बंगाल में हिंसा पर सख्त चेतावनी, नियम टूटे तो दोबारा मतदान और चुनाव, आयोग ने दिया संकेत

पश्चिम बंगाल में चुनाव हिंसा की आशंका के बीच चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. AI‑सक्षम CCTV निगरानी, रीपोल और काउंटरमांड जैसे प्रावधानों के साथ CAPF की भारी तैनाती कर भयमुक्त और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है.

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बंगाल चुनाव में कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त
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  • पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने मतदाताओं को भयमुक्त और हिंसा रहित चुनाव का आश्वासन दिया है
  • मतदान केंद्रों पर AI-सक्षम सीसीटीवी कैमरों से रियल-टाइम निगरानी कर चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी
  • धारा 58A के तहत बूथ कैप्चरिंग या गड़बड़ी पाए जाने पर मतदान रद्द कर नए चुनाव कराने का विकल्प अपनाया जाएगा
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पश्चिम बंगाल में चुनाव लंबे समय से हिंसा, डराने‑धमकाने और गड़बड़ियों की छाया में रहे हैं, लेकिन इस बार चुनाव आयोग बेहद सख्त नजर आ रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा है कि मतदाताओं को पूरी तरह भयमुक्त माहौल दिया जाएगा. उनके मुताबिक, इस बार चुनाव हिंसा, धमकी, फर्जी मतदान, बूथ कैप्चरिंग या किसी भी तरह की अनियमितता से मुक्त होंगे. परदे के पीछे चुनाव आयोग ने कड़े कदम उठाने की तैयारी कर ली है. सभी पोलिंग अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी. आयोग ने साफ संदेश दिया है कि लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होगी.

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AI निगरानी, रीपोल और धारा 58A का सख्त इस्तेमाल

चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए मतदान केंद्रों पर AI‑सक्षम सीसीटीवी कैमरों से रियल‑टाइम निगरानी की जाएगी. आयोग के सूत्रों के अनुसार, यदि कैमरे बंद पाए जाते हैं या किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि रिकॉर्ड होती है, तो उस पोलिंग बूथ पर तुरंत पुनर्मतदान (रीपोल) का आदेश दिया जा सकता है. इसके जरिए मतदान की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है. चुनाव आयोग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 58A लागू करने के लिए भी पूरी तरह तैयार है. इसके तहत बूथ कैप्चरिंग या गंभीर गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित मतदान को रद्द किया जा सकता है. अगर रिटर्निंग अधिकारी की रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो न केवल मतदान अमान्य घोषित किया जा सकता है, बल्कि नए सिरे से चुनाव कराने का विकल्प भी अपनाया जाएगा.

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अभूतपूर्व सुरक्षा, बड़े अफसर बदले, CAPF की भारी तैनाती

सूत्रों के मुताबिक, यदि रीपोल के दौरान भी गड़बड़ियां जारी रहीं, तो पूरे निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव काउंटरमांड किया जा सकता है. इस बार सुरक्षा व्यवस्था भी अभूतपूर्व बताई जा रही है. आयोग ने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं, जिनमें मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले शामिल हैं. पूरे राज्य में करीब 2400 सीएपीएफ कंपनियों की तैनाती की गई है, जो हाल के वर्षों में चुनाव के दौरान सबसे बड़े सुरक्षा अभियानों में से एक मानी जा रही है. आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि पश्चिम बंगाल के साथ‑साथ असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भी किसी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मतदान स्थगित करने जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा.
 

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