सिर्फ स्पेलिंग मिस्टेक पर नोटिस कैसे? सुप्रीम कोर्ट में बंगाल SIR मामले की सुनवाई पर कपिल सिब्बल

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए.

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सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल SIR मामले पर हुई सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी होनी चाहिए, और जिन लोगों के नाम किसी त्रुटि या विसंगति के कारण शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें पूरा अवसर दिया जाना अनिवार्य है. सुनवाई में कपिल सिब्बल ने दलील दी कि लोगों को सिर्फ नाम की स्पेलिंग मिस्टेक या पिता, मां की उम्र में 15 साल के अंतर जैसी बातों पर नोटिस भेजे जा रहे हैं.

इस पर चुनाव आयोग ने स्पेलिंग की गलती वाला आरोप नकार दिया, लेकिन स्वीकार किया कि पिता और संतान की उम्र में 15 वर्ष का अंतर होने पर नोटिस जारी किया जा रहा है. अदालत ने कड़ा सवाल उठाया कि उम्र में 15 साल का अंतर अनियमितता कैसे माना जा सकता है, और क्या इसे बाल विवाह जैसा मामला समझा जा रहा है. कोर्ट ने इस आधार पर नोटिस भेजने की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए और आयोग से प्रक्रिया को मनमाने ढंग से न चलाने की हिदायत दी.

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए आदेश दिया है कि पंचायत और वार्ड कार्यालयों में उन सभी व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं जिनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों पर इस प्रक्रिया का प्रभाव पड़ सकता है, उन्हें अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की अनुमति दी जाए, और यदि दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख बीत भी गई हो, तब भी उनके कागज़ात स्वीकार किए जाएं.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया कि पूरे मामले के दौरान कानून‑व्यवस्था पर कोई असर न पड़े और हर स्थिति में शांति बनाए रखी जाए. ममता सरकार को आदेश देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराई जाए, और राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो.

सुप्रीम कोर्ट ने तर्कसंगति आपत्तियों की कैटेगरी में चुनाव आयोग द्वारा रिजेक्ट किए गए लोगों की मदद के लिए निर्देश जारी किए. लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (तर्कसंगति आपत्तियों )कैटेगरी को पश्चिम बंगाल में SIR लिस्ट में शामिल होने के लिए डॉक्यूमेंट जमा करने का एक और मौका दिया है. ECI ने लगभग 2 करोड़ लोगों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए नोटिस जारी किया है. इनमें से एक कैटेगरी लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी है. दूसरी कैटेगरी मैप्ड (जो 2002 के SIR से जुड़े हैं) और अनमैप्ड (जो पहले के SIR से नहीं जुड़े हैं) हैं.

1.36 करोड़ लोग लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी कैटेगरी के हैं. पिता के नाम में गड़बड़ी, माता-पिता की उम्र में अंतर, दादा-दादी की उम्र में अंतर, छह से ज़्यादा बच्चे वगैरह SC ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले लोगों के लिए आदेश जारी किया गया. कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों के नाम ग्राम पंचायतों, हर सब-डिवीजन के ब्लॉक ऑफिस और हर शहर के वार्ड ऑफिस में दिखाए जाएं.

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प्रभावित व्यक्ति को किसी प्रतिनिधि (अधिकारी) के ज़रिए साइन या अंगूठे के निशान से आपत्ति दर्ज करने की अनुमति दी जाए. इन डॉक्यूमेंट को जमा करने के लिए पंचायत भवन/ब्लॉक ऑफिस में ऑफिस बनाया जाए. ये लोग तारीख खत्म होने के बाद भी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं. प्रभावित व्यक्ति पंचायत/ब्लॉक ऑफिस में लिस्ट पब्लिश होने के 10 दिनों के अंदर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं. राज्य सरकार आपत्ति दर्ज करने के लिए पंचायत भवन/ब्लॉक ऑफिस में पर्याप्त सुविधा देगी.

DGP पश्चिम बंगाल यह सुनिश्चित करें कि कोई कानून-व्यवस्था की समस्या न हो. जहां व्यक्ति द्वारा जमा किए गए डॉक्यूमेंट संतोषजनक नहीं हैं, वहां ECI ऐसे लोगों को सुनवाई के लिए नोटिस दे सकता है. डॉक्यूमेंट जमा करते समय लोगों को व्यक्तिगत रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से सुना जा सकता है. अधिकारी डॉक्यूमेंट प्राप्त करेंगे और एक रसीद देंगे. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी.

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