NDIA AND EUROPEAN UNION TRADE AGREEMENT 2026 : भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज अपने बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत पूरी कर ली है. इसे "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा जा रहा है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते पर मुहर लगाते हुए बड़ा ऐलान किया है कि इस डील से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे. ऐसे में आइए जानते हैं, भारत-EU की नई डील से किस सेक्टर में रोजगार पैदा होंगे.
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99% भारतीय सामान के लिए खुला यूरोप का दरवाजा
इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अब भारत से यूरोप जाने वाले 99% सामान पर कोई टैक्स (Duty) नहीं लगेगा। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (भारत) और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (EU) के हाथ मिलाने से 2091 लाख करोड़ रुपये का एक विशाल बाजार खुल गया है.
इन सेक्टर्स में होगी नौकरियों की होगी बम्पर पैदावार
उर्सुला वॉन डेर लेयेन के मुताबिक, यह समझौता श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labour Intensive Sectors) के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.
कपड़ा और गारमेंट्सयूरोपीय बाजारों में भारतीय कपड़ों पर लगने वाला 12% टैक्स खत्म होगा. इससे छोटे बुनकरों और गारमेंट फैक्ट्रियों में लाखों लोगों को काम मिलेगा.
लेदर और फुटवियरआगरा और कानपुर जैसे शहरों के जूता उद्योगों को अब यूरोप में जीरो ड्यूटी एंट्री मिलेगी, जिससे वहां काम करने वालों की कमाई बढ़ेगी.
मरीन और सीफूडवहीं, झींगा और मछली के निर्यात पर लगने वाला 26% तक का भारी टैक्स अब हट जाएगा. इससे तटीय राज्यों के मछुआरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स में रोजगार बढ़ेगा.
ज्वेलरी और खिलौनेजेम्स, ज्वेलरी और खिलौना उद्योगों को भी सीधा फायदा मिलेगा, जिससे लोकल कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी.
IT प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरीआसान वीजा
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और रिसर्चर्स के लिए यूरोप में काम करना और वहां रहना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा.
स्टूडेंट्स को मौकासमझौते के तहत भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद वहां रुकने और काम करने (Post-study work visa) के नियमों में बड़ी ढील दी गई है.
आयुर्वेद का बजेगा डंकाअब हमारे योग गुरु और आयुर्वेद डॉक्टर यूरोप में अपने क्लीनिक और वेलनेस सेंटर खोल सकेंगे.
किसानों की चांदीसीधे यूरोप जाएगा भारत का फल-सब्जीभारतीय किसानों के लिए भी इस डील से बड़ा फायदा होने वाला है. चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल (अंगूर, आम) और सब्जियों के लिए अब यूरोप का प्रीमियम बाजार खुला है. इससे बिचौलियों का रोल खत्म होगा और किसानों की सीधी कमाई बढ़ेगी. हालांकि, भारत ने डेयरी और अनाज जैसे सेंसिटिव एरिया को सुरक्षित रखा है ताकि हमारे छोटे किसानों के हितों को चोट न पहुंचे.
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