जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) के खिलाफ 18 मार्च को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में  जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) को चुनौती दी गई है. ये धारा निर्विरोध चुनावों में यानी मतदान कराए बिना उम्मीदवारों के सीधे चुनाव का प्रावधान करती है.

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जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 53 (2) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. जनहित याचिका को 18 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि ये बहुत प्रासंगिक मुद्दा है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में  जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) को चुनौती दी गई है. ये धारा निर्विरोध चुनावों में यानी मतदान कराए बिना उम्मीदवारों के सीधे चुनाव का प्रावधान करती है.

याचिकाकर्ता विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने याचिका में सुनवाई के दौरान बताया कि सूरत निर्वाचन क्षेत्र से एकमात्र उम्मीदवार को हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में विजेता घोषित किया गया था, क्योंकि चुनाव निर्विरोध हो गया था. चूंकि कांग्रेस पार्टी द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार के नामांकन पत्र को खारिज किए जाने और अन्य उम्मीदवारों द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा उम्मीदवार को विजेता घोषित किया गया था. 

याचिकाकर्ता ने आगे कहा है कि पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद से अनिर्वाचित उम्मीदवारों की संयुक्त संख्या 258 है. याचिकाकर्ता के अनुसार, ये प्रावधान निर्वाचन अधिकारी को मतदान कराने से रोकते हैं यदि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या सीटों की संख्या के बराबर या उससे कम है. इसका परिणाम मतदाता के मौलिक अधिकार से वंचित होना है. इसके तहत वह चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के प्रति अपनी असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में 'NOTA' (इनमें से कोई नहीं) का चयन कर सकता है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस प्रावधान पर दखल देने की मांग की है.

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