- केरल की दो महिला टीचर्स को ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है
- MDMA ड्रग केस में नाम आने के बाद 'समग्र शिक्षा केरल' ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया
- टीचर्स की तनख्वाह 12 हजार रुपये महीना थी. लेकिन उनके शौक लाखों कमाने वालों जैसे थे, जिससे उन पर शक हुआ
केरल की दो महिला टीचर्स को ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. MDMA ड्रग केस में नाम आने के बाद 'समग्र शिक्षा केरल' ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया है. कोझिकोड जिले में पेराम्ब्रा ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) से जुड़ीं ये दोनों महिला टीचर्स फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर के.सी. कीर्तना और स्पेशल एजुकेटर के. काव्या हैं. दोनों ही अस्थायी स्पेशल एजुकेटर्स के तौर पर काम कर रही थीं. हैरानी की बात यह है कि इनकी तनख्वाह 12 हजार रुपये महीना थी. लेकिन उनके ऐश-ओ-आराम में कोई कमी नहीं थी.
12 हजार रुपये सैलरी में लग्जरी लाइफ स्टाइल
दोनों ही टीचर्स वैसी लग्जरी लाइफ जी रही थीं जैसा 12 हजार रुपये महीना कमाने वाला शख्स नहीं जी सकता. पुलिस के मुताबिक, उनके पास महंगी कारें थी. वह इनकम से कहीं ज्यादा रकम खर्च करती थीं. इस बात से उनके साथियों के मन में शक पैदा हो गया कि सैलरी से बड़े शौक आखिर ये कर कैसे पा रही हैं. उन्होंने मामले की सूचना अधिकारियों को दी.
केरल की दो महिला टीचर्स का ड्रग्स कनेक्शन
मामले की जांच शुरू की गई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांचकर्ताओं ने सबसे पहले सफवान नाम के एक शख्स को MDMA के साथ हिरासत में लिया. उससे पूछताछ के बाद पुलिस को एक अच्छी तरह से संगठित ड्रग सर्कुलेशन नेटवर्क का पता चला. कोझिकोड रूरल पुलिस द्वारा शुरू किए गए नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान 'ऑपरेशन तूफान' के दौरान ही दोनों महिला टीचर्स को गिरफ्तार किया गया.
जांचकर्ताओं के मुताबिक, ग्राहक ड्रग्स के ऑर्डर के लिए खाड़ी देश के एक फोन नंबर पर संपर्क करते थे. उनको पेमेंट के लिए एक क्यूआर कोड भेजा जाता था. पमेंट कंफर्म होने पर खरीदारों को छिपे हुए "डेड-ड्रॉप" पॉइंट्स (जहां ड्रग्स छिपाए गए थे) की तस्वीरें या लोकेशन की जानकारी दी जाती थी.
ड्रग नेटवर्क से जुड़े लेन-देन की हो रही जांच
पुलिस ने बताया कि वित्तीय जांच में पता चला कि पेमेंट लेने के लिए जिन क्यूआर कोड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था, वे दो महिलाओं से जुड़े थे. अब लाखों रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है. जांचकर्ताओं को शक है कि इन खातों का इस्तेमाल एक बड़े ड्रग नेटवर्क से जुड़े पैसे के लेन-देन के लिए किया गया था.
स्कूल में नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्यक्रम का हिस्सा थी
आरोपी टीचर्स के साथी ये सब जानकर हैरान हैं. उनका कहना है कि दोनों ही महिलाएं स्कूल में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे कार्यक्रम का हिस्सा थीं. दोनों ने पहले सरकार के नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिसमें छात्रों तक पहुंच बनाने वाले अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम शामिल थे. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि दोनों टीचर्स ने क्या छात्रों को भी ड्रग्स दिए थे?
मामले की जांच के लिए वडाकरा स्टेशन हाउस ऑफिसर की अगुवाई में SIT बनाई गई है.टीम में एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड, साइबर सेल, महिला सेल और आस-पास के पुलिस स्टेशनों के अधिकारी शामिल हैं. पुलिस का मुख्य फोकस MDMA के सोर्स का पता लगाने, विदेश से नेटवर्क चलाने वालों को खोजने और डिस्ट्रीब्यूशन चेन में शामिल अन्य लोगों का पर्दाफाश करने पर है.
इनपुट- अश्विन नंदकुमार
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