India-EU Summit 2026: 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 16वां शिखर सम्मेलन हुआ. इस मीटिंग में दोनों पक्षों ने एक ऐसे एजेंडे पर मुहर लगाई है, जो आने वाले समय में भारतीय युवाओं के लिए तरक्की के नए रास्ते खोल देगा. ऐसे में आइए जानते हैं, भारत-EU की नई डील से भारतीय छात्रों को कैसे फायदे होगा.
अब पढ़ाई और नौकरी के लिए नहीं खाने पड़ेंगे धक्के
भारत और यूरोपीय संघ ने माना है कि दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने के लिए छात्रों और वर्कर्स का एक-दूसरे के यहां आना-जाना बहुत जरूरी है. इसके लिए 'European Legal Gateway Office' नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है. यह एक 'वन-स्टॉप हब' की तरह काम करेगा, जहां काम के लिए यूरोप जाने वाले लोगों को सारी जानकारी और मदद एक ही जगह मिल जाएगी. इसकी शुरुआत IT सेक्टर (ICT) से की जा रही है.
2026 में शुरू होगा खास डायलॉगसाल 2026 में दोनों पक्ष मिलकर 'Education and Skills Dialogue' शुरू करेंगे. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर आपने भारत में कोई डिग्री ली है या कोई कोर्स किया है, तो यूरोप में उसे मान्यता मिलना आसान हो जाएगा. इससे छात्रों को क्रेडिट ट्रांसफर और जॉइंट डिग्री हासिल करने में आसानी होगी.
Erasmus+ और SPARC से चमकेगी किस्मतयूरोप का मशहूर Erasmus+ प्रोग्राम अब भारतीय छात्रों के लिए और भी बेहतर तरीके से उपलब्ध होगा. इसके साथ ही भारत का SPARC प्रोग्राम भी इसमें शामिल होगा. इसका सीधा मतलब है कि अब ज्यादा से ज्यादा भारतीय छात्र और रिसर्चर्स यूरोप की टॉप यूनिवर्सिटीज में जाकर रिसर्च कर सकेंगे और वहां की तकनीक सीख सकेंगे.
इंडिया में खुलेंगे यूरोपीय यूनिवर्सिटी के कैंपससिर्फ छात्र ही बाहर नहीं जाएंगे, बल्कि अब यूरोपीय संस्थान भी भारत आएंगे. समझौते के तहत भारत में विदेशी यूनिवर्सिटीज के सैटेलाइट कैंपस खोलने और जॉइंट प्रोग्राम शुरू करने पर जोर दिया जाएगा. साथ ही, वोकेशनल एजुकेशन यानी हाथ के हुनर सिखाने वाले कोर्सेज के लिए भी दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे.
सेफ और रेगुलर रास्तासरकार का मकसद यह है कि लोग गलत रास्तों (Irregular Migration) से विदेश न जाएं. इसलिए इस समझौते में 'सेफ और रेगुलर' रास्तों पर फोकस किया गया है. चाहे आप छात्र हों, रिसर्चर हों या फिर किसी खास हुनर के जानकार (Skilled Worker), अब आपके लिए यूरोप का वीजा और वहां बसने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा ट्रांसपेरेंसी होगी.
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