मुफ्त की रेवड़ी पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- गंभीर विचार की जरूरत

चुनाव के समय की जाने वाली मुफ्त की योजनाओं (फ्रीबीज) को सुप्रीम कोर्ट ने अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस पर गंभीर विचार की आवश्यकता है.

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सुप्रीम कोर्ट.
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  • सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत ने चुनावी फ्रीबीज पर गंभीर विचार की आवश्यकता को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है.
  • याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने देश के बढ़ते कर्ज के मद्देनजर फ्रीबीज मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी.
  • CJI ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मुफ्त सेवाएं राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के अंतर्गत आती हैं.
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नई दिल्ली:

चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को मुफ्त की योजनाओं (फ्रीबीज) दिए जाने से जुड़े मामले को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे “बहुत ही महत्वपूर्ण मामला” करार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर गंभीर विचार की आवश्यकता है. दरअसल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में फ्रीबीज पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने काफी समय से लंबित इस मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान देश पर बढ़ते कर्ज की ओर दिलाते हुए कहा कि वर्तमान में भारत पर लगभग ₹250 लाख करोड़ का कर्ज है.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ हद तक यह नीतिगत निर्णय का विषय हो सकता है. ⁠लेकिन यह भी विचार करने की जरूरत है कि क्या राज्य के राजस्व का एक हिस्सा केवल राज्य के विकास कार्यों के लिए सुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए?

स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मुफ्त सुविधाएं संवैधानिक जिम्मेदारी के दायरे मेंः सीजेआई

CJI ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य स्वास्थ्य या शिक्षा जैसी सुविधाएं मुफ्त में देता है, तो यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी के दायरे में आता है. ऐसे मामलों में राज्य अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहा होता है. इस पर वरिष्ठ वकील  शादान फरासत ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्य महिलाओं को राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देते हैं.

फ्रीबीज पर गंभीर विचार की जरूरतः सीजेआई

इस पर CJI ने कहा कि “राज्य की संपदा का इस तरह से वितरण करना और उसे कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करना—यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर गंभीर विचार की आवश्यकता है. अदालत ने कहा कि वह यह तय करेगी कि किन मामलों को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाना चाहिए. ⁠हालांकि हल्के अंदाज में CJI ने कहा कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए शाम की बेंच गठित किए जाने की आवश्यकता भी हो सकती है.

पिछले साल भी फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी

पिछले साल भी फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था, 'लोग काम करना नहीं चाहते, क्योंकि आप उन्हें मुफ्त राशन दे रहे हैं. बिना कुछ किए उन्हें पैसे दे रहे हैं.' कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि इन लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बजाय, क्या आप मुफ्त की योजनाएं लागू करके परजीवियों की जमात नहीं खड़ी कर रहे हैं?

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