पेंशनभोगियों के लिए 'गुड न्यूज'! DA-DR Hike पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार अब नहीं कर पाएगी भेदभाव

DA-DR News : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब पेंशन पर महंगाई के आधार पर DR दिया जाता है, तब DA से कम दर पर DR तय करना- जब दोनों ही महंगाई से जुड़े हैं और समान उद्देश्य की पूर्ति करते हैं.

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  • SC ने कार्यरत कर्मचारियों को अधिक DA और पेंशनभोगियों को कम DR देना समानता के अधिकार का उल्लंघन माना.
  • अदालत ने कहा कि DA और DR दोनों का उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को कम करना है इसलिए दरों में भेदभाव उचित नहीं.
  • केरल सरकार की अपील खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि कार्यरत कर्मचारियों को अधिक महंगाई भत्ता (DA-DR Hike) और पेंशनभोगियों को कम महंगाई राहत देना मनमाना है और यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है. अदालत ने कहा कि दोनों का उद्देश्य समान है- महंगाई के प्रभाव को कम करना. इसलिए दरों में भेदभाव नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष को भी सही मना, जिसमें HC ने कहा था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

जस्टिस मनोज मिश्रा और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केरल सरकार और केरल राज्य सड़क परिवहन निगम  (KSRTC) की अपीलें खारिज कर दीं और केरल हाईकोर्ट उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें DA और DR की अलग-अलग दरों को असंवैधानिक बताया गया था.

'DA से कम दर पर DR तय करना- जब दोनों ही महंगाई से जुड़े'

अदालत ने कहा कि जब पेंशन पर महंगाई के आधार पर DR दिया जाता है, तब DA से कम दर पर DR तय करना- जब दोनों ही महंगाई से जुड़े हैं और समान उद्देश्य की पूर्ति करते हैं. स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण और मनमाना है. इसलिए हाईकोर्ट का यह निष्कर्ष सही है कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है. ये विवाद 2021 के एक सरकारी आदेश से जुड़ा था, जिसमें कार्यरत कर्मचारियों के लिए DA में 14% की वृद्धि की गई, जबकि पेंशनभोगियों के लिए DR केवल 11% बढ़ाया गया.

 दोनों ही बढ़ोतरी एक ही महंगाई सूचकांक से जुड़ी थीं और मार्च 2021 से लागू हुई थीं. पहले हाईकोर्ट के एकल जज ने इस वर्गीकरण को सही ठहराया था, लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे भेदभावपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया. इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी.

फैसला लिखते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि DA और DR का उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई से होने वाली कठिनाइयों से राहत देना है. महंगाई दोनों पर समान प्रभाव डालती है, इसलिए बढ़ोतरी की दर में अंतर का उस उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं है, जिसे हासिल करना है.

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राज्य की इस दलील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया कि वित्तीय बोझ के कारण अलग दरें तय की गईं. अदालत ने कहा कि वित्तीय संकट लाभ देने में देरी का कारण हो सकता है, लेकिन एक बार लाभ देने का निर्णय हो जाए तो उसमें भेदभाव नहीं किया जा सकता.

DA और DR क्या होता है?

DA (Dearness Allowance) और DR (Dearness Relief) मुख्य रूप से महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए दिए जाने वाले भत्ते हैं. तकनीकी रूप से इन दोनों के बीच का अंतर केवल इनके लाभार्थियों के आधार पर तय होता है; जहाँ सेवारत कर्मचारियों को मिलने वाले इस लाभ को 'DA' यानी महंगाई भत्ता कहा जाता है, वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों या पेंशनभोगियों के लिए इसे 'DR' यानी महंगाई राहत के रूप में जाना जाता है.

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