मजदूर दिवस पहली बार 1889 में मजदूरों के आठ घंटे काम करने की मांग को लेकर मनाया गया था भारत में आज भी लाखों मजदूर आधुनिक गुलामी की स्थिति में जबरदस्ती काम करते हैं और मेहनताना नहीं पाते ILO के अनुसार भारतीय औसतन सप्ताह में 45 घंटे से ज्यादा काम करते हैं जबकि कई यूरोपीय देशों में कम होता है