिए न्यूनतम मज़दूरी US$13.38 यानी रुपये 1,247 प्रति घंटा है. वहीं जो लोग ट्रेनिंग ले रहे हैं या कोई नई नौकरी शुरू कर रहे हैं, उनके लिए न्यूनतम मज़दूरी US$10.71 यानी 998.49 रुपये है. जर्मनी में प्रति घंटे न्यूनतम वेतन US$14.86 यानी 1,385 रुपये है.

भारत में कितनी है न्यूनतम मजदूरी

भारत में न्यूनतम मजदूरी राज्य, स्किल लेवल, इंडस्ट्री और ज्योग्राफ़िक ज़ोन के हिसाब से काफ़ी अलग-अलग हैं. केंद्र सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में आनेवाले वर्कर्स के लिए मिनिमम वेज तय किया है, जो कि इस प्रकार है-

1.सेमी-स्किल्ड वर्कर्स: 868 रुपये  प्रति दिन 
2. स्किल्ड वर्कर्स: 954 रूपये प्रति दिन 
3. हाइली स्किल्ड वर्कर्स: 1,035 रुपये प्रति दिन 

राज्यों के लिए भी एक बेसलाइन है, जिसके तहत कोई भी राज्य 178 रुपये प्रति दिन मजदूरी से कम नहीं दे सकता है.

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