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Kajal Meena Case : DM या SDM रिश्वत लेते हुए पकड़े गए तो क्या होता है? काजल मीणा के केस ने उठाए सवाल

IAS-PCS dismissal process : डीएम या एसडीएम रिश्वत लेते पकड़े जाएं तो क्या होता है? जानें काजल मीणा केस से जुड़े कानूनी पहलू, सस्पेंशन और बर्खास्तगी के नियम इस आर्टिकल में.

Kajal Meena Case : DM या SDM रिश्वत लेते हुए पकड़े गए तो क्या होता है? काजल मीणा के केस ने उठाए सवाल
सिर्फ गिरफ्तारी का मतलब बर्खास्तगी (Dismissal) नहीं होता. इसके लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती है.

IAS PCS dismissal process : हाल ही में आईआईटी मंडी से बीटेक और RAS 2024 बैच की एसटी कैटेगरी की टॉपर काजल मीणा 60000 रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार की गईं.  इस केस ने सोशल मीडिया एक नई बहस छेड़ दी है कि आखिर इतने बड़े पदों पर बैठे लोग अगर रिश्वत लेते पकड़े जाएं, तो कानून उनके साथ क्या करता है? आज के इस आर्टिकल में हम आपके मन में उठ रहे इन सारे सवालों के जवाब देंगे.  

रंगे हाथों गिरफ्तारी और सस्पेंशन का खेल

जब भी किसी डीएम (DM) या एसडीएम (SDM) के खिलाफ रिश्वत की शिकायत मिलती है, तो राज्य की 'एंटी करप्शन ब्यूरो' (ACB) या 'विजिलेंस विभाग' जाल बिछाता है. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत रंगे हाथों पकड़ना सबसे बड़ा सबूत माना जाता है.

गिरफ्तारी के साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो जाती है:

48 घंटे का नियम

अगर कोई सरकारी अधिकारी 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे 'डीम्ड सस्पेंशन' (निलंबन) माना जाता है.

शक्तियों का छिनना

सस्पेंशन के दौरान अधिकारी न तो ऑफिस जा सकते हैं और न ही किसी सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. उन्हें केवल गुजारा भत्ता (Subsistence Allowance) मिलता है.

क्या नौकरी हमेशा के लिए चली जाती है?

सिर्फ गिरफ्तारी का मतलब बर्खास्तगी (Dismissal) नहीं होता. इसके लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती है:

विभागीय जांच

 सरकार एक जांच कमेटी बिठाती है जो यह देखती है कि अधिकारी ने सर्विस रूल्स का कितना उल्लंघन किया.

अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction)

आईएएस अधिकारियों के मामले में केंद्र सरकार और पीसीएस के मामले में राज्य सरकार से अदालत में मुकदमा चलाने की लिखित अनुमति लेनी पड़ती है.

दोष सिद्ध  (Conviction) होने पर क्या

अगर अदालत अधिकारी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाती है, तब संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है. बर्खास्तगी के बाद पेंशन और भविष्य की सरकारी नौकरियों के रास्ते बंद हो जाते हैं.
 

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