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भोपाल में अतिथि शिक्षकों का हल्लाबोल: 'वादाखिलाफी' के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों Teachers

भोपाल में हजारों अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन। नियमितीकरण, 12 महीने का अनुबंध और लंबित वेतन की मांग को लेकर सरकार को दी चेतावनी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

भोपाल में अतिथि शिक्षकों का हल्लाबोल: 'वादाखिलाफी' के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों Teachers
शिक्षक भर्ती में 50% आरक्षण और अनुभव के आधार पर हर साल बोनस अंक दिए जाएं.

Protest In MP : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर नारों और विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठी है. प्रदेशभर से आए हजारों अतिथि शिक्षकों ने 'अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा' के बैनर तले सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हाथ में बैनर लिए इन शिक्षकों का एक ही आरोप है "सरकार ने वादा किया, लेकिन निभाया नहीं."

आखिर क्यों बढ़ा शिक्षकों का गुस्सा?

चुनाव से पहले जो आश्वासन तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दिए गए थे, आज वे फाइलों में दबे नजर आ रहे हैं. अतिथि शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने नियमित शिक्षकों जैसी नीति बनाने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और सालाना अनुबंध के जरिए जॉब सिक्योरिटी देने का वादा किया था. लेकिन हकीकत यह है कि 30 अप्रैल के बाद करीब 1.25 लाख अतिथि शिक्षकों के सिर पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है.

प्रमुख मांगें

अतिथि शिक्षकों ने सरकार के सामने मांगों की एक लंबी फेहरिस्त रखी है, जो उनके अस्तित्व से जुड़ी है.

अतिथि शिक्षकों के लिए कम से कम 30% पद आरक्षित कर एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाए.

आरक्षण और बोनस

शिक्षक भर्ती में 50% आरक्षण और अनुभव के आधार पर हर साल बोनस अंक दिए जाएं.

12 महीने का अनुबंध

अतिथि शिक्षकों को सालभर का जॉब कॉन्ट्रैक्ट मिले ताकि बीच सत्र में उन्हें निकाला न जा सके.

सुविधाएं और सुरक्षा

 बीमा, पीएफ (PF), स्वास्थ्य सेवाएं और पेड लीव (Paid Leaves) जैसे लाभ दिए जाएं.

सिस्टम की मार और पेंडिंग सैलरी

शिक्षकों ने e-attendance सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. राज्य सचिव रविकांत गुप्ता के अनुसार, तकनीकी खामियों की वजह से कई शिक्षक हाजिरी नहीं लगा पाते, जिससे उनका वेतन कट जाता है. कई जिलों में तो सितंबर से अब तक का भुगतान लंबित है, जिससे घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है.

नेताओं की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी

अतिथि शिक्षकों का दर्द यह है कि जिन नेताओं ने कभी उनके समर्थन में उतरने की बात कही थी, वे अब मौन हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने आश्वासनों को याद दिलाते हुए शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा.

NDTV देगा अभ्यर्थियों और छात्रों का साथ - छात्रों या फिर अभ्यर्थियों के इस तरह के प्रदर्शन से जुड़ी खबरों की हर कवरेज एनडीटीवी एजुकेशन पर आप देख सकते हैं. छात्र या अभ्यर्थी अपनी आवाज लोगों तक पहुंचाने के लिए NDTV से जुड़ सकते हैं और सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें- educationkhabar@ndtv.com पर मेल करना होगा. 
 

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